84 कोसी परिक्रमा : रोका था पर रुकी नहीं
| दिंनाक: 30 Aug 2013 16:08:13 |
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गत 25 अगस्त 2013 को एक विज्ञप्ति जारी करके विश्व हिन्दू परिषद ने कहा कि पूज्य सन्तों के मार्गदर्शक मण्डल द्वारा घोषित श्री अयोध्या जी की 84 कोसी धार्मिक परिक्रमा का कार्यक्रम सरकार के तमाम दमनकारी विरोध के बावजूद 25 अगस्त को आरम्भ हुआ। ठीक 10 बजे पूज्य कमल नयन दास जी महाराज, पूज्य शिया किशोरी शरण दास जी महाराज, स्वामी रामशंकर दास जी महाराज, स्वामी प्रेमशंकर दास जी महाराज के साथ विश्व हिन्दू परिषद के अन्तरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री प्रवीणभाई तोगडि़या सरयू पूजन के लिए पहुंचे। पूजन के पश्चात सभी लोग पद यात्रा हेतु सरयू पुल की ओर बढ़े। इनके साथ अन्य सन्तों के अलावा बड़ी संख्या में राम भक्तों की टोली थी। काफी प्रयत्नों के बाद स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया, जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप सरयू पूजन के पश्चात पूरे 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थानीय सन्त एवं रामभक्त पद यात्रा के लिए 30-40 के समूहों में निकल पड़े। यह क्रम पूरे दिन चलता रहा। जत्थे आते थे, पदयात्रा शुरू कर देते थे। कुछ सन्त एवं भक्तों को पद यात्रा करते समय गिरफ्तार भी किया गया। जबकि 25 अगस्त को पद यात्रा का क्रम सरयू से लेकर मखोड़ा तक था। अकेले मखौड़ा में ही यात्रा स्थल के पास 2000 से अधिक लोग उपस्थित थे जिसमें से 600 रामभक्तों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मखौड़ा में उत्तर प्रदेश सरकार के लगाये गये प्रतिबन्ध से क्षुब्ध होकर एक नौजवान ने आत्मदाह करने का भी प्रयास किया जिसे साथ में चल रहे पद यात्रियों ने किसी प्रकार से रोका। सरयू पूजन का कार्यक्रम कई स्थानों पर किया गया। ऋण विमोचन घाट पर पूज्य श्री करुणा निधानदास जी के नेतृत्व में 40 सन्तों ने पूजा की। पदयात्रा के दूसरे रात्रि पड़ाव की जगह पर 400 रामभक्त राम रेखा मन्दिर पहुंच गए। वहां भारी पुलिस बल के बीच सैकड़ों रामभक्तों ने पूजा अर्चना की।
पूज्य जगद्गुरू रामानन्दाचार्य रामभद्राचार्य महाराज एवं विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक श्री अशोक सिंहल प्रात: 9.00 बजे दिल्ली से अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। लखनऊ हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद उन्हें पुलिस ने वहीं पर रोके रखा और अयोध्या के लिए रवाना नहीं होने दिया। हवाई अड्डे के बाहर हजारों की संख्या में रामभक्त उपस्थित थे, जिन्हें पुलिस ने बल प्रयोग कर वहां से हटाने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 4 घण्टे तक अमानवीय तरीके से उन्हें रोके रखा, इसके बाद उन्हें गिरफ्तार करके गुप्त स्थान पर ले जाया गया। बाद में पता चला कि उन्हें नवाबगंज पक्षी विहार के गेस्ट हाउस में रखा गया है।
26 अगस्त को उत्तर प्रदेश सरकार इस दमनकारी नीति के विरुद्घ देशभर में जिला केन्द्रों पर धरना प्रदर्शन किया गया। यहां हम कुछ चुनिंदा स्थानों पर हुए विरोध प्रदर्शनों का ब्योरा दे रहे हैं-
नई दिल्ली
26 अगस्त को नई दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रचण्ड विरोध प्रदर्शन कर सपा प्रमुख मुलायम सिंह का पुतला फूंका गया तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री प्रकाश शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार के द्वारा संतों की धार्मिक यात्रा को बाधित कर उनको जेल भेज देने की कार्यवाही पूरी तरह से अलोकतांत्रिक व धर्म विरुद्ध है। हिन्दुओं (विशेषकर संतों व धर्म गुरुओं) की धार्मिक आजादी को छीने जाने की यह बर्बर कार्यवाही अखिलेश सरकार को भारी पड़ेगी। विहिप मार्ग दर्शक मण्डल के सदस्य पू. स्वामी राघवानन्द, महन्त सुरेन्द्र नाथ अवधूत व महन्त नवल किशोर दास जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि 85 करोड़ से ज्यादा हिन्दू आबादी वाले इस देश में भी संत समाज को अपनी धार्मिक यात्रा के लिए क्या राजनेताओं व राज्य सरकारों से अनुमति लेनी पड़ेगी?
प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- अखिलेश सरकार होश में आओ, संतों को तुम नहीं सताओ, संतों का यह घोर अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्थान, राम लला की भूमि को मुक्त कराओ- मुक्त कराओ आदि। वक्ताओं का यह भी कहना था कि जब हिन्दुओं के धार्मिक मान बिन्दुओं पर हमले या धार्मिक आजादी के हनन की बात आती है तो अधिकांश राजनीतिक दल मौन क्यों हो जाते हैं?
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने पानी की बौछारें छोड़ीं और लाठीचार्ज किया जिससे अनेक कार्यकर्ता व संत घायल हो गए।
फरीदाबाद
विश्व हिन्दू परिषद्, फरीदाबाद के नेतृत्व में अनेक सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने अजरोंदा चौक पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला फूंका। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित कार्यकर्ता जय श्री राम, भारतमाता की जय, वन्दे मातरम, खाई कसम निभायेंगे- मंदिर भव्य बनायेंगे, गिरफ्तार संत-महात्माओं को रिहा करो- रिहा करो, साधु-संतों का अपमान – नहीं सहेगा हिन्दुस्थान आदि गगन-भेदी नारे लगा रहे थे ।
इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद् के प्रांत उपाध्यक्ष तिलक राज बैंसला ने उपस्थित जन-समूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे साधु-संतों व भक्तों द्वारा तीर्थ-स्थलों की परिक्रमा आम बात है और यह हमारा मौलिक अधिकार है, परन्तु आजम खां जैसे कट्टरपंथी नेताओं के दवाब में अखिलेश यादव सरकार ने प्रस्तावित यात्रा को श्री राम मंदिर से जोड़ते हुए इस परिक्रमा पर प्रतिबन्ध लगाया है। अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण होकर रहेगा।
भाजपा जिला अध्यक्ष अजय गौड़ , संघ, विहिप, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं और भारी संख्या में शहर के गणमान्य लोगों ने प्रदर्शन में भाग लिया।
कुरुक्षेत्र
पूरे हरियाणा में उत्तर प्रदेश सरकार की हिन्दू धर्म विरोधी नीतियों के विरोध में रोष पनपा। संतों की अगुवाई में सभी 22 केंद्रों पर सनातन धर्म के अनेक संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। नारनौल में प्रयाग राज के महामंडलेश्वर विदेह शरण जी, कुरुक्षेत्र में स्वामी शाश्वतानंद जी ने प्रदर्शनों की अगुवाई की। उन्होंने राष्ट्रपति महोदय के नाम ज्ञापन सौंपा। विश्व हिन्दू परिषद के प्रदेशाध्यक्ष कांति लाल जैन ने बताया कि ज्ञापन में 84 कोसी यात्रा को निर्बाध रूप से जारी रखने की बात कही गई है। उन्होंने अखिलेश सरकार द्वारा संभावित इस्लामिक केंद्र के निर्माण को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि राम जन्म भूमि के आस-पास ही नहीं, 84 कोसी परिधि में किसी भी इस्लामिक केंद्र का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
प्रयाग
तीर्थ नगरी प्रयाग और राम की नगरी अयोध्या दूर होकर भी एक सूत्र में बंधे हैं। अयोध्या में घटने वाली हर गतिविधि की धमक प्रयाग में साफ सुनायी पड़ती है और आवश्यकता के अनुरुप क्रिया प्रतिक्रिया भी होती है। विहिप द्वारा अयोध्या में 25 अगस्त से प्रारंभ होने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के बाद पहली तीखी प्रतिक्रिया प्रयाग में आयी और फिर देखते-देखते अयोध्या के साथ साथ प्रयाग में प्रशासनिक कार्यवाहियां बढ़ गयीं।
प्रयाग आये विहिप के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल ने 22 अगस्त को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि चौरासी कोसी परिक्रमा जरूर निकलेगी। श्री सिंहल के इस बयान के बाद लखनऊ से प्रयाग तक का प्रशासन सतर्क हो गया। विहिप के साथ हिन्दू समाज के व्यापक विरोध की प्रबल संभावना का अनुमान करते हुए प्रशासन ने सबसे पहले श्री सिंहल को 3 घंटे तक नजरबंद रखा।
श्री सिंहल के प्रयाग से रवाना होने के बाद भी प्रशासन ने विहिप के बड़े पदाधिकारियों, भाजपा नेताओं के साथ ही नगर के प्रमुख संतों के आश्रमों की निगरानी शुरु कर दी। विरोध कर रहे आचार्य कुशमुनि सहित तीन लोगों को 24 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।
27 अगस्त को काशी प्रांत के संतों और कार्यकर्त्ताओं को शामिल होना था। इसकी जानकारी होते ही नगर सीमा के चारों ओर अवरोधक लगाकर जांच शुरु कर दी गयी। फैजाबाद-अयोध्या जाने वाले सड़क मार्ग पर तो गहन जांच होने लगी। सरकारी बसों, निजी वाहनों, यहां तक कि दो पहिया और पर्यटकों की गाडि़यों को रोक दिया गया।
परिक्रमा रोके जाने के विरोध में 26 अगस्त को आयोजित विरोध प्रदर्शन जुलूस ज्योतिष पीठाधीश्वर पूज्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी के आश्रम से प्रारंभ होना था, लेकिन प्रशासन ने सुबह से ही आश्रम को अपने घेरे में ले लिया। किसी भी व्यक्ति को आश्रम के अंदर या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गयी। प्रशासन प्रचार करता रहा कि पूज्य शंकराचार्य कहीं चले गये हैं। यह स्थिति शाम तक बनी रही। प्रशासन की इस अघोषित नजरबंदी से विहिप और अन्य संगठनों में व्यापक आक्रोश है।
पटना
पटना के कारगिल चौक पर विश्व हिन्दू परिषद द्वारा धरने का आयोजन किया गया। इसे संबोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद, दक्षिण बिहार प्रांत के अध्यक्ष डॉ़ एस़ एऩ आर्या ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा पर रोक हिन्दुओं के धार्मिक अधिकार को छीनने की कोशिश है। इसे कतई बर्दाशत नहीं किया जाएगा। यह संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है। हमारा संविधान हर व्यक्ति को उसकी धार्मिक परंपराओं के अनुपालन का अधिकार देता है। यह भी अधिकार देता है कि अपनी परंपराओं, समस्याओं पर अपना पक्ष विभिन्न कार्यक्रमों, आंदोलनों के माध्यम से पहुंचा सके।
सभा में विश्व हिन्दू परिषद के अलावा बजरंग दल, दुर्गावाहिनी समेत कई संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
हैदराबाद
विहिप, हैदराबाद ने स्थानीय इंदिरा पार्क में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। धरने में आए श्रद्धालुओं ने 84 कोसी परिक्रमा पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रोक लगाने को लेकर अपना तीखा आक्रोश प्रकट किया। बाद में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया। धरने को विहिप के अंतरराष्ट्रीय मंत्री श्री राघवलु तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया। दिल्ली ब्यूरो