| दिंनाक: 14 Sep 2013 14:42:42 |
|
भारत में अनेक विभूतियों की जन्म तिथियों या पुण्य तिथियों पर उनके सम्मान में राष्ट्रीय दिवस मनाने की परिपाटी वषोंर् से रही है। लेकिन यूपीए सरकार पर चर्च के तत्व इस प्रकार हावी हैं कि वे धीरे-धीरे सरकार के जरिए राष्ट्रीय दिवसों के स्थान पर अन्तरराष्ट्रीय दिवसों को मनाने का गलत चलन चलाना चाहते हैं। गत 5 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव क्र. ए/आरईएस/67/105 पारित करके 5 सितम्बर को मदर टेरेसा की पुण्यतिथि की याद में ह्यइन्टरनेशनल डे ऑफ चेरिटीह्ण मनाने की घोषणा की। उस दिन कोलकाता में मदर टेरेसा की पुण्यतिथि के अवसर पर एकत्र हुए लोगों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस भी मनाया। विडम्बना देखिए कि भारतीय परम्परा में 5 सितम्बर का दिन अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान और भारत के राष्ट्रपति रहे डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के चलते शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। लेकिन ठीक उसी दिन को मदर टेरेसा की याद में समर्पित करवाने और भारत में उसका प्रचलन बढ़ाने की गरज से चर्च लॉबी की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। संभावना है कि विश्वप्रसिद्ध भारतीय मनीषियों की स्मृति में साल भर में आने वाले अनेक राष्ट्रीय दिवसों को भी चर्च के तत्व ह्यअन्तरराष्ट्रीय दिवसोंह्ण में परिवर्तित कराने में जुट जाएंगे। प्रतिनिधि