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बन्दर देखो बड़ा ही नटखट।
पेड़ पर चढ़ जाए झटपट।।
डाली पकड़ उल्टा लटक जाए।
करतब बहुत सारे दिखलाए।।
केले बड़े ही चाव से खाए।
झुंड के साथ रहना इसको भाए।।
मौका पाकर घर में घुस जाए।
सामान उठाकर यह ले जाए।।
आंखें चमकाए दांत दिखाए।
खौं–खौं कर हर किसी को डराए।।
सड़क के बीच में बैठ जाए।
निकल नहीं कोई वहां से पाए।।
खतरा देख ये एक हो जाएं।
आवाज लगा सबको बुलाएं।।
धर्मेन्द्र गोयल











