चिट्ठी मनोभावों की संवाहिका
September 1, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

चिट्ठी मनोभावों की संवाहिका

Written byArchiveArchive
Feb 16, 2013, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 16 Feb 2013 11:59:15

मृदुला सिन्हा

 

वह चिट्ठी थी मेरी बुआ की। मेरी दादी को मालूम था कि उनके द्वारा बेटी के यहां भेजे गए पकवान, चूड़ा, दही और साड़ी-चूड़ी-सिन्दूर को पहुंचाकर लगन महतो बेटी की चिट्ठी लेकर आएगा। घर में मेरे पिताजी, भैया, भाभी और मैं भी तो पढ़ी-लिखी थी। पर दादी बार-बार भाभी को अपने पास बुलातीं। कहतीं-'देख! जब रामलगन वापस आ जाए तो तुम मुझे सुशीला की चिट्ठी पढ़कर सुनाना। किसी काम का बहाना मत करना।'

भाभी हंसतीं और कहतीं-'हां-हां, मैं सब काम छोड़कर पहले बुआ जी की चिट्ठी पढूंगी। पहले रामलगन को लौटने तो दीजिए।'

दादी द्वारा इंतजार करवाकर ही लगन लौटा था। दरवाजे स्थित कुएं पर बैठी दादी दातून कर रही थीं। नजर सड़क पर ही थी। रामलगन को आते देख वे दातून फेंककर रामलगन के साथ आंगन में आ गईं। भाभी को पुकारा। वे नाश्ता कर रही थीं। नाश्ता छोड़कर ही आ गईं। भला बेटी की चिट्ठी जो आई थी।

उन्हें चिट्ठी थमा कर बोलीं-'चलो! मेरी खटिया पर बैठो। मुझे चिट्ठी सुनाओ। जल्दबाजी मत करना।'

भाभी ने चिट्ठी खोली। उस पर पानी के दो चार बूंदों के दाग थे। दादी ने देखा। बोलीं-'देख! चिट्ठी लिखते समय सुशीला जरूर रोई होगी। उसके आंसू की ही बूंदें हैं।' और इतना कहकर दादी स्वयं आंचल से अपनी आंखें पोंछने लगीं। भाभी ने चिट्ठी पढ़नी प्रारंभ की। प्रारंभ में घर का कुशलक्षेम था। उसके बाद घर के सभी बड़े सदस्यों का नाम (रिश्ता) लेकर प्रणाम और एक-एक बच्चे को नाम से आशीष! एक बड़ी दादी और सबसे छोटे ननका का नाम छूट गया था। दादी बोल पड़ीं-'जल्दबाजी में होगी न। खाना बनाना, परोसना, खेतीबाड़ी का काम देखना, उस पर गोद का बच्चा।'

भाभी ने पूछा-'अब मैं आगे पढूं?'

'हां, हां पढ़ो दुलहिनिया। जुग-जुग जिओ। तुम्हारा सुहाग बना रहे।'

भाभी आशीर्वाद ग्रहण कर पढ़ना प्रारंभ करतीं। गाय, बैल, बगीचे के साथ पड़ोस की घटनाओं की भी चर्चा थी। सुशीला बुआ ने अपने पति की भी शिकायत लिखी थी। उन्होंने गांजा पीना शुरू कर दिया था। फिर क्या था। दादी का रोनाधोना प्रारंभ। एक घंटे में अनेक रुकावटों और दादी की समीक्षा के बाद चिट्ठी का वाचन समाप्त होता। दादी, उस कागज के पन्ने को ऐसे सहेजतीं-संभालतीं मानो अपनी नन्हीं बिटिया की तेल मालिश करके सुला रही हों। उस पन्ने को उलटतीं, पुलटतीं, सहलातीं, मोड़तीं, खोलतीं अपने बेटी के जन्म से लेकर विवाह तक के प्रसंगों के पन्ने पलट लेतीं।

भाभी को मालूम रहता कि उन्हें और कई बार चिट्ठी पढ़नी पड़ेगी। पढ़ने भर से काम नहीं चलता। भाभी को चिट्ठी लिखनी भी पड़ती। 

चिट्ठी पत्री के आगमन और प्रस्थान की प्रक्रिया स्मरण करती हूं तो उसके लिखे जाने का अनुष्ठान सामने जीवंत हो उठता है। चिट्ठी लिखने की प्रक्रिया में ही साहित्य के नौ रसों का रसास्वादन हो जाता था। चिट्ठी सबसे पहले तो मन पर लिखी जाती थी। अधिकतर लोग निरक्षर होते थे। घर या मुहल्ले में एक दो व्यक्ति ही पढ़े-लिखे। उन पर ही चिट्ठी लिखने और पढ़ने की जिम्मेदारी होती थी। एक बार कह देने पर कोई चिट्ठी लिखने नहीं बैठ जाता था। चिट्ठी लिखना प्रारंभ करने से पूर्व लिखने वाला जितना साधक की मन:स्थिति में आता था उतना ही लिखवाने वाला या वालियां भी।

दोनों आमने-सामने बैठ जाते। लिखवाने वाला कहता था-'सबसे पहले लिखने वाली बात सब लिख जाओ।' फिर घर से लेकर गांव के सभी लोगों का नाम ले-लेकर आशीष या प्रणाम लिखवाया जाता था। घर के समाचारों में भैंस, गाय के बच्चे देने और उनमें से किसी किसी के मरने से लेकर खेतों की फसलों और बाढ़-सुखाड़ का भी वर्णन। फिर अपने मन का वर्णन। लिखने वाला उन समाचारों और भावों के संक्षेपण में सिद्धस्थ होता था। समाचार के रस के अनुसार लिखवाने वाले भी उन्हीं रसों में डूबे रहते थे। बिलख-बिलख कर रोते हुए लोगों के लम्बे प्रसंगों में से छोटा समाचार छांटना भी सहज काम नहीं होता था। चिट्ठी तैयार करके लिखवाने वाले को सुनाना भी। घंटों की मेहनत से चिट्ठी तैयार होती थी। रसों से लबालब भरी हुई। उसको ले जाने वाला कोई साधारण व्यक्ति तो होगा नहीं। वह असाधारण व्यक्ति होता था डाकिया। उन सभी लोगों की प्रतीक्षा का पात्र, जिनके आत्मीय बाहर रहते थे। अधिकांश वैसे लोगों में चिट्ठियों का आदान-प्रदान होता था जो स्वयं पढ़े-लिखे नहीं होते थे। डाकिए को कहीं-कहीं चिट्ठियां लिखनी भी पड़ती थीं और बांचनी भी। कभी-कभी तो एक बार चिट्ठी सुनाकर डाकिए नहीं जा सकता था। एक ही पत्र को दो तीन बार सुनाना पड़ता था।

डाकिया। वह डाकतार विभाग का सबसे निचले तबके का कर्मचारी नहीं, वह तो घर-घर की समस्याओं से परिचित समाज मन की गहरी समझ रखने वाला पुरुष होता था।

लोग उसके झोले से अपनी चिट्ठी निकलवाने के लिए उसे बाध्य करते थे। उनकी चिट्ठी हो तो डाकिया निकाले। डाकिया गांव का बहुत ही महत्त्वपूर्ण सदस्य होता था और डाक व्यवस्था की पूछिए मत। चिट्ठियों में भरे भावों और समाचारों के वजन का आकलन ही नहीं किया जा सकता।

चिट्ठियों के भी कई प्रकार होते हैं। चिट्ठियां समाचारवाहिका तो होती ही हैं, वे प्रेम की संवाहिका भी होती हैं, जिसे पाते ही हमारी पांचों ज्ञानेन्द्रियां सक्रिय हो जाती हैं। आंखें देखकर तृप्त होती हैं। कान सुनकर। त्वचा स्पर्श कर रोमांचित होती है, वहीं जिह्वा पर भी खट्टा-मीठा स्वाद तिर आता है। चिट्ठियों की सुगंध भी होती है। पांचों ज्ञानेन्द्रियों को सक्रिय करती चिट्ठियां लम्बे समय का संदेश दे जाती हैं।

हमारे लोकगीतों में चिट्ठियों का बड़ा ही सटीक और मार्मिक वर्णन मिलता है। पुरातन साहित्यों में भी चिट्ठियों के वर्णन हैं। आज भले ही चिट्ठियां डाक व्यवस्था के माध्यम से जाती हैं। हर काल में डाक व्यवस्था तो थी, उनके रूप भिन्न थे। कहा जाता है कि रुक्मिणी द्वारा श्रीकृष्ण को लिखी गई चिट्ठी 'विश्व का पहला 'प्रेम पत्र' थी। लोक गीतों में उसका वर्णन भी है।

'अंचरा में फाड़ी रु

रुक्मिणी कगजा बनाओल

नयन काजल मसिहान

चारों कोना लिखले

रुक्मिणी छेम कुशलवा

बीचे बीचे रुक्मिणी बयान।'

और उस चिट्ठी को पढ़कर ही कृष्ण रुक्मिणी का अपहरण करते हैं। वह शिशुपाल से ब्याही जाने से बच जाती हैं। अपने यहां डाक व्यवस्था द्वारा भेजी गई चिट्ठियों को सहेज कर रखने और समय-समय पर निकालकर  पढ़ने, पढ़वाने का भी रिवाज रहा है।

डाक व्यवस्था की अहमियत तो आज भी है। कम्प्यूटरीकरण में मोबाइल और ईमेल के कारण चिट्ठी लिखने का अभ्यास छूट रहा है। अपना कोई सात समंदर पार हो या सात मील दूर, मोबाइल ही भावों का संवाहक बन गया है। पर चिट्ठियों के माध्यम से तो भाव भी अक्षर (जिसका क्षय नहीं होता) हो जाते हैं। उन अक्षरों को पढ़कर चिट्ठी पाने वाला लिखने वाले की मन:स्थिति का भी पता लगा लेता था। आज डाक व्यवस्था लचर हो गई है। डाकिए भी आत्मीय नहीं रहे। पत्र-पत्रिकाएं भी कुरियर से भेजी जाती हैं।

ससुराल भेजने के पूर्व बेटियों को कम से कम चिट्ठी लिखना-पढ़ना सिखा दिया जाता था, ताकि वह ससुराल में मिल रहे सुख-दु:ख के भाव चिट्ठियों द्वारा भेज सके। अब तो वे कम्प्यूटर इंजीनियर हो रही हैं। अंतरिक्ष में गईं बेटियों को डाक व्यवस्था से क्या लेना देना। बावजूद इसके उन बेटे और बेटियों की संख्या आज भी कम नहीं जो चिट्ठियां लिखवातीं या लिखती हैं। उन्हें अपनों की चिट्ठियों का इंतजार रहता है। डाक व्यवस्था तो चाहिए ही। संवेदनशील डाकिए भी।

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

राजा वडिंग ने सरदार बूटा सिंह का किया अपमान

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने दलित नेता व पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह का किया अपमान, 5 दिन में गिरफ्तारी का आदेश

मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ

माफिया के लिए आंसू बहाती है समाजवादी पार्टी  : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

बहन को पीठ पर उठाए माता-पिता को खोज रहा बच्चा और मलबे से जिंदा निकली बच्ची।

60 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकली 6 साल की बच्ची, बहन को पीठ पर उठाए घायल बच्चे का भी वीडियो आया सामने

हिमालय पर मंडराता जल प्रलय का खतरा

नेपाल बाढ़ त्रासदी और हिमालय पर मंडराता जल-प्रलय का खतरा : प्रकृति पर विजय नहीं, सह-अस्तित्व है जरूरी

BJP नेता स्मृति ईरानी बोलीं-PM मोदी के सेवा समर्पण संदेश को हर घर तक पहुंचाएं कार्यकर्ता-पदाधिकारी, 17 सितंबर से शुरुआत

कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट

कौशांबी : अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 11 की मौत, फैक्ट्री संचालक आदिल समेत 6 के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Load More

ताज़ा समाचार

राजा वडिंग ने सरदार बूटा सिंह का किया अपमान

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने दलित नेता व पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह का किया अपमान, 5 दिन में गिरफ्तारी का आदेश

मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ

माफिया के लिए आंसू बहाती है समाजवादी पार्टी  : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

बहन को पीठ पर उठाए माता-पिता को खोज रहा बच्चा और मलबे से जिंदा निकली बच्ची।

60 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकली 6 साल की बच्ची, बहन को पीठ पर उठाए घायल बच्चे का भी वीडियो आया सामने

हिमालय पर मंडराता जल प्रलय का खतरा

नेपाल बाढ़ त्रासदी और हिमालय पर मंडराता जल-प्रलय का खतरा : प्रकृति पर विजय नहीं, सह-अस्तित्व है जरूरी

BJP नेता स्मृति ईरानी बोलीं-PM मोदी के सेवा समर्पण संदेश को हर घर तक पहुंचाएं कार्यकर्ता-पदाधिकारी, 17 सितंबर से शुरुआत

कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट

कौशांबी : अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 11 की मौत, फैक्ट्री संचालक आदिल समेत 6 के खिलाफ एफआईआर दर्ज

रुद्रपुर: मौलाना मुफ्ती मुजीब के मदरसे पर धामी सरकार ने डाला ताला, जानिये क्या है पूरा मामला?

पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की शानदार जीत हुई है।

PU में एबीवीपी की बड़ी जीत : विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए अच्छी खबर, कांग्रेस और AAP को युवाओं ने नकारा

केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम, यूपी

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- बूथ स्तर पर पूरी ताकत से जुट जाएं कार्यकर्ता, विपक्ष के मंसूबों को न होने दें कामयाब

पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने लहराया परचम। अंकित बिधान ने जीता अध्यक्ष पद।

पंजाब विश्वविद्यालय में ABVP की लगातार दूसरी बार ऐतिहासिक जीत, जेन-जी ने जताया राष्ट्रवाद पर भरोसा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies