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जनसंघ का दक्षिणांचल अधिवेशन
नेहरूजी को तार 'बांडुग में गोवा का प्रश्न रखो'
बेलगांव। अखिल भारतीय जनसंघ के प्रधान पं. प्रेमनाथजी डोगरा और जनसंघ के अन्य अखिल भारतीय नेताओं का बेलगांव की जनता ने कल 16 अप्रैल को प्रात:काल भव्य स्वागत किया। हजारों की संख्या में जनता ने जुलूस में भाग लिया और 'भारत माता की जय' डॉ मुखर्जी की जय' 'पं.डोंगरा की जय' से आकाश गुंजा दिया।… कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत प्रस्तावों में सब से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्ताव गोवा मुक्ति के सम्बन्ध में है। जनसंघ की कार्यकारिणी ने इस प्रस्ताव में जनसंघ के उन शूर सत्याग्रहियों का अभिनन्दन किया है जिन्होंने अपनी मातृ-भूमि के एक हिस्से पर छाई पुर्तगाली पराधीनता को धो डालने के लिए प्राणपण से संघर्ष किया है।… जनसंघ की कार्यकारिणी ने प्रधानमंत्री श्री नेहरू को एक तार द्वारा बांडुग सम्मेलन में गोवा के प्रश्न को उठाने के लिए भी प्रार्थना की है।…
मुखर्जी का घर बिकेगा ?
ज्ञात हुआ है कि 77,आशुतोष मुखर्जी मार्ग,कलकत्ता पर स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक स्व.श्री आशुतोष मुखर्जी का घर बिक रहा है।अभी तक उक्त घर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 84 वर्षीय मां तथा उनके दो सहोदरों(न्यायधीश श्री राम प्रसाद तथा श्री उमा प्रसाद मुखर्जी) का आधिपत्य है। यह घर श्री आशुतोष मुखर्जी एवं उनके स्वनामधन्य पुत्र डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों का भण्डार है। इस घर में अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक राजनैतिक विचार-विनिमय हुए हैं। मा. गांधी,पं. जवाहरलाल नेहरू, पं. मोतीलाल नेहरू,बै सी . आर.दास,नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे महान नेताओं ने समय-समय पर देश के सम्बन्ध में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय इसी घर में किए हैं।
श्री नेहरू का दुराग्रह अलोकतांत्रिक
संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारीजी का वक्तव्य
गो हत्या निरोध समिति के अध्यक्ष श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी ने निम्नलिखित वक्तव्य श्री नेहरूजी की आलोचना करते हुए दिया, उसका अंश।
2 अप्रैल को लोकसभा में सेठ गोविन्ददासजी के एक विधेयक पर विचार करने की बहस में हस्तक्षेप करते हुए भारत के प्रधानमंत्री ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने गो वध रोकने के सम्बन्ध में गलत कदम उठाया है। जब तक मेरा इस सरकार से कोई प्रायोजन रहेगा तब तक में इस विधेयक को स्वीकार नहीं करूंगा । एक लोकतंत्रीय सरकार के प्रधानमंत्री का बहुसंख्यक जनता की भावना के विरुद्ध ऐसा हठ अनुचित ही नहीं लोकतांत्रिक विधान के प्रतिकूल भी है। गोवध बंदी का प्रयत्न हुआ,नेहरूजी ने अपना व्यक्तिगत प्रभाव डालकर धमकी देकर अनुचित दबाव से इस प्रश्न की उपेक्षा की। इसी का यह परिणाम है कि आज स्वराज को हुए आठ वर्ष हो गये किंतु अब तक इस देश में गोवध बंद नहीं हुआ वरन् पहिले से बढ़ गया है।…











