बर्द्धमान से बंगलादेश तक... - सियासत की बिसात पर सुरक्षा की अनदेखी
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बर्द्धमान से बंगलादेश तक… – सियासत की बिसात पर सुरक्षा की अनदेखी

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Nov 3, 2014, 12:00 am IST
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दिंनाक: 03 Nov 2014 13:06:31

पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान जिले में आतंकियों की चूक से हुए विस्फोट ने उनकी रणनीति का बेशक पर्दाफाश कर दिया है, लेकिन एनआईए की जांच में दिन-प्रतिदिन हो रहे नये खुलासों से साफ है कि पश्चिम बंगाल को बंगलादेशी घुसपैठिए अपने आतंकी कारनामों का केन्द्र बना चुके हैं। इतना ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों में बंगलादेशी आतंकी संगठनांे ने अपने पांव जमा रखे हैं। बम तैयार करते समय हुए धमाके को जांच एजेंसी एक अहम संकेत मान रही हैं जिसने पश्चिम बंगाल सरकार की निष्क्रियता के साथ-साथ आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया, वरना आतंकी न जाने कितने लोगों को मौत के घाट उतार देते। विभिन्न स्थानों पर छापेमारी के दौरान हथियार और विस्फोटक सामग्री मिलना यही बताता है कि राज्य में पिछले काफी समय से दहशत मचाने का सिलसिला शुरू हो चुका था।
जांच एजेंसियों के लिए पश्चिम बंगाल में पकड़ बना चुके आतंकियों को अपनी गिरफ्त में लेना अभी भी चुनौती बना हुआ है। पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान जिले में हुए विस्फोट के बाद जहां देश की शीर्ष जांच एजेंसियांे की नींद उड़ गई, वहीं राज्य सरकार न केवल सोती रही बल्कि जांच को भी प्रभावित कराने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। यही नहीं विस्फोट को कम क्षमता वाला और एलपीजी सिलेंडर विस्फोट बताकर भी राज्य पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की। गत 2 अक्तूबर को हुए विस्फोट के बाद राज्य पुलिस का विस्फोटक को निष्क्रिय करना और जांच में लापरवाही बरतना दर्शाता है कि राज्य सरकार की ओर से उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था और पुलिस गंभीर नहीं थी।
धमाकों के तुरंत बाद एनआईए को जांच सौंपे जाने की बात का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा विरोध करना और जांच एनआईए द्वारा शुरू करने पर इसे केन्द्र की दखल बताना साबित करता है कि मुख्यमंत्री आतंकी घटना की पीछे की असलियत को पर्दे में रखने को एक तरह से शह दे रही हैं। जांच एजेंसियों ने पाया है कि बर्द्धमान विस्फोट में न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि देश के दूसरे राज्यों से भी तार जुड़े हुए थे। आतंकी बर्द्धमान में भारी मात्रा मंे विस्फोटक तैयार कर बड़ी घटना को अंजाम देना चाहते थे। यही नहीं, राज्य सरकार की ओर से जांच में सहयोग नहीं करने पर एनआईए की मांग पर केन्द्र ने उन्हें बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) मुहैया कराई है क्योंकि केन्द्र की एजेंसी के लिए पश्चिम बंगाल में रहकर जांच करना आसान नहीं रह गया है। यह पहली बार हुआ है कि जब केन्द्र द्वारा बीएसएफ को एनआईए के कहने पर सुरक्षा में तैनात किया गया।
मदरसे और आतंकी
बर्द्धमान विस्फोट में साफ हो चुका है कि मंगलकोट थाना क्षेत्र के सिमुलिया स्थित मदरसे को आतंकियों ने अपनी शरणस्थली बनाया हुआ था। गिरफ्तार रजिया (मृतक आतंकी शकील की पत्नी) और अमीना (आतंकी अब्दुल हाकिम की पत्नी)पूछताछ में पहले ही खुलासा कर चुकी हैं कि उन्हें यहां प्रशिक्षण दिया जाता था। विस्फोट की जांच में जुटी एनआईए मुर्शिदाबाद जिले में स्थित दो अन्य मदरसों की जांच में भी जुटी हुई है, इनमें से एक मदरसा लालगोला, जबकि दूसरा बेलडांगा में है। खास बात यह है कि बर्द्धमान विस्फोट के बाद से दोनों मदरसे बंद हैं जिससे कि जांच एजेंसियों का शक मदरसों की भूमिका को लेकर और भी गहराता जा रहा है। जांच में पता लगा है कि आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन बंगलादेश (जेएमबी)की तरफ से आतंकियों को मुहैया कराने वाली रकम पहले असम में एक डॉक्टर को भेजी जाती थी। वहां यह रकम कौसर के माध्यम से मदरसे में पहंुचाई जाती थी। उस डॉक्टर की भी तलाश जारी है। मदरसे से मिली टेलीफोन डायरी से आतंकी जहीदुल का नाम भी सामने आया है। डायरी में मिले नंबरों के आधार पर दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। एनआईए को मुर्शिदाबाद के लालगोला और बेलडांगा स्थित मदरसों में छापेमारी के दौरान कुछ कागजात मिले हैं। यह भी पता लगा है कि विस्फोट में मारा गया आतंकी शकील, कौसर और कादिर के साथ यहां तीन माह तक रहा था। सिमुलिया गांव के जंगल में स्थित तामलीपुकुर में यूसुफ मदरसा बनवा रहा था, वहां से भी मोबाइल फोन की बैटरी, चार्जर, टेप रिकार्डर, डायरी वगैरह बरामद किए गए हैं। डायरी में अरबी भाषा में कुछ लेख भी मिले हैं। यहां से एक नैनो कार भी जब्त की गई, जिस पर सेना का स्टीकर लगा हुआ था और कार क ी नंबर प्लेट पर लिखा नंबर फर्जी था। जांच में पता चला है कि संबंधित नंबर मोटरसाइकिल का है। कार का इस्तेमाल आतंकी यूसुफ और उसकी पत्नी करती थी। एनआईए भारत-बंगलादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के इलाके में विशेष नजर बनाए हुए है क्योंकि फरार आतंकी इसी रास्ते बंगलादेश भागने की फिराक में हैं। जिहादी आतंकियों के यहां पर छिपे होने की संभावना है। मालदा भी जांच एजेंसियों के निशाने पर है। यूसुफ अपनी पत्नी आयशा सहित फरार है।
ममता सरकार अल्पसंख्यकों पर मेहरबान
वर्तमान में पश्चिम बंगाल में करीब 614 मदरसे एजुकेशन बोर्ड द्वारा स्वीकृत हैं। राज्य सरकार ने नदिया जिले में इस वर्ष एक अंग्रेजी माध्यम के मदरसे को भी मान्यता दी है। राज्य सरकार मदरसों के लिए 614 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पिछले कुछ समय में मंजूर कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार मदरसा खोलने के लिए भी कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन राज्य सरकार की हठधर्मिता के चलते सभी नियमों को ताक पर रखकर मदरसे खुल रहे हैं जिनका व्यक्तिगत उपयोग ज्यादा हो रहा है। यदि पश्चिम बंगाल सरकार घुसपैठियों के प्रति सहानुभूति रखने की बजाय उनके खिलाफ सख्त रवैया अपना लेती तो यह स्थिति नहीं बनी होती क्योंकि पिछले काफी समय से सुरक्षा एजेंसियां लगातार पश्चिम बंगाल सरकार को चेता रही थीं, लेकिन सरकार लापरवाह बनी रही।
आतंकियों की 'फंडिंग' का खेल
जांच एजेंसियों को पता लगा है कि जिहादियों से सहानुभूति रखने वाले एक कारोबारी के पास खाड़ी देशों से धन पहंुचता है। फिर उसी के जरिए रुपया बर्द्धमान व दूसरे ठिकानों पर पहंुचाया जा रहा है। मुस्लिम देशों के कई गैर सरकारी संगठन आतंकियों की पूरी मदद करते हैं। एनआईए ने करीब 35 बैंकों के खातों को सूचीबद्ध किया है जिनकी जानकारी बैंकों से जुटाई जा रही है। सिमुलिया के काफी लोगों के खाते भी बैंकों में हैं। फरार आतंकी यूसुफ का खाता भी बैंक में होने के संके त मिले हैं। जांच एजेंसी सोहेल महफूज की भी तलाश कर रही है, जो कि पिछल काफी समय से पश्चिम बंगाल के मदरसों में आता था। कोलकाता से करीब 15 करोड़ रुपये जुटाने में वह सफल रहा है। सोहेल काफी शातिर है।
प्रवर्तन निदेशालय भी जुटा जांच में
बर्द्धमान विस्फोट मामले में एनआईए और एनएसजी के बाद अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय)भी जांच में जुट गया है। सारदा चिट फंड घोटाले के बाद ईडी ने विस्फोट की जांच शुरू कर दी है। ईडी के जांच दल ने गत 20 अक्तूबर को खागरागढ़ स्थित विस्फोट स्थल का मुआयना किया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बैठक की गई। बर्द्धमान विस्फोट के तुरंत बाद से आतंकियों को मुस्लिम देशों द्वारा धन मुहैया कराने की बात सामने आ रही हैं, इसी नेटवर्क की छानबीन के उद्देश्य से ईडी ने विदेशी धन और हवाला कारोबारियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की है। गौरतलब है कि विस्फोट में मारे गए आतंकी शकील की पत्नी रजिया से 44 हजार रुपये बरामद किए गए थे।
मालदा से बम बरामद
मालदा के कालियाचक थाना क्षेत्र से एक खेत में छिपाकर रखे गए 200 देसी बम बरामद किए गए हैं। गत 17 अक्तूबर को सूचना मिलने पर इन्हें बरामद कर निष्क्रिय कर दिया गया। यहां गत 15 अक्तूबर को हुए धमाके में चार लोग घायल भी हुए थे, जो कि तृणमूल नेता के घर पर हुआ था। एनआईए ने रेजाउल शेख के घर से आईईडी हैंड ग्रेनेड व तीन बैग विस्फोटक जब्त कर उन्हें दामोदर नदी के किनारे नष्ट किया। -बासुदेब पाल/राहुल शर्मा

बर्द्धमान विस्फोट जैसी घटना राज्य सरकार की केवल लापरवाही नहीं, बल्कि साजिश और मिलीभगत है। सबकुछ सरकार की जानकारी में ही हुआ है। बर्द्धमान में हथियार और विस्फोटक सामग्री का जखीरा जब एनआईए को जांच में मिल गया तो राज्य पुलिस उसे क्यों नहीं ढूंढ सकी?
-राहुल सिन्हा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

राज्य सरकार विस्फोट की इतनी बड़ी घटना को नकार रही थी। पहले इसे गैस सिलेंडर का विस्फोट बताकर टाला जा रहा था। पुलिस की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना हरकतें सरकार की शह पर ही संभव हो सकीं। आज पश्चिम बंगाल बारूद के ढेर पर खड़ा है। पुलिस पूरी तरह से असफल रही है।
-अधीर रंजन चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

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