प्रेस क्लब में फिर राष्ट्र का अपमानवामपंथी जीते तो मिट्टी में मिला दी देश की शानएंटोनी जी, चुप क्यों है रक्षा मंत्रालय?
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प्रेस क्लब में फिर राष्ट्र का अपमानवामपंथी जीते तो मिट्टी में मिला दी देश की शानएंटोनी जी, चुप क्यों है रक्षा मंत्रालय?

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Mar 30, 2013, 12:00 am IST
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दिंनाक: 30 Mar 2013 14:37:52

भले भारत गर्व करता हो कि उसके पास ब्रह्मोस है, जो दुश्मन के ठिकाने पर अचूक निशाना साधता है, पर सच यह भी है कि ब्रह्मोस की रक्षा खुद भारत की सरकार ही नहीं कर सकती। न मानें तो खुद जाकर देख लीजिए संसद भवन के ठीक सामने स्थित प्रेस क्लब में लगे ब्रह्मोस के प्रारूप को। 23 मार्च की शाम तक बड़ी शान से खड़ा था यह, पर अब वहां सिर्फ उसका ठूंठ बचा है, ब्रह्मोस की प्रतिकृति नदारद है। चोरी नहीं हुई, तोड़ दी गई। पहली बार नहीं, दूसरी बार। पर वाह रे पत्रकार, जो देश को जगाने का दावा करते हैं, हर खबर पर तीखी नजर रखने का दंभ भरते हैं, उन्हें अपने ही गिरेबां में झांकने का समय नहीं और राष्ट्र के अपमान की इस खबर पर उनकी नजर नहीं। तोड़े गए ब्रह्मोस के उसी आधार के पास कुछ कुर्सियां लगाकर, बीयर भरे गिलास आपस में टकराकर राष्ट्र की समस्याओं पर जुगाली करते और खुद को 'पत्रकार' समझने वाले लोग अब भी वहीं देखे जा सकते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब प्रेस क्लब का चुनाव जीतने के बाद पत्रकारों के वामपंथी धड़े ने अपनी राष्ट्रविरोधी सोच को इस प्रकार प्रकट किया हो। पिछले साल भी 15 फरवरी की रात 'नशे में धुत' खुद को पत्रकार समझने वाले कुछ तत्वों ने राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक ब्रह्मोस की प्रतिकृति को उखाड़ दिया था। तब प्रेस क्लब के पदाधिकारियों व संचालनकर्त्ताओं ने उसे कबाड़खाने में रखवाने की जुगत भिड़ाई, पर मामला बना नहीं, उछल गया। कुछ पत्रकारों ने आपत्ति दर्ज की, पाञ्चजन्य ने आक्रोश जताया। तब जाकर थाने में कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ, जबकि सब जानते थे किसने किया। उखाड़ी गईं प्रतिकृति को कुछ दिन बाद फिर से प्रेस क्लब के एक कोने में स्थापित करा दिया गया और नोटिस बोर्ड पर हिदायत चिपका दी गई कि अगली बार ऐसा कुछ हुआ तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पर दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास ही नहीं किए गए, न पुलिस ने ही कोई कार्रवाई की।

परिणाम सामने है। इस बार भारत की शान को पूरी तरह तहस-नहस किया गया, उसी संसद भवन के सामने, उसी प्रेस क्लब में, उन्हीं कुछ कथित वामपंथी पत्रकारों द्वारा। और प्रतिक्रिया भी जस की तस है। न कोई कार्रवाई, न पुलिस में रपट। इस बार कार्रवाई के नाम पर पाणिनी आनंद नामक प्रेस क्लब के एक सदस्य को जांच होने तक क्लब परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है, जिससे वह वहां सस्ते में मिलने वाली शराब से कुछ दिनों तक वंचित रह जाएगा। उल्लेखनीय है कि 23 मार्च को प्रेस क्लब आफ इंडिया की वार्षिक कार्यकारिणी के लिए मतदान हुआ था, 24 मार्च को परिणाम आना था, पर जीत सुनिश्चित जान वामपंथी खेमा वहां रात से ही 'सेलीब्रेट' कर रहा था। 24 मार्च को सहाय-आनंद का पैनल ही चुनाव जीता।

वैसे तो प्रेस क्लब का गठन इसलिए किया गया था कि वह पत्रकारों के हितों का संरक्षण कर सके, उन्हें सुविधाएं दिला सके। दिल्ली के प्रेस क्लब का महत्व इसलिए भी अधिक है कि वहां अनेक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ताएं आयोजित होती हैं। जब 2009 में भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तौर पर ब्रह्मोस का माडल तैयार किया गया, समझौता हुआ, तो उसकी प्रतिकृति के साथ इसी प्रेस क्लब में इस योजना के संयोजक ए. शिवतनु पिल्लै ने पत्रकार वार्ता की थी, इस मिसाइल की विशेषताओं के बारे में बताया था। सतह से सतह, हवा से सतह के परीक्षण के बाद अब इस मिसाइल का पानी के भीतर परीक्षण चल रहा है और यह लम्बी दूरी तक अचूक निशाना लगाने वाली सफल मिसाइल सिद्ध हुई है। इसको पाकर भारत की सेना अधिक शक्ति सम्पन्न हुई है। पत्रकार वार्ता के बाद कुछ पत्रकारों के अनुरोध पर ब्रह्मोस की इस प्रतिकृति को प्रेस क्लब के एक कोने में स्थापित करा दिया गया। इसकी स्थापना रक्षा मंत्रालय ने अपने पैसे से कराई, साथ ही साथ प्रेस क्लब को भी कुछ सजा-संवार दिया। कुल 25 लाख खर्च किए और इसका उद्घाटन भी रक्षामंत्री ए.के. एंटोनी से कराया। पर तभी से पत्रकारों के वामपंथी खेमे की आंखों की किरकिरी बना हुआ था यह माडल। हो सकता है उन्हें इसमें से राष्ट्रवाद की बू आती हो। यह भी हो सकता है कि रूस के बिखरने के बाद चीन को अपना आका समझने वाले भारतीय वामपंथियों को रूस-भारत का वह उपक्रम पसंद न आ रहा हो, जिससे उसकी ताकत बढ़े और वह चीन का मुकाबला कर सके।

सच जो भी हो, पर बड़ा सच यह है कि शाम होते ही शराब के प्यालों और सिगरेट के छल्लों के बीच राष्ट्र की राजनीति की बखिया उधेड़ने में जुटे रहने वाले प्रेस क्लब के कुछ 'पत्रकार' कहे जाने वाले सदस्य अपने बीच स्थापित राष्ट्र के सम्मान की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। हां, देश की रक्षा जरूरतों की कमी का बखान जरूर कर रहे हैं। ब्रह्मोस की प्रतिकृति  के तोड़ दिए जाने के बाद भी राष्ट्रीय मीडिया उस सोच पर चोट करने से बच रहा है, जो बार-बार देश को नीचा दिखाने की कोशिश में जुटी हुई ½èþ* ®úɹ]ÅõÒªÉ ब्यूरो

ये चीनी चश्मे वाले

–निर्निमेष

सदस्य, प्रेस क्लब आफ इंडिया

'पिछले साल उखाड़ा और इस साल तोड़ ही दिया, क्यों? जिस रक्षा मंत्रालय के रक्षा अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान ने प्रेस क्लब का सभागार 25 लाख रु. लगाकर सजाया और उसी क्रम में देश की शान का प्रतीक ब्रह्मोस लगाया, उससे इन वामपंथियों को क्या परेशानी है? वामपंथियों का तर्क है कि प्रेस क्लब में इस प्रतिकृति का मतलब यह है कि भारत युद्धोन्मादी है। इससे हमेशा युद्ध के लिए सन्नद्ध रहने का भाव पैदा होता है। इसका निशाना पाकिस्तान की ओर है। पर माओ के वंशज यह क्यों नहीं बताते कि जिस चीन के वे समर्थक हैं, दक्षिण एशियाई क्षेत्र में वही हथियारों की होड़ के लिए जिम्मेदार है। चीन तिब्बत तक चढ़ आया है, हमारे भू-भाग पर अपना हक जताता है, पाकिस्तान को भी हथियार दे रहा है। भारत के लोगों को 'नत्थी वीसा' दे रहा है, यह सब क्यों नहीं दिखता इन कम्युनिस्टों को।'

नए ब्रह्मोस लगाओ

–मनोज वर्मा

अध्यक्ष, दिल्ली जर्नलिस्ट ऐसोशिएसन

'यह पहली बार नहीं हो रहा, दूसरी बार है। क्या प्रेस क्लब में नक्सली तत्व घुस आए हैं? हम इस संबंध में शीघ्र ही गृहमंत्री को ज्ञापन देने वाले हैं। ब्रह्मोस को उसी स्थान पर फिर से पूरी प्रतिष्ठा के साथ स्थापित करना चाहिए। पिछली बार भले ब्रह्मोस का उखड़ना किसी ने न देखा हो, पर इस बार तो वहां के दो कर्मचारी गवाह हैं। फिर सिर्फ एक सदस्य का प्रवेश प्रतिबंधित क्यों? जिम्मेदार तो कई हैं, पूरा समूह है, पर वह समूह कम्युनिस्टों का है, जिनका प्रेस क्लब पर कब्जा है, इसलिए कमेटी की ओर से कार्रवाई नहीं हो सकती। सरकार को ही कुछ करना चाहिए।'

देशद्रोही कृत्य है यह

–राकेश आर्य

सदस्य, प्रेस क्लब आफ इंडिया

'जो भी हुआ, बहुत गलत हुआ। चुनाव जीतने के नशे में हुआ। जानबूझकर और षड्यंत्र रचकर ऐसा किया गया। यह एक देशद्रोही कृत्य है। जिन्होंने भी ऐसा किया है उसकी पहचान होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।'

कार्यालय सचिव ने कहा–

अब दोबारा लगना मुश्किल

प्रेस क्लब के कार्यालय सचिव जितेन्द्र सिंह का कहना है कि आन्तरिक जांच चल रही है। समिति की ओर से पुलिस में रपट दर्ज नहीं करायी जा रही है। पिछले वर्ष जो रपट दर्ज हुई थी, उसमें किसी का नाम नहीं था, और न ही कोई गवाही, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार संबंधित व्यक्ति का क्लब में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। जहां तक ब्रह्मोस के प्रारूप को दोबारा लगाने की बात है तो वह मुश्किल है, क्योंकि वह काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है।

भगत सिंह क्रांति सेना ने शिकायत दर्ज कराई

पिछली बार दबाव के बाद ब्रह्मोस के उखाड़े जाने की रपट प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने दर्ज करायी थी। पर इस बार तोड़ दी गई तो क्लब के अधिकारियों ने रपट दर्ज कराने की खानापूर्ति तक नहीं की। इसलिए भगतसिंह क्रांति सेना ने पहल की। उसकी ओर से अध्यक्ष तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में 25 मार्च को लिखित तहरीर दी गई है। बग्गा का तर्क है कि भले वह अपराध स्थल हमारे अधिकार क्षेत्र में न आता हो, पर चूंकि ब्रह्मोस पर भारत का तिरंगा भी लगा था, इसलिए उसके कहीं भी अपमान पर हम शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो हम न्यायालय की शरण लेंगे।

यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश को स्वतंत्र कराने के लिए क्रांति के अग्रदूत भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने जिस दिन बलिदान दिया, उसी दिन उन्हें अपना आदर्श बताने का ढोंग रचने वाले वामपंथियों ने शक्ति के प्रतीक को तोड़ा।

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