सपने कभी नहीं मरते दिंनाक: 06 Oct 2012 15:19:18 राकेश भ्रमर साहित्यिकी बूढ़े लोगों को क्यों नहीं आती नींद? आती है तो क्यों टूट जाती है बार-बार और भाग जाती है बहुत दूर कि पकड़ में ही नहीं आती। मनुष्य के शरीर के साथ-साथ नींद भी बुढ़ा जाती है क्या? बूढ़े लोग बेचैन रहते हैं सदा वैसे ही नींद भी आती है यदा-कदा बूढ़ा मन भागता है बार-बार पीछे की ओर, बचपन और जवानी की तरफ ढूंढता रहता है, अधूरी कामनाओं को और प्यासी लालसाओं को कि बहुत पीछे जाके अपने बचपन में ढूंढ़े अधूरी और प्यासी कामनाओं और लालसाओं को समेटकर उन्हें अपने दामन में जी सके फिर से पूरी एक जिन्दगी, इसीलिए नींद भी ढूंढ़ना चाहती है बचपन की भोली-प्यारी आंखें जिन पर बैठकर वह लोरियां सुनती हुई खो जाए सुख सपनों में पर क्या हो सकता है ये सब? नहीं... क्योंकि कामनाएं कभी पूरी नहीं होतीं और लालसाओं की प्यास कभी नहीं मरती हम बूढ़े हो जाते हैं, नींद बूढ़ी हो जाती है और जीवन समाप्त हो जाता है पर कभी नहीं मरते हैं सपने।