| दिंनाक: 25 Mar 2014 16:06:35 |
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लोकसभा चुनाव सिर पर है और कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद आचार संहिता लागू होने के बावजूद असभ्य भाषा का प्रयोग करने के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं पर भी टीका-टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। यही नहीं हाल ही में कांग्रेस से नाता तोड़कर गए जगदंबिका पाल ने खुर्शीद पर विकलांगों का धन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।
गत 12 मार्च को लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जगदंबिका पाल ने कहा कि देश के पूर्व राष्ट्रपति डा. जाकिर हुसैन के नाम पर संस्था बनाकर खुर्शीद और उनकी पत्नी ने विकलांगों क ी मदद के लिए मिली धनराशि को हड़प लिया। दोनों ने सिद्धार्थनगर में 25 जनवरी, 2010 को शिविर में विकलांगों को उपकरण बांटने की बात कही, लेकिन उस दिन कोई शिविर लगाया ही नहीं गया। आरोप है कि ऐसा एक नहीं, बल्कि 22 जिलों में किया गया है। लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। जगदंबिका पाल ने कहा कि ऐसा कृत्य करने के बाद भी राहुल गांधी ने चुप्पी साधे रखी, जबकि वे भ्रष्टाचार मिटाने की दुहाइयां देते हैं।
दूसरी तरफ खुर्शीद लंदन में 12 मार्च को ही एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपनी सीमा लांघते हुए सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग पर टिप्पणी कर फंस गए। उन्होंने दागी सांसद व विधायक की सदस्यता खत्म करने और उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर कहा कि यह निर्णय एक न्यायाधीश की मनमर्जी से लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में अदालतें लोकतंत्र से जुड़े उन विषयों पर आपत्ति करने लगी हैं जिन पर केवल संसद को ही एकमात्र विशेषाधिकार प्राप्त है। खुर्शीद ने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश ही निर्णय ले लेते हैं कि उन्हें क्या होना चाहिए।चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए खुर्शीद ने कहा कि आचार संहिता ऐसी है कि आप केवल हारने के लिए पुरजोर कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयोग कहता है कि चुनाव में सड़क बनाने का वादा नहीं किया जा सकता, इसी तरह किसी को चुनावों में पानी तक नहीं पिला सकते हैं। चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि केवल तीन लोग ही तय कर सकते हैं कि चुनाव आयोग द्वारा जारी आचार संहिता के दौरान कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है। प्रतिनिधि