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- दक्षेस देशों से संबंध मजबूत करने के क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सबसे पहले विदेश यात्रा पर भूटान और उसके बाद नेपाल गए।
- 28 मई को नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से मिले और उन्हें स्पष्ट कर दिया कि सरकार का काम जनता की समस्या दूर करना होगा और यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब देरी की गुंजाइश नहीं है।
- 4 जून को प्रधानमंत्री ने केन्द्र सरकार के सभी मंत्रियों और सचिवों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया कि वे काम करें और प्रधानमंत्री 24 घंटे उनके साथ हैं। ऐसी बैठक आठ वर्ष बाद आयोजित की गई थी।
- भारत-भूटान ने पनबिजली के क्षेत्र में 10 हजार मेगावाट का लक्ष्य पूरा करने क ी प्रतिबद्धता जतायी।
- भारत ने दूध का पाउडर, गेंहू, खाद्य तेल, दलहन और गैर-बासमती चावल के निर्यात पर भूटान को किसी भी मात्रात्मक प्रतिबंध से मुक्त रखने के अपने निर्णय से अवगत कराया।
- भारत नेपाल को एक अरब डॉलर का ऋण प्रदान करेगा। यह वर्तमान में जारी किसी भी ऋण के अतिरिक्त होगा।
- नेपाली छात्रों की छात्रवृत्तियों को 180 से बढ़ाकर 250 किया गया।
- नेपाल ने भारत को आश्वासन दिया है कि नेपाली भूमि का किसी भी तरह से भारतीय हितों के खिलाफ उपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
- मोदी की जापान यात्रा से भारत-जापान संबंधों में आई सकारात्मक गति, अमरीका ने सराहना की।
“अपने सभी पड़ोसी देशों की सुरक्षा, स्थायित्व और संपन्नता सुनिश्चित करने के लिए भारत उन सब के साथ पूरी गर्मजोशी से संबंध आगे बढ़ाएगा। हमारी सरकार नए नजरिये और नई सोच के प्रति प्रतिबद्ध है तथा यह हमारी सभ्यता के केंद्रीय मूल्यों से निर्देशित होगी। “
– सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री, भारत











