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पादरी चंगाई सभा में जिस चमत्कार का दावा करते हैं वह वास्तव में लोगों को मूर्ख बनाने का एक जरिया है। इसमें सिर्फ अन्य मत-पंथ के लोग ही नहीं बल्कि ईसाई भी गुमराह होते हैं।
—आर.एल.फ्रांसिस
अध्यक्ष, पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट
भारत में एक स्व नियामक संस्था है 'एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया', जिसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होती है कि विज्ञापन उपभोक्ता को गुमराह करने वाले न हों। लेकिन ईसाई मिशनरी आएदिन चंगाई सभा के लिए बाकायदा समाचार पत्रों में गुमराह और चमत्कार करने वाले विज्ञापन जारी करती हैं। इन विज्ञापनों के माध्यम से वे लोगों से चंगाई सभा में आने की अपील ही नहीं करते बल्कि, कहते हैं,'आइये! देखिए प्रभु यीशु का चमत्कार! यीशु ही है जो सबको सुखी रख सकता है। जो भी परमात्मा के बेटे जीसस की शरण में आएगा उसकी बड़ी से बड़ी बीमारियां और ऊपरी बाधा दूर हो जाएंगी।' लेकिन सवाल है कि अगर यीशु के चमत्कारों से ही सब ठीक हो जाते तो फिर टेरेसा को अस्पताल की शरण लेने की क्या जरूरत थी? क्यों बेनी हिन जैसे मिशनरी जो चंगाई सभा में चीख-चीख कर यीशु के चमत्कारों से सभी रोगों से मुक्त होने का दावा करते हैं लेकिन स्वयं ह्दय की समस्या आते ही कैलीफोर्निया के अस्पताल में इलाज कराने लगते हैं? (देखें लिंक- ँ३३स्र://६६६.ूँ१्र२३्रंल्ल३ङ्मिं८.ूङ्मे/ं१३्रू'ी/ुील्लल्ल.ँ्रल्लल्ल.ंिे्र३३ीि.३ङ्म.ँङ्म२स्र्र३ं'.६्र३ँ.ँीं१३.स्र१ङ्मु'ीे२/50641.ँ३े) तब इनके चमत्कार का क्या हुआ? क्यों ये लोग अस्पताल में इलाज के लिए गए , प्रार्थना करके ही ठीक कर लेते!
सच यह है कि ईसाई मिशनरियां देश के वनवासी अंचलों में चंगाई सभा के जरिए ही 'बे्रनवाश' करके कन्वर्ट करती हैं। चंगाई सभा में वे वनवासियों के सामने ऐसे-ऐसे ढोंग-पाखंड और झूठी कहानियां बताती हैं, जिनको सुनकर वे बड़ी ही आसानी के साथ इनके झांसे में आ जाते हैं। असल में इन वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा के साथ-साथ चिकित्सा न के बराबर ही है। इसी का फायदा मिशनरी उठाते हैं। कुछ ऐसे ही अंधविश्वासी करतब जिनके द्वारा यह कन्वर्जन करते हैं इस तरह हैं:-
ल्ल छत्तीसगढ़-अबूझमाड़ के रहने वाले राकेश कुमार सिंह एक किस्सा बताते हुए कहते हैं, 'नारायणपुर में एक बड़ा चर्च है, जहां हर रविवार को माड़ व आस-पास के दूरदराज क्षेत्रों से भी वनवासी एकत्र होते हैं। इन सभी को इनके क्षेत्रों में तैनात किए गए पादरी यहां इसलिए लाते हैं ताकि यहां पर चर्च के प्रमुख पादरी की दुआ मिल सके। यह पादरी 'हर इलाज की एक दवा' यानी एक पुडि़या देते हैं, जिस पर जीसस का चित्र होता है। इनके द्वारा वनवासियों के सामने ऐसा प्रतीत कराया जाता है कि सभी पुडि़यां एक ही जैसी हैं,जबकि पादरी पहले ही इन लोगों से जान लेता है कि इनकी समस्या क्या है, जैसे-बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द आदि…। जिसके बाद पादरी द्वारा इन पुडि़यों में उसी मर्ज की दवा डाली जाती है। पादरी परिवार से कहता है कि दवा में चर्च की दुआ है।' इसका असर यह होता है कि दवाई खाते ही उनका कष्ट दूर होने लगता है। स्थानीय पादरी इनसे बराबर संपर्क में रहता है। उनको पूरा विश्वास दिलाता कि यह यीशु की दुआ से ही हुआ है।
ल्ल छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार राजीव रंजन प्रसाद एक पत्रकार के हवाले से बताते हुए कहते हैं,'उत्तर बस्तर-कांकेर के माल गांव के एक पादरी भोलेभाले ग्रामीणों से एक कार को पीछे से धकेलने के लिए बोल रहा था और स्वयं गाड़ी के अंदर बे्रक दबाए बैठा था। वह उन ग्रामीणों से बार बार बोल रहा था 'अगर तुम्हारे भगवान में शक्ति है तो इस गाड़ी को आगे बढ़ा दें। और जोर से कहता अपने भगवान का नाम लो, हनुमान,राम, कृष्ण की जय बोलो। भोलेभाले लोग ऐसा ही कर रहे थे, लेकिन गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही थी। पादरी कहता,'देखा तुमने! तुम्हारे भगवान में शक्ति नहीं है, इसलिए ही तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही! लेकिन तुम सभी लोग यीशु की जय बोलो, अभी गाड़ी चलने लगेगी। पादरी गाड़ी के अंदर बैठता और लोगों द्वारा जैसे ही धक्का दिया जाता है वह बे्रक से पैर हटा देता और गाड़ी आगे बढ़कर चालू हो जाती है। पादरी उच्च स्वर में कहता, देखा यीशु का आप लोगों ने चमत्कार!
ल्ल एक पादरी तालाब के पास कुछ लोगों को यह दिखा रहा था कि कैसे भगवान की मूर्ति पानी में डूब जाती है और क्रॉस तैरता रहता है। इसके लिए वह बाकायदा मूर्ति को उनके सामने पानी में डालता और कहता था कि देखा! आपके भगवान में शक्ति ही नहीं हैं तभी तो यह डूब गए। जबकि क्रॉस, (लकड़ी का बना हुआ होता है) तैरता रहता था। साफ समझा जा सकता है कि चर्च किस तरह भोलेभाले लोगों को बरगलाकर कन्वर्ट करने के लिए लालायित है। अश्वनी मिश्र











