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-आदित्य भारद्वाज –
देशभर में चुनावी संग्राम जोरों पर है। आरोपों, प्रत्यारोपों, वायदों और आश्वासन का दौर जारी है। पिछले लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सातों सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। उसके तमाम उम्मीदवार पिछले पांच वर्षों के दौरान कांग्रेस द्वारा किए गए कार्यों को जनता के हित में किए गए कार्य बताकर मतदाताओं को लुभा रहे हैं तो साथ ही प्रतिद्वंद्वियों की खामियां गिनाने, भाजपा को सांप्रदायिक दल बताने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों में 28 सीटों पर जीत हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। सभी का अपना-अपना गणित है और अपने अपने फॉर्मूले। देखना यह है किसका फॉर्मूला फिट बैठकर सवाल का समाधान करता है।
जहां तक सवाल की बात है तो वह सबका एक ही है, ह्य जीतेगा कौन ह्ण बहरहाल यदि दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों में से बात की जाए तो सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली में दो लोकसभा सीटों की है।
इनमें से एक है उत्तर पूवी-दिल्ली तो दूसरी है चांदनी चौक। दोनों ही सीटों पर दिग्गजों का एक दूसरे से मुकाबला है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में कांग्रेस से जेपी अग्रवाल, जो कुछ दिनों पहले तक दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे और इसी सीट से सांसद भी हैं, वह फिर से मैदान में उतरे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता, गायक मनोज तिवारी को मैदान में उतारा है। जबकि आम आदमी पार्टी की तरफ से प्रो. आनंद कुमार मैदान में हैं। वहीं चांदनी चौक सीट से केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल के सामने भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन मैदान में हैं और आम आदमी पार्टी के टिकट पर सेकुलर पत्रकार से नेता बने आशुतोष मैदान में हैं।
दिल्ली की इन दो सीटों पर मुकाबला बड़ा रोचक है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में लगभग 18 लाख मतदाता हैं। मुस्लिम मतदाताओं की सबसे बड़ी संख्या भी इसी सीट पर है। लगभग 21 प्रतिशत यानी करीब चार लाख मुस्लिम मतदाता इस सीट पर हैं। जेपी अग्रवाल का एक बड़ा भरोसा मुस्लिम मतदाताओं पर है। उत्तर पूर्वी दिल्ली की दस विधानसभा सीटों में से तीन आआपा और दो कांग्रेस के पास हैं। बाकी सीटों पर भाजपा ने विजय प्राप्त की थी। कांगे्रस को भी जो दो सीटें मिली थीं। वहां पर बड़ी संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है। कांग्रेस के कैडर वोट और मुस्लिम मतदाताओं के भरोसे जेपी अग्रवाल इस सीट से जीतने का दावा ठोक रहे हैं, लेकिन यदि मुसलमान मतदाताओं की बात की जाए तो उनमें काफी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिनके मत आआपा के खाते में जाने तय हैं।
आमतौर पर मुसलमानों के बड़े वर्ग को भाजपा का मतदाता नहीं माना जाता, लेकिन इस बार के चुनाव में समीकरण कुछ अलग हैं। सीलमपुर में रहने वाले हाजी असलम सिद्धिकी का मानना है कि भले ही कांग्रेस मोदी को सांप्रदायिक बताकर मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटी है, लेकिन मुसलमानों में एक वर्ग ऐसा भी है जो भाजपा को वोट करेगा,भले ही उसका प्रतिशत कम हो, मुसलमान कांग्रेस की रणनीति को भली भांति समझ चुका है, रही आआपा की बात तो दिल्ली की सत्ता से भागकर लगातार झूठ पर झूठ बोलकर आआपा अपनी छवि खुद खराब कर चुकी है। ऐसे में मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।
उत्तर पूर्वी सीट पर पूर्वांचली लोगों की बड़ी संख्या का होना भी भाजपा के पक्ष में जाता है। यदि जातिगत समीकरणों की बात करें तो इस सीट पर गुर्जर, जाट, वैश्य, ब्राह्मण, अनसूचित जाति जनजाति सभी तबके के लोग हैं, लेकिन कुल मतदाताओं में एक बड़ी संख्या पूर्वांचल और बिहार की है,जिसमें हर वर्ग के लोग हैं। इस सीट पर लगभग 40 प्रतिशत मतदाता पूर्वांचल का है। फिल्म स्टार होने के साथ अच्छे वक्ता होने के चलते मनोज तिवारी भीड़ जुटाने में भी माहिर है। देश में मोदी लहर, उनका खुद फिल्म स्टार और साथ ही पूर्वांचली होना इस सीट पर उनके दावेदारी को ज्यादा मजबूत कर रहा है।
चांदनी चौक सीट पर उत्तर पूर्वी दिल्ली से थोड़ी अलग स्थिति है। इस सीट पर करीब 14 लाख मतदाता हैं। जिनमें बड़ी संख्या वैश्य समाज की है। दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी और कृष्णा नगर क्षेत्र से विधायक डॉ. हर्षवर्धन की ईमानदार छवि बहुत हद तक भाजपा के पक्ष में है। यदि जातिगत समीकरणों की बात करें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा व्यापारी वर्ग के लोग हैं। जिनमें सबसे ज्यादा वैश्य समाज के लोग हैं। जो भाजपा का परंपरागत मतदाता माना जाता है डॉ. हर्षवर्धन को यहां काफी वोट मिलने की उम्मीद हैं। चांदनी चौक इलाके में करीब 21 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। चूंकि आशुतोष नेता बनने से पहले पत्रकार थे। इसलिए वह एक जाना- पहचाना हुआ चेहरा हैं। चांदनी चौक सीट की दस विधानसभा सीटों में से चार पर आआपा के जीते हुए विधायक हैं। जबकि दो पर कांग्रेस और तीन पर भाजपा के जीते हुए विधायक हैं। जबकि एक सीट पर जदयू के टिकट पर प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। चूंकि इस क्षेत्र की दस विधानसभा सीटों में से चार पर आआपा जीत चुकी है। इसलिए आआपा को इस सीट से काफी उम्मीदे हैं। जानकारों का मानना है कि इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों का कैडर वोट है। दिल्ली के विधानसभा चुनावों में दोनों का कैडर वोट छिटक कर आआपा के खाते में चला गया। इसलिए आआपा अस्तित्व में आई, लेकिन लोकसभा चुनावों में ऐसा होना मुमकिन नहीं है। आआपा की छवि पहले के मुकाबले खराब हुई है। उसका वोट बैंक भी छिटका है, लेकिन उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुकाबले यहां पर आआपा की स्थिति ठीक बताई जा रही है। यहां पर आआपा को मुकाबले से बाहर नहीं माना जा रहा है। उत्तरपूर्वी दिल्ली में जहां मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच है ही वहीं चांदनी चौक सीट पर तीनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है। पार्टियों के कैडर वोट की बात छोड़ दी जाए तो चुनाव प्रचार की अंतिम तारीख तक प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार और देश की राजनीति में दिन प्रतिदिन बदलते समीकरण के बाद मतदाताओं का रुझान किस तरफ जाता है वह प्रत्याशियों का भविष्य तय करेगा।











