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नागपुर में 13, 14 एवं 15 मार्च, 2015 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक हुई। इस अवसर पर सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने वर्ष 2014-15 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सभा में योग दिवस और मातृभाषा में शिक्षा संबंधी दो प्रस्ताव भी पारित हुए। प्रतिवेदन में बताया गया कि देशभर में संघ की शाखाएं निरंतर बढ़ रही हैं। इससे प्रतीत होता है कि जो कदम बढ़े हैं वे रुकेंगे नहीं और संघ कार्य विश्वव्यापी रूप धारण करेगा।
पाञ्चजन्य ब्यूरो
एक भाव, एक संकल्प लिए जहां विविध व्यक्ति एकत्रित हो जाते हैं, उसे अपने भारत में तीर्थ माना जाता है और वह स्थान भी विशेष हो तो पुण्यतीर्थ हो जाता है। भारतीय राष्ट्र जीवन में नागपुर का ऐसा ही विशेष स्थान है। 'संघ-गंगोत्री' नाम से विख्यात इस नगरी में इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का आयोजन 13 से 15 मार्च तक हुआ। संघ की कार्यपद्धति में संघ द्वारा प्रस्तुत संविधान के अनुसार इस प्रकार की वार्षिक प्रतिनिधि सभा का आयोजन एक आवश्यक कार्यक्रम है। इस सभा में कार्य का सिंहावलोकन, मूल्यांकन, सामूहिक चिन्तन तथा दिशादर्शन जैसे चतुर्विध उद्देश्यों को पूर्ण करने का प्रयास होता है। प्रतिनिधि सभा नागपुर स्थित रेशिमबाग में डॉ़ हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर के महर्षि व्यास सभागृह में सम्पन्न हुई। बिना स्तंभों के भव्य सभागृह में सामने मंच के दोनों ओर लगे डॉ़ हेडगेवार तथा श्रीगुरुजी के आसनस्थ पूर्ण चित्र ऐसे लगते थे जैसे यह दो संघ-शक्ति प्रणेता प्रत्यक्ष मंच पर ही विराजमान हुए हों। मंच के पीछे लगाया हुआ बोध वाक्य सभी प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं के मन पर संघ का लक्ष्य और कार्य बिंबित कर रहा था, वह बोध वाक्य था –
'कर्ममय जीवन रचें हम,
विश्व का कल्याण हो
चिर पुरातन राष्ट्र का,
फिर से नया निर्माण हो'
प्रतिनिधि सभा के प्रारंभ में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत तथा सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी द्वारा भारत माता पूजन हुआ। इसके बाद प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही आरंभ हुई। श्री भैयाजी जोशी ने सभी कार्यकर्ता तथा देश के विविध स्थानों से आए प्रतिनिधियों का
स्वागत किया।
गत वर्ष की प्रतिनिधि सभा 7, 8 एवं 9 मार्च, 2014 को बेंगलुरु में सम्पन्न हुई थी, जिसका कार्यवृत्त कार्यालय सचिव श्री विकास तेलंग ने सभा के सम्मुख पढ़ा और सभा ने 'ओम' ध्वनि से एक स्वर में स्वीकृति दी। इसके बाद श्री भैयाजी जोशी ने वर्ष 2014-15 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके सम्पादित अंश यहां प्रकाशित किए जा रहे हैं।
सरसंघचालक जी का प्रवास
वर्ष 2014-15 में क्षेत्रश: प्रवास में संगठनात्मक बैठकों के साथ-साथ विशेष कार्यक्रमों में उपस्थिति और विशेष संपर्क की योजना बनी थी। देवगिरी प्रान्त का विशाल एकत्रीकरण और इम्फाल में संपन्न शीत सम्मेलन, दोनों ही कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं का सघन प्रयास और समाज का सहभाग अत्यंत प्रेरक रहा। ब्रज एवं उत्तराखंड के महाविद्यालयीन छात्र शिविर, नियोजन और उपस्थिति की दृष्टि से प्रभावी रहे। विशेष संपर्क के क्रम में मंगलयान योजना के प्रमुख श्री मन्नादुरै, नोबल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी, आचार्य महाश्रमण जी, भंते राहुलबोधि जी, स्वामी दयानंद सरस्वती जी, पुरी के महाराजा श्री गजपति आदि महानुभावों से मिलना हुआ।
सरकार्यवाह जी का प्रवास
2014-15 की प्रवास योजना में अन्यान्य संगठनात्मक बैठकों के साथ ही एक विशेष बैठक का आयोजन सभी स्थानों पर किया गया। कार्य विस्तार के नाते अधिकाधिक ग्रामों तक कार्य खड़ा हो इस दृष्टि से जिलांे के मुख्य मार्ग पर आने वाले ग्रामों तक संपर्क करने की योजना बनाई गई। ऐसे सभी ग्रामों से चयनित व्यक्तियों को निमंत्रित किया गया। प्रवास के दौरान 11 क्षेत्रों मेंं ऐसी 15 बैठकों का आयोजन किया गया जिनमें 34 जिलों के 1,522 ग्रामों से 2,919 लोग उपस्थित रहे। बैठकों में नए संपर्क में आए व्यक्तियों का प्रतिशत लगभग 40 रहा।
कार्यकर्ता विकास वर्ग
कार्यकर्ताओं की क्षमता विकास की दृष्टि से वर्ष 2014-15 में मध्य-क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों के वर्ग संपन्न हुए। अनुभव अच्छा रहा। अब प्रतिवर्ष क्षेत्रश: वर्ग होने वाले हैं।
कार्य विभाग वृत्त
शारीरिक विभाग : गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रहार महायज्ञ में सभी बिन्दुओं में, जैसे सहभागी शाखाएं, स्वयंसेवक, कुल प्रहार, 1,000 से अधिक प्रहार लगाने वालों की संख्या आदि में अच्छी वृद्धि हुई है। उज्जैन में बालकों के लिए मलखंब का विशेष प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया गया, जिसमें 26 प्रान्तों से 54 बाल एवं किशोर स्वयंसेवक सहभागी हुए। घोष प्रमुखों की बैठक में 34 प्रान्तों का प्रतिनिधित्व रहा।
बौद्धिक विभाग : बौद्धिक विभाग द्वारा भोपाल में एक विशेष 'अखिल भारतीय बौद्धिक अभ्यास वर्ग' का आयोजन हुआ। इस वर्ग में हिन्दुत्व, हिन्दू राष्ट्र, सामाजिक समरसता, विकास की अवधारणा, जैन, बौद्ध, सिख मतों का सार, मातृशक्ति इन पांच विषयों की प्रमुख अधिकारियों द्वारा प्रस्तुति के बाद गहन चर्चा की गई। सरसंघचालक जी का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
प्रचार विभाग
नारद जयंती के उपलक्ष्य में पत्रकार सम्मान तथा प्रबोधन के वार्षिक कार्यक्रमों की शृंखला में 118 स्थानों पर कार्यक्रम संपन्न हुए, जिनमें 3,401 पत्रकार एवं अन्य नागरिक उपस्थित रहे। 355 स्तंभ लेखक संपर्क में आए। कम्युनिटी रेडियो चलाना एवं दूरदर्शन पर पैनल चर्चा के प्रशिक्षण वर्ग भी संपन्न हुए। परिणामस्वरूप 217 कार्यकर्ता विविध भाषाओं के 68 टेलीविजन चैनलों पर आयोजित चर्चा सत्रों में नियमित जाने लगे हैं।
प्रान्तों में संपन्न विशेष कार्यक्रम
तमिलनाडु में ऐतिहासिक पथ संचलन : इस वर्ष राजा राजेंद्र चोल के सिंहासनारोहण को 1000 वर्ष पूर्ण हुए। तमिलनाडु के कार्र्यकर्ताओं ने 9 नवंबर, 2014 को सभी जिला केन्द्रों में पथ संचलन निकालने की योजना बनाई। राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने अनुमति देने से मना कर दिया। मामला न्यायालय में पहुंचा। न्यायालय ने संघ के पक्ष में निर्णय दिया, इसके बावजूद प्रशासन अपनी जिद्द पर अड़ा रहा। संघ ने न्यायालयीन निर्णय एवं अपनी योजना के अनुसार संचलन निकाले। प्रशासन ने 35,000 बंधु-भगिनियों को गिरफ्तार किया। प्रशासन के इस व्यवहार को लेकर न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज किया गया है।
'समर्थ भारत'
कर्नाटक दक्षिण प्रांत ने बंेगलुरू में 'समर्थ भारत' विषय पर दो दिवसीय चर्चा सत्र का आयोजन किया। 3,852 युवक इस शिविर में सहभागी हुए। 48 प्रकार के विषय चर्चा हेतु तय किए गए थे। परिणामत: 77 युवकों ने एक वर्ष देश के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
साप्ताहिक मिलन द्वारा सामाजिक समरसता
कोंकण प्रान्त में रत्नागिरी जिले की दापोली तहसील का ग्राम आसोंदा पेयजल, सामाजिक बहिष्कार और अन्य समस्याओं से जूझता रहता था। स्वयंसेवकों ने सामाजिक समरसता की दिशा में प्रयास प्रारम्भ किया। लगभग चार महीने के निरंतर प्रयासों से गांव का वातावरण सकारात्मक हो गया है।
देवगिरी प्रान्त में महासंगम
देवगिरी प्रान्त में 11 जनवरी, 2015 को महासंगम आयोजित हुआ। इसमें 1,223 मंडलों, 686 बस्तियों और 3,196 स्थानों से 42,870 स्वयंसेवक उपस्थित रहे। महासंगम में लगभग 25,000 नागरिक महिला, पुरुषों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।
गुजरात में कार्यकर्ता शिविर
तेरह वर्ष से अधिक आयु के स्वयंसेवक, जो शाखा टोली से लेकर ऊपर तक के दायित्व का निर्वहन कर रहे हों, ऐसे ही स्वयंसेवकांे का शिविर लगाया गया। इसमें गुजरात के सभी जिलों एवं तहसीलों से प्रतिनिधित्व रहा। 14,370 की उपस्थिति रही। 79 प्रतिशत स्वयंसेवक 40 वर्ष से कम आयु वर्ग के थे।
राष्ट्र साधना सम्मेलन
11 जनवरी, 2015 को विदर्भ प्रान्त के यवतमाल विभाग ने 'राष्ट्र साधना सम्मेलन' का आयोजन किया। कार्य विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से किया गया यह आयोजन सफल रहा। सम्पूर्ण कार्यक्रम में पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया।
शीत शिविर, मालवा
इस शीत शिविर में 1,238 महाविद्यालयीन स्वयंसेवक उपस्थित रहे। 'परिवर्तन का वाहक : प्राध्यापक' इस विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।
महाकौशल प्रान्त
महाकौशल प्रान्त में व्यापक सम्पर्क योजना, विस्तारक योजना और स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम आयोजित हुए। 7,254 स्वयंसेवकों के द्वारा 3,17,264 परिवारों से सम्पर्क हुआ। विस्तारक योजना सेे 839 विस्तारक निकले। परिणामत: 249 नए स्थानों पर शाखाएं प्रारम्भ हुई हैं। स्वास्थ्य शिविर में लगभग 24,000 बंधु लाभान्वित हुए।
संघ परिचय वर्ग, हरियाणा
हरियाणा प्रान्त में गत सत्र में 4723 कार्यकर्ताओं ने प्राथमिक संघ शिक्षा वगार्ें में प्रशिक्षण प्राप्त किया। फलस्वरूप शाखायुक्त मंडलों की संख्या में 30 प्रतिशत, शाखायुक्त बस्तियों की संख्या में 23 प्रतिशत, शाखा स्थानों में 34 प्रतिशत एवं कुल शाखाओं में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पुस्तक प्रदर्शनी तथा पुस्तक मेला
जनसामान्य को अपने धर्मग्रंथों, अपने इतिहास के प्राचीन साहित्य तथा संघ साहित्य से अवगत कराने के उद्देश्य से जालंधर (पंजाब) में इस मेले का आयोजन किया गया।
महाविद्यालयीन छात्र शिविर, उत्तराखंड
हरिद्वार में पतंजलि योग पीठ के परिसर में आयोजित इस शिविर में 4,875 महाविद्यालयीन छात्र, 105 विधि स्नातक, 38 शोध छात्र, 93 वैद्यकीय और तकनीकी छात्र उपस्थित थे। 31 प्राध्यापक भी शिविर में सम्मिलित हुए। सरसंघचालक जी की उपस्थिति में आयोजित बैठक में विविध विश्वविद्यालयों के 11 कुलपति भी उपस्थित थे। समापन समारोह में योग गुरु स्वामी रामदेव की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
विभागश: एकत्रीकरण, मेरठ प्रांत
छह स्थानों पर हुए एकत्रीकरण में 52,985 की उपस्थिति रही। कुल 3,500 ग्रामों का प्रतिनिधित्व हुआ।
युवा संकल्प शिविर, ब्रज प्रांत
आगरा में 1 से 3 नवंबर, 2014 तक 'युवा संकल्प शिविर' आयोजित हुआ। इसमें सभी जिलों से 3,817 शिविरार्थी सम्मिलित हुए। इन सबको सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। ओलंपिक पदक विजेता और केन्द्रीय मंत्री श्री राज्यवर्धन सिंह राठौर व पटना के सुपर-30 के संचालक श्री आनन्द कुमार की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।
उत्तर असम
उत्तर असम प्रांत में एक विशेष योजना के कारण सात दिन के लिए 258 अल्पकालीन विस्तारक निकले जिसके कारण 188 शाखाओं की वृद्धि हुई।
विषेश कार्यक्रम, मणिपुर प्रान्त
इस वर्ष सरसंघचालक जी का मणिपुर प्रवास अच्छा रहा। उनके सान्निध्य में वर्तमान एवं पूर्व प्रचारकों की बैठक हुई, एकल विद्यालय के प्रशिक्षण केन्द्र का लोकार्पण हुआ आदि। 7 दिसम्बर, 2014 को प्रान्तीय शीत सम्मेलन सम्पन्न हुआ। समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता मणिपुर के महाराजा श्री लैसेंबा सनाचौबा ने की। सम्मेलन में 400 स्थानों से 7,000 नागरिक उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय परिदृश्य
गत दिनों विविध मंचों, संस्थाओं द्वारा सम्पन्न हुए कार्यक्रमों में हिन्दू समाज का सहयोग एवं सहभागिता बहुत प्रेरक रही है। चेन्नई में सम्पन्न 'हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला' में सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की सहभागिता उल्लेखनीय रही। लगभग सप्ताह भर चले इस आयोजन में करीब 8 लाख लोग आए।
मां नर्मदा हिन्दू संगम
मालवा प्रांत के महेश्वर में नर्मदा तट पर सरसंघचालक जी की उपस्थिति में सम्पन्न 'मां नर्मदा हिन्दू संगम' अपने आप में एक सफल आयोजन सिद्ध हुआ। वैसे ही मध्य प्रदेश में नर्मदा तट पर सम्पन्न नदी उत्सव, उत्तराखंड का थारू वनवासी सम्मेलन आदि से भी जनजागरूकता बढ़ी।
राजनीतिक क्षेत्र में राष्ट्रीय विचारों का प्रभाव
मई, 2014 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में भारत की जनता ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया और देश में स्थिर एवं सुव्यवस्थित सरकार बनाने के पक्ष में मतदान किया। यह पहला अवसर है कि भारतीय चिंतन में प्रतिबद्धता रखकर चलने वाले राजनीतिक दल को बहुमत से विजयी बनाकर समाज ने उस पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। कई वषार्ें के बाद इस विचार से प्रेरित समूह आज 'निर्णय-केन्द्र' में स्थापित हुआ है। नीति निर्धारक, चिन्तक एवं विशेषज्ञों के सहयोग से सन्तुलित चिंतन करते हुए कालसुसंगत योजनाएं बनें एवं क्रियान्वित हों, यह स्वाभाविक अपेक्षा है। ग्रामीण जनजीवन, संस्कृति, अनुसूचित जाति-जनजाति की आवश्यकताओं एवं भावनाओं को सवार्ेपरि रखा जाए। वर्तमान सरकार भारत की अपनी विशेषताओं का विश्व-मंच पर प्रतिनिधित्व करे, यही देशवासियों की अपेक्षा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद द्वारा आतंकवादियों, हुर्रियत कान्फ्रेंस तथा पाकिस्तान को शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय देने वाला वक्तव्य सभी दृष्टि से अवांछनीय ही कहा जाएगा। जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण ढंग से
सम्पन्न हुए चुनावों का श्रेय राज्य की शान्तिप्रिय जनता, राजनीतिक दल, सेना व सुरक्षाबलों, वहां के प्रशासनिक अधिकारियों तथा चुनाव आयोग को ही दिया जाना चाहिए। पड़ोसी देशों से भारत की मित्रता बढ़े, यह क्षेत्र की सुख, शान्ति के लिए अनिवार्य है। पड़ोसी देशों से भी हम इसी प्रकार के सकारात्मक सहयोग-संवाद की अपेक्षा रखते हैं। स्वच्छता अभियान, गंगा सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार द्वारा हो रहे प्रयास निश्चित ही अभिनंदनीय हैं।
आज देशभर में हम अनुकूलता का अनुभव कर रहे हैं। संघ कार्य की स्वीकार्यता और हिन्दुत्व के चिन्तन के प्रति विश्वास बढ़ा है। स्वाभाविक है कि यह अपने कार्य की वृद्धि के लिए भी सुसमय है। यदि हम सुनियोजित ढंग से और परिश्रमपूर्वक योजना बनाते हैं तो आने वाले निकट भविष्य में अपने कार्य के सुपरिणाम हम निश्चय ही अनुभव करेंगे। संकल्प करें, दृढ़तापूर्वक सब मिलकर आगे बढ़ें, जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने विचारों का प्रभाव स्थापित करते हुए समाज की सृजनात्मक शक्ति को विश्व के सम्मुख प्रस्तुत करें।
अन्य संगठनों का प्रतिवेदन
प्रतिनिधि सभा में संघ के आनुषांगिक संगठनों ने भी अपनी गतिविधियों की जानकारी दी। विविध क्षेत्रों के संगठनों का कार्य क्षेत्रानुसार बताया गया। जैसे, शिक्षा समूह। इस गट में विद्या भारती, भारतीय शिक्षण मंडल, अ़खिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, शैक्षिक महासंघ, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास जैसे संगठनों की गतिविधियों के बारे में बताया गया। इसी में विद्या भारती के 'ई-लर्निंग' प्रकल्प के लिए हरिद्वार स्थित स्टूडियो की जानकारी मिली। भारतीय पद्धति से शिक्षाक्रम की रूपरेखा को परिपूर्ण बनाने के लिए भारतीय शिक्षण मंडल के प्रयास बताए गए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के अंतरराज्य छात्र अनुभव तथा उपलब्धि की जानकारी दी गई। दिल्ली और छत्तीसगढ़ में विश्वविद्यालयों के चुनाव में प्राप्त विजय तथा बंगाल में कार्यवृद्धि के प्रेरक अनुभव बताए गए। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा किए गए पाठ्यक्रम सुधार के प्रयास, केन्द्रीय स्पर्धा परीक्षा में उत्तर लिखने के लिए किया प्रयास और प्राप्त यश तथा वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में समाविष्ट करने हेतु तीन विश्वविद्यालयों से प्राप्त स्वीकृति, ये उल्लेखनीय बातें थीं। संस्कृत भारती ने पत्राचार के द्वारा संस्कृत सिखाने के अभियान को मिल रही जन मान्यता और 142 स्थानों पर हुए संस्कृत सम्मेलनों की जानकारी दी। इसी प्रकार से 'आर्थिक समूह' के अन्तर्गत भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच, सहकार भारती, ग्राहक पंचायत तथा लघु उद्योग भारती के प्रतिवेदन प्रस्तुत हुए।
सामाजिक समूह के अन्तर्गत वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा थारू जनजाति के राणा प्रताप कालीन शिव मंदिर की पुनस्स्थापना तथा सितारगंज ग्राम में प्रेरणा की चिरस्मृति के लिए महाराणा प्रताप की मूर्ति की सरसंघचालक द्वारा स्थापना का वृत्त अभिनंदनीय रहा। विशेषकर प्रतिमा निर्माण के लिए ग्राम-ग्राम से संकलित किया गया 15 कुन्तल पीतल धातु और 28 हजार परिवारों से संकलित 40 लाख की निधि से प्रतीत हुआ कि अपने कार्य को कितना जन समर्थन मिल रहा है। रानी मां गाइदिन्ल्यू की जन्मशती पर वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा किए गए कायार्ें की भी जानकारी दी गई। विश्व हिन्दू परिषद् की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर हुए हिन्दू सम्मेलनों और अन्य कायार्ें की भी जानकारी दी गई। राष्ट्रीय सिख संगत और राष्ट्र सेविका समिति की गतिविधियों के बारे में भी बताया गया। विश्व विभाग ने विदेशों में कार्यरत हिन्दू स्वयंसेवक संघ के बारे में बताया और कहा कि आज विश्व के 39 देशों में 712 शाखाएं लगती हैं।
वैचारिक-बौद्धिक जगत में भी संघ विचारों से प्रेरित कार्य चल रहा है। प्रज्ञा प्रवाह, साहित्य परिषद्, संस्कार भारती, विज्ञान भारती, इतिहास संकलन योजना, अधिवक्ता परिषद् जैसे संगठनों के प्रतिवेदनों में नए अनुभवों और जानकारी का समावेश रहा। प्रतिनिधि सभा में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा संगठन मंत्री उपस्थित रहे। उन्होंने भाजपा के सदस्यता अभियान की जानकारी दी।
तेजी से बढ़ रही है शाखाओं की संख्या
2012 की तुलना में वर्तमान में 5,161 स्थान और 10,413 शाखाओं की वृद्धि हुई है। वैसे ही साप्ताहिक मिलन और संघ मंडली की संख्या में भी वृद्धि हुई है। संकलित रपट के अनुसार इस समय 33, 222 स्थानों पर 51,330 शाखाएं, 12,847 साप्ताहिक मिलन और 9008 मंडलियां हैं। इनमें तरुण विद्यार्थियों की 6,077 शाखाएं हैं। कुल मिलाकर 55,010 स्थानों तक हम पहुंच गए हैं। गत मार्च के पश्चात् संपन्न संघ शिक्षा वगार्ें में प्रथम वर्ष सामान्य एवं विशेष के 59 वगार्ें में 9,609 स्थानों से 15,332 शिक्षार्थी, द्वितीय वर्ष सामान्य एवं विशेष के 16 वगार्ें में 2,902 स्थानों से 3,531 शिक्षार्थी सहभागी हुए। तृतीय वर्ष के वर्ग में 657 स्थानों से 709 संख्या रही। इसी कालखंड में विभिन्न प्रान्तों में संपन्न प्राथमिक वगार्ें में भी ग्रामों का प्रतिनिधित्व एवं शिक्षार्थियों की संख्या भी अच्छी रही। कुल मिलाकर 23,812 शाखाओं में 80,409 संख्या रही।
प्रतिनिधि सभा ने दी दिवंगत महानुभावों को श्रद्धांजलि
सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने प्रतिवेदन के आरम्भ में देश के गत वर्ष दिवंगत हुए विशिष्टजन को भावभीनी श्रद्धाञ्जलि अर्पित की। जिन दिवंगत महानुभावों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए गए उनके नाम इस प्रकार हैं-
दक्षिण मध्य क्षेत्र के संघचालक श्री टी़ वी़ देशमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्री जीतूभाई संघवी, वनवासी कल्याण आश्रम के डॉ़ रामगोपाल, पूर्व सैनिक सेवा परिषद् के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री रहे श्री नरेन्द्र सिंह, प्रचारक श्री तरुण कुमार, वरिष्ठ प्रचारक श्री श्रीधर आचार्य, कोलकाता के संघचालक श्री विश्वनाथ मुखर्जी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष श्री यतीन्द्र तिवारी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पूर्व महामंत्री श्री पी़ व्यंकटेश्वरलु, 'इसरो' के पूर्व अध्यक्ष श्री वसंतराव गोवादिकर, वडोदरा राजपरिवार की श्रीमती मृणालिनी देवी, जाने-माने फिल्म कलाकार श्री सदाशिव अमरापुरकर, महाभारत धारावाहिक के दिग्दर्शक श्री रवि चोपड़ा, हास्य अभिनेता श्री देवेन वर्मा, सिने जगत के ही श्री उपेन्द्र त्रिवेदी, भाग्यनगर के 'चक्री' उपनाम से प्रख्यात श्री जी़ चक्रधर, प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री आर. के़ लक्ष्मण, न्यायमूर्ति वी़ आऱ कृष्ण अय्यर, प्रख्यात स्तंभ लेखक श्री राजिन्दर पुरी, जाने-माने पत्रकार श्री विनोद मेहता, योजना आयोग के सदस्य रहे श्री रजनी कोठारी, मेघालय के एम़् एफब्लो, मेघालय के ही श्री के़ सी़ रिम्बाय, बंगलादेश के पू़ महामण्डलेश्वर स्वामी प्रियव्रत ब्रह्मचारी जी तथा पूज्य मठाधिपति शंकरानंद ब्रह्मानंदभूति मूप्पिल स्वामीयार जी, गोरखा आंदोलन के श्री सुभाष घीसिंग, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री मुरली देवड़ा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे श्री अब्दुल रहमान अंतुले, महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री श्री आऱ आऱ पाटिल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री मास्टर हुकुम सिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के श्री एम़ पी़ राघवन और विचारक श्री गोविन्द पानसरे। इसके अलावा विभिन्न प्राकृतिक और आतंकवादी घटनाओं में जान देने वाले लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई।
देशभर में 1,52,388 सेवा कार्य
आज देशभर में 1,52,388 सेवा कार्य चलते हैं। इनमें शिक्षा के 81,278, स्वास्थ्य के 22,741, सामाजिक समरसता के 26,388 तथा स्वावलंबन के 21,981 प्रकल्प हैं। गत एक वर्ष में 13,721 सेवा कार्य बढ़े हैं। इसमें राष्ट्रीय सेवा भारती, नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन, आरोग्य भारती, सक्षम, दीनदयाल शोध संस्थान तथा भारत विकास परिषद् का सहयोग विशेष है। सेवा कार्यों से सेवा बस्तियों में अनेक चमत्कारी परिवर्तन हुए हैं।
प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्तावों के सम्पादित अंश
प्रस्ताव- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का स्वागत
संयुक्त राष्ट्र की 69वीं महासभा द्वारा प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा से सभी भारतीय, भारतवंशी व दुनिया के लाखों योग-प्रेमी अतीव आनंद तथा अपार गौरव का अनुभव कर रहे हैं। यह अत्यंत हर्ष की बात है कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने 27 सितम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा के अपने सम्बोधन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का जो प्रस्ताव रखा था उसे अभूतपूर्व समर्थन मिला। नेपाल ने तुरंत इसका स्वागत किया। 175 सदस्य देश इसके सह-प्रस्तावक बने तथा तीन महीने से कम समय में 11 दिसम्बर 2014 को बिना मतदान के, आम सहमति से यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया ।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती है कि योग भारतीय सभ्यता की विश्व को देन है। 'युज' धातु से बने योग शब्द का अर्थ है जोड़ना तथा समाधि। योग केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है, महर्षि पतंजलि जैसे ऋषियों के अनुसार यह शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को जोड़ने की समग्र जीवन पद्धति है। शास्त्रों में 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:', 'मन: प्रशमनोपाय: योग:' तथा 'समत्वं योग उच्यते' आदि विविध प्रकार से योग की व्याख्या की गई है, जिसे अपनाकर व्यक्ति शान्त व निरामय जीवन का अनुभव करता है। योग का अनुसरण कर संतुलित तथा प्रकृति से सुसंगत जीवन जीने का प्रयास करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, जिसमें दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों के सामान्य व्यक्ति से लेकर प्रसिद्ध व्यक्तियों, उद्यमियों तथा राजनयिकों आदि का समावेश है। विश्वभर में योग का प्रसार करने के लिए अनेक सन्तों, योगाचायोंर् तथा योग प्रशिक्षकों ने अपना योगदान दिया है। ऐसे सभी महानुभावों के प्रति प्रतिनिधि सभा कृतज्ञता व्यक्त करती है। समस्त योग-प्रेमी जनता का कर्तव्य है कि दुनिया के कोने-कोने में योग का सन्देश प्रसारित करे। अ़ भा़ प्रतिनिधि सभा भारतीय राजनयिकों, सहप्रस्तावक व प्रस्ताव के समर्थन में बोलने वाले सदस्य देशों तथा संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का अभिनन्दन करती है जिन्होंने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को स्वीकृत कराने में योगदान दिया। प्रतिनिधि सभा का यह विश्वास है कि योग दिवस मनाने व योगाधारित एकात्म जीवन शैली को स्वीकार करने से सर्वत्र वास्तविक सौहार्द तथा वैश्विक एकता का वातावरण बनेगा। अ़भा़ प्रतिनिधि सभा केन्द्र व राज्य सरकारों से अनुरोध करती है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए योग को शिक्षा के पाठ्यक्रमों में समावेश करें, योग पर अनुसन्धान की योजनाओं को प्रोत्साहित करें। प्रतिनिधि सभा स्वयंसेवकों सहित सभी देशवासियों, विश्व में भारतीय मूल के लोगों तथा सभी योग-प्रेमियों का आवाहन करती है कि योग के प्रसार के माध्यम से समूचे विश्व का जीवन आनंदमय, स्वस्थ और धारणक्षम बनाने के लिए प्रयासरत रहें।
प्रस्ताव- 2
मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा देश-विदेश की विविध भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करने की पक्षधर है, लेकिन उसका यह मानना है कि स्वाभाविक शिक्षण व सांस्कृतिक पोषण के लिए शिक्षा, विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा, मातृभाषा अथवा संविधान स्वीकृत प्रादेशिक भाषा के माध्यम से ही होनी चाहिए।
भाषा केवल संवाद की ही नहीं, अपितु संस्कृति एवं संस्कारों की भी संवाहिका है। भारत एक बहुभाषी देश है। सभी भारतीय भाषाएं समान रूप से हमारी राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक अस्मिता की अभिव्यक्ति करती हैं। यद्यपि बहुभाषी होना एक गुण है किन्तु मातृभाषा में शिक्षण वैज्ञानिक दृष्टि से व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। मातृभाषा में शिक्षित विद्यार्थी दूसरी भाषाओं को भी सहज रूप से ग्रहण कर सकता है। प्रारंभिक शिक्षण किसी विदेशी भाषा में करने पर जहां व्यक्ति अपने परिवेश, परंपरा, संस्कृति व जीवन मूल्यों से कटता है, वहीं पूर्वजों से प्राप्त होने वाले ज्ञान, शास्त्र, साहित्य आदि से अनभिज्ञ रहकर अपनी पहचान खो देता है।
महामना मदनमोहन मालवीय, महात्मा गांधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, श्री मां, डॉ़ भीमराव अम्बेडकर, डा़ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे मूर्धन्य चिन्तकों से लेकर चंद्रशेखर वेंकट रामन, प्रफुल्ल चंद्र राय, जगदीश चंद्र बसु जैसे वैज्ञानिकों, कई प्रमुख शिक्षाविदों तथा मनोवैज्ञानिकों ने मातृभाषा में शिक्षण को ही नैसर्गिक एवं वैज्ञानिक बताया है। समय-समय पर गठित शिक्षा आयोगों यथा राधाकृष्णन आयोग, कोठारी आयोग आदि ने भी मातृभाषा में ही शिक्षा देने की अनुशंसा की है। मातृभाषा के महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने भी समस्त विश्व में 21 फरवरी को मातृभाषा-दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है।
प्रतिनिधि सभा स्वयंसेवकों सहित समस्त देशवासियों का आवाहन करती है कि भारत के समुचित विकास, राष्ट्रीय एकात्मता एवं गौरव को बढ़ाने हेतु शिक्षण, दैनंदिन कार्य तथा लोक-व्यवहार में मातृभाषा को प्रतिष्ठित करने हेतु प्रभावी भूमिका निभाएं। इस विषय में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण है। अभिभावक अपने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा अपनी ही भाषा में देने के प्रति दृढ़ निश्चयी बनें।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा यह भी आवाहन करती है कि केन्द्र सरकार एवं राज्य-सरकारें अपनी वर्तमान भाषा संबंधी नीति का पुनरावलोकन कर प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा अथवा संविधान स्वीकृत प्रादेशिक भाषा में देने की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा शिक्षा के साथ-साथ प्रशासन व न्याय-निष्पादन भारतीय भाषाओं में करने की समुचित पहल करें।
फिर बने सरकार्यवाह भैयाजी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयंसेवकों के पारस्परिक स्नेेह तथा विश्वास पर चलने वाला विराट संगठन है, पर संघ के कुछ पदों पर त्रैवार्षिक चुनाव द्वारा ही कार्यकर्ता की नियुक्ति की जाती है। इस वर्ष इसी पद्धति से सरकार्यवाह का चुनाव करना था। इसलिए यह संवैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए श्री भैयाजी जोशी ने अत्यंत सहजता से अपने कार्यकाल की समाप्ति की घोषणा करते हुए श्री सुरेश सोनी को कार्यवाही का दायित्व सौंप दिया। उन्होंने उत्तर क्षेत्र के संघचालक डॉ. बजरंगलाल गुप्त को चुनाव अधिकारी के रूप में नियुक्त किया। डॉ. गुप्त ने चुनाव प्रक्रिया से सभी प्रतिनिधियों को अवगत कराते हुए नाम प्रस्तावित करने का आवाहन किया। उत्तर-पूर्व क्षेत्र संघचालक श्री सिद्धिनाथ सिंह ने भैयाजी जोशी का ही नाम नए सरकार्यवाह पद के लिए प्रस्तावित किया। किसी भी प्रस्तावित नाम को तीन मतदाताओं के अनुमोदन की आवश्यकता होती है। उत्तर पश्चिम क्षेत्र के संघचालक श्री भगवती प्रकाश, दक्षिण मध्य क्षेत्र के कार्यवाह श्री रामकृष्ण राव और पश्चिम क्षेत्र के कार्यवाह श्री सुनीलभाई मेहता ने भैयाजी के नाम का अनुमोदन किया। अन्य किसी के भी नाम का प्रस्ताव न आने के कारण श्री भैयाजी जोशी ही आगामी तीन वर्ष के लिए सरकार्यवाह निर्वाचित हुए। इसके बाद फिर से प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही शुरू हुई। इस अवसर पर सरकार्यवाह जी ने कहा कि हमने योग दिवस (21 जून) पर प्रस्ताव पारित किया है। 21 जून के पूर्व एक सप्ताह तक सभी शाखाओं में योग की चर्चा करें तथा योग सिखाएं। प्रत्येक शाखा अपने शाखा क्षेत्र में सभी परिवारों से सम्पर्क करके योग विषय की जानकारी दे। 21 जून को सार्वजनिक कार्यक्रम हों। उन्होंने यह भी कहा कि मधुमेह मुक्त भारत और सामाजिक समरसता के लिए आयोजित कार्यक्रमों में भी सहयोग करें।
इस अवसर पर सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि 10 वर्ष में कार्य की जो दिशा हमने तय की है, उसी दिशा में, न भटकते हुए श्रद्धापूर्वक चलते रहें, सफलता सुनिश्चित है। अभी अनुकूलता का काल है, तो अपनी गति बढ़नी चाहिए। इससे पूर्व दुनिया ने हमें एक घेरे में रखा, अब ये स्थितियां दूर हो गई हैं, आगे बढ़ने का पूर्ण अवसर है। हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति तथा हिन्दू समाज की सर्वांगीण उन्नति करने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि हमें दो गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता है-एक, कुटुंब प्रबोधन। संस्कारों की अभिव्यक्ति व्यक्तिगत जीवन में, पारिवारिक जीवन में तथा व्यावसायिक जीवन में दिखाई देनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने परिवार में साप्ताहिक सत्संग प्रारंभ करना चाहिए। दूसरा, सामाजिक समरसता। इस विषय पर चिंतन काफी हो चुका है, अब चिंतन की आवश्यकता नहीं है, इसे प्रत्यक्ष में उतारने की आवश्यकता है। अपने ही हिन्दू समाज के जो बंधु, किसी कारणवश पूर्व में मतान्तरित हुए हैं, उनमें से कुछ लोगों के मन में अपने मूल प्रवाह से फिर से जुड़ने की इच्छा जग रही है। ऐसे सभी बंधुओं का स्वागत करना हिन्दू समाज का कर्तव्य बनता है। इस दृष्टि से भी समाज जागरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी बातों को छोड़ना नहीं है। सत्य को कहना ही पड़ेगा। कब किस रूप में कहना, इसका विवेक रहना चाहिए। बड़बोलापन सबके लिए अनिष्टकारी है। समाज हमें कथनी और करनी से एक देखना चाहता है। हमारी कृति संघ परंपरा के अनुरूप शालीन रहे। स्वयंसेवक के स्वभाव से चलना है, हिन्दू के स्वभाव के अनुरूप चलना है। जो हमारे पास है, वह समाज को देना है। समाज की खराब बातों को नहीं, अच्छी बातों को ही लेना है।
'प्रतिमाह 3000 लोग संघ से जुड़ रहे हैं'
तीसरी बार सरकार्यवाह चुने जाने के बाद श्री भैयाजी जोशी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि आज अधिकाधिक लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ना चाहते हैं। इनमें युवकों की संख्या अधिक है। संघ भी अधिकाधिक लोगों तक पहुंचने के लिए आधुनिक तंत्र का उपयोग कर रहा है। 'ज्वाइन आरएसएस' के जरिए प्रतिमाह तीन हजार नए लोग संघ से जुड़ते हैं। उन्होंने बताया कि संघ से केवल शहरी क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी जुड़ना चाहते हैं। ग्रामीण लोगों में भी संघ के काम के प्रति उत्सुकता है। गत तीन वर्ष में संघ का काम 54,000 गांवों तक पहंुचा है। संघ समाज-जीवन से जुड़ी चुनौतियों को हल करने का प्रयास करता है। 'कन्वर्जन' पर प्रसार माध्यमों में चल रहे विवाद के संबंध में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री भैयाजी ने कहा कि इसे सरकार या अन्य किसी पर हमला मानना उचित नहीं है। संघ से संबंधित अनेक संगठनों के विचार सरकार की नीतियों से भिन्न हो सकते हैं। उन संगठनों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। विचार-विनिमय से कोई हल निकल सकता है। विवाद सुलझाने के लिए संघ सुझाव देता है, आदेश नहीं।
'हिन्दू' संबोधन से संबंधित विवाद पर संघ की भूमिका एक बार फिर से स्पष्ट करते हुए श्री भैयाजी ने कहा कि 'हिन्दू' संबोधन पूजा पद्धति से नहीं, जीवनशैली से है। अन्य जीवनशैली अपनाने से संकट निर्माण होते हैं, ऐसा हमारा अनुभव है।
केन्द्र सरकार के विवादित भूमि अधिग्रहण विधेयक से संबंधित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इस विधेयक में किए गए संशोधनों के बाद वह लोकसभा में पारित हो चुका है। ऐसा लगता है कि इस विधेयक के आपत्तिजनक मुद्दे संशोधनों से समाप्त हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं से भी और किसी भी कारण से हिन्दू निष्कासित होकर आश्रय के लिए भारत आता है, तो उसे सुरक्षा प्रदान करना यहां की सरकार का दायित्व है। हाल ही में बंगाल में एक नन पर हुए अत्याचार के संबंध में उन्होंने कहा कि कहीं भी, किसी पर भी हुए अत्याचार का निषेध ही होना चाहिए, लेकिन इस बहाने संघर्ष का वातावरण निर्माण करने के प्रयास नहीं होने चाहिए।
ईसाई मिशनरी और संघ के सेवा कायार्ें में अंतर स्पष्ट करते हुए श्री भैयाजी ने कहा कि संघ के सेवा कार्य का उद्देश्य जनजातियों की संस्कृति की रक्षा करना और उनके आर्थिक तथा सामाजिक समस्या का हल करना होता है। इस अवसर पर उनके साथ अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ़ मनमोहन वैद्य भी थे।
संघ कसंघ की नई अखिल भारतीय कार्यकारिणी
क्ऱ नाम दायित्व
1. श्री सुरेश सोनी अ. भा़ सहसरकार्यवाह
2़ श्री दत्तात्रेय होसबाले अ. भा़ सहसरकार्यवाह
3. डॉ़ कृष्णगोपाल अ. भा़ सहसरकार्यवाह
4़ श्री वी. भागय्या अ. भा़ सहसरकार्यवाह
5. श्री सुनील कुलकर्णी अ. भा़ शारीरिक प्रमुख
6 श्री जगदीश प्रसाद अ. भा़ सह शारीरिक प्रमुख
7. श्री स्वांत रंजन अ. भा़ बौद्घिक प्रमुख
8़ श्री मुकुंद अ. भा़ सह बौद्घिक प्रमुख
9. श्री सुहासराव हिरेमठ अ. भा़ सेवा प्रमुख
10. श्री अजित महापात्रा अ. भा़ सह सेवा प्रमुख
11. श्री गुणवंतसिंह कोठारी अ. भा़ सह सेवा प्रमुख
12़ श्री मंगेश भेंडे अ. भा़ व्यवस्था प्रमुख
13़ श्री अनिल ओक अ. भा़ सह व्यवस्था प्रमुख
14. डॉ़ मनमोहन वैद्य अ. भा़ प्रचार प्रमुख
15. श्री जे़ नंदकुमार अ. भा़ सह प्रचार प्रमुख
16. श्री अनिरुद्घ देशपांडे अ. भा़ संपर्क प्रमुख
17. श्री अरुण कुमार अ. भा़ सह संपर्क प्रमुख
18. श्री सुनील देशपांडे अ. भा़ सह संपर्क प्रमुख
19. श्री सुरेश चंद्र अ. भा़ प्रचारक प्रमुख
20. श्री विनोद कुमार अ. भा़ सह प्रचारक प्रमुख
21. श्री अद्वैतचरण दत्त अ. भा़ सह प्रचारक प्रमुख
22. श्री मधुभाई कुलकर्णी सदस्य
23. श्री शंकर लाल सदस्य
24. डॉ़ दिनेश सदस्य
25. श्री मुकुंदराव पणशीकर सदस्य
26. श्री इन्द्रेश कुमार सदस्य
27. श्री सुनीलपद गोस्वामी सदस्य
28. श्री अशोक बेरी सदस्य
29. श्री हस्तीमल सदस्य
30. श्री महावीर सदस्य
31. श्री सांकलचंद बगरेचा सदस्य
32. डॉ़ आर. वन्नीराजन सदस्य
33. श्री वी़ नागराज सदस्य
34. डॉ. जयंतीभाई भाडेसिया सदस्य
35. श्री अशोक सोहनी सदस्य
36. डॉ़ भगवती प्रकाश सदस्य
37. श्री बजरंगलाल गुप्त सदस्य
38. श्री दर्शनलाल अरोड़ा सदस्य
39. डॉ़ देवेन्द्रप्रताप सिंह सदस्य
40. श्री सिद्घिनाथ सिंह सदस्य
41. श्री अजय कुमार नंदी सदस्य
42. श्री असीम कुमार दत्त सदस्य
43. श्री मदनदास निमंत्रित सदस्य
44. श्री बालशरण त्रिपाठी निमंत्रित सदस्य
45. श्री सेतुमाधवन निमंत्रित सदस्य











