देश कतरते चूहे दिंनाक: 01 Jun 2013 12:25:38 देश कुतरते चूहों को औकात बता दो। छल-फरेब के कागज कुतरे तो क्या है सत्त के होते फौलादी आघात बता दो। खार समंदर में घुलता है, घुल जाए जग की प्यास बुझाती है बरसात, बता दो। बहुत खा लिए चूहे, मुर्गे, बन पाखी अब न चलेगा गिद्दों का उत्पात, बता दो नीच ग्रहों की चाल नहीं होती अन्तिम संकल्पों की रेखा वाले हाथ बता दो गर शतरंजी खेल सियासत की फितरत शह पर भी होती है कोई मात, बता दो मेल-जोल का एक वर्ग है इन्सान में जोड़-तोड़ में कितनी होंगी जात, बता दो जोत दिया है हल तो बीहड़ जंगत में पौध उगी तो बदलेंगे हालात, बता दो। बिखर रहे जो लोग स्वार्थ के लालच में क्या होगा जब सारे होंगे साथ, बता दो।