'ईमानदार' प्रधानमंत्री की बेचैनी
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जिन मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्वकाल में भ्रष्टाचार के तमाम कीर्तिमान टूट गये, उन्हें अब भी कुछ लोग ईमानदार बताते नहीं थकते। हालांकि खुद प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार से ज्यादा उसके खुलासे से बेचैन नजर आते हैं। पिछले दिनों एक नहीं, बल्कि दो बार उनकी यह बेचैनी मुखर हुई। पहला मौका था सीबीआई तथा राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का वार्षिक सम्मेलन। 'ईमानदार' प्रधानमंत्री बोले-'भ्रष्टाचार को ले कर मचाये जा रहे शोर से बन रहा निराशा का माहौल खतरनाक है, इससे देश की छवि खराब हो रही है। सरकारी अधिकारियों का मनोबल बनाये रखने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन पर विचार किया जा रहा है।' दूसरा मौका भी ठीक अगले ही दिन मिला सूचना आयुक्तों के सम्मेलन में। 'ईमानदार' प्रधानमंत्री बोले – 'सूचना के अधिकार का अनुचित इस्तेमाल न सिर्फ सरकारी कामकाज में बाधाएं डाल रहा है, बल्कि लोगों के निजता के अधिकार का भी उल्लंघन कर रहा है।' अपनी बेचैनी के कारणों का खुलासा तो, जाहिर है, 'ईमानदार' प्रधानमंत्री ने नहीं किया, पर समझने वाले समझ ही गये कि सरकार के घोटालों के पर्दाफाश के बाद अब 'दामाद' के घोटाले के पर्दाफाश तथा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की विदेशों यात्राओं पर हुए व्यय को ले कर सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
पर उपदेश….
जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार सरकारी अधिकारियों के मनोबल की चिंता करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन की जरूरत जता रहे थे, लगभग उसी समय उन्हीं की कांग्रेस की हरियाणा सरकार एक ईमानदार आईएएस अधिकारी को सबक सिखा रही थी। अरविंद केजरीवाल के 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' ने तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाढरा के भूमि घोटालों का पर्दाफाश ही किया था, पर वाढरा के कुछ भूमि सौदों की जांच का साहस दिखाया हरियाणा काडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने। एक बहुप्रचारित 'ईमानदार' प्रधानमंत्री के राज में होना तो यह चाहिए था कि इस ईमानदार अधिकारी को शाबाशी दी जाती, लेकिन हरियाणा की भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने उन्हें रात के दस बजे स्थानांतरण का आदेश थमा दिया। खेमका ने इस उत्पीड़न के विरोध का भी साहस दिखाया और राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिख डाला। मामला खुला तो तो उस पर हंगामा होना ही था, पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मासूमियत से बोले: 'स्थानांतरण तो सरकार का विशेषाधिकार है और यह सामान्य प्रक्रिया के तहत किया गया है।' मामला कांग्रेस और सरकार के दामाद का है, इसलिए बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, सो हरियाणा सरकार ने उल्टे खेमका के विरुद्ध ही जांच का आदेश दे दिया है।
जीजा-साले की जोड़ी
बड़ी 'रियल एस्टेट' कंपनी डीएलएफ से साठगांठ कर हरियाणा की कांग्रेस सरकार द्वारा राबर्ट वाढरा को करोड़ों का फायदा पहुंचाये जाने के खेल की कुछ परतें खुलीं तो तोहमत वाढरा के सिर ही ज्यादा आयी। कांग्रेसियों ने भी दबी जुबान उनकी पृष्ठभूमि और कारोबार पर कटाक्ष करते हुए उस घड़ी को कोसना शुरू कर दिया, जब सोनिया ने अपनी बेटी प्रियंका का विवाह उनसे किया। लेकिन फिर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने खुलासा कर दिया कि वाढरा ही नहीं, राहुल गांधी ने भी राज्य में काफी जमीन खरीदी है और उसकी 'स्टांप ड्यूटी' भी कम चुकायी है। कांग्रेस के 'युवराज' ने यह कारनामा पलवल जिले के हसनपुर गांव में दिखाया। जाहिर है, वाढरा के बचाव में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली कांग्रेस 'युवराज' के बचाव में तो सिर के बल ही खड़ी हो गयी। पर यह सच तो उजागर हो गया कि जीजा-साले की जुगल जोड़ी सत्ता का फायदा उठाने में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई है।











