| दिंनाक: 27 Sep 2014 15:13:15 |
|
इन दिनों हांगकांग में प्रजातंत्र के लिए रैली और पदयात्राएं हो रही हैं। छात्रों के द्वारा शुरू किए गए इस आन्दोलन को हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। इससे चीन की सरकार परेशान है। बता दें कि 2017 में हांगकांग में चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों के सन्दर्भ में चीन ने कहा है कि वही लोग चुनाव लड़ सकते हैं, जिनका चयन चीन सरकार करेगी। चीन का यह फरमान हांगकांग के लोगों को बिल्कुल मंजूर नहीं है। हांगकांग के लोगों का कहना है कि वे किसी भी सूरत में अपनी आजादी नहीं खोना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि 1997 से पहले तक हांगकांग पर ब्रिटेन का राज था। इसलिए वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया से शासन चलता था। 1997 में ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को दे दिया। पिछले दिनों हांगकांग के लोगों ने चीन से मांग की थी कि उन्हें अपना नेता चुनने का अधिकार दिया जाए। लेकिन कम्युनिस्ट चीन ने इस मांग को सिरे से ही खारिज कर दिया। इसके बाद प्रजातंत्र समर्थक अनेक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों ने अपनी-अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया। इसके बावजूद चीन ने उनकी मांग नहीं मानी तो लोग सड़कों पर उतर आए। अब यह देखना है कि इस आन्दोलन के सामने चीन झुकता है या फिर इस आन्दोलन को कुचलने के लिए वह थ्येन आनमन चौक की घटना दुहराता है। उल्लेखनीय है कि 4 जून,1989 को बीजिंग के थ्येन आनमन चौक पर लोकतंत्र की मांग कर रहे लोगों पर चीनी सेना ने कहर बरपाया था। धरने पर बैठै लोगों को टैंक से कुचल दिया गया था। इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। इस घटना को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि चीन सरकार आसानी से हांगकांग के लोगों की मांग नहीं मानेगी। ल्ल