संयुक्त राष्ट्र में ईरान की मांग
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संयुक्त राष्ट्र में ईरान की मांग
इन दिनों संयुक्त राष्ट्र की महासभा अंतरराष्ट्रीय भू राजनीति में तमाम देशों की गुटबंदियों, आपसी तल्खियों का खुला अखाड़ा बनी हुई है।
ईरान के राष्ट्रपति अहमदेनिजाद की अमरीका के प्रति तनी भवैं चर्चा का केन्द्र बनी रहीं। अमरीकी थानेदारी और ओबामा के दरोगाई अंदाज में भाषणों पर अहमदेनिजाद तीखी टिप्पणियां करने का कोई मौका यूं भी नहीं चूकते। 26 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देने गए ईरानी राष्ट्रपति ने इस मौके पर एक साक्षात्कार में साफ कहा कि अमरीका अपनी 'थानेदारी' और 'दरोगाई' की नीति से बाज आए। अहमदेनिजाद चाहते हैं कि दुनिया में एक नया चाल-चलन सामने आए जो 'साम्राज्यों के तंत्र' का अंत करे। अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमरीका की आए दिन की बयानबाजी से आजिज ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि 'दुनियाभर में छोटी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे तक समझ चुके हैं कि अमरीका दरोगाई की नीति पर चलता है। वह पर्दे के पीछे से सूत्र संचालित करता है। वह अपनी इच्छा दूसरों पर लादने को उतावला रहता है कि फलां चीज ऐसी नहीं ऐसे करो। यह सब बन्द होना चाहिए।' ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को साफ करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान में किसी भी हमले से खुद की रक्षा करने की ताकत है। टेलीविजन चैनल सी.एन.एन. पर बोलते हुए अहमदेनिजाद ने टो टूक कहा कि हर देश को अपनी रक्षा करने का हक है और वह अपनी रक्षा जरूर करेगा।
इससे पहले 25 सितम्बर को आमसभा में भाषण देते हुए राष्ट्रपति ओबामा ने ईरान को चेताते हुए कहा था कि तेहरान को परमाणु हथियार पाने से रोकने में उनसे जो भी बन पड़ेगा, वह करेंगे।
बिल्लौर की बिलबिलाहट
'इस्लाम विरोधी फिल्मकार को मारो, 1 लाख डालर पाओ'
पाकिस्तानी हुकूमत और अवामी नेशनल पार्टी के लाख समझाने, घुड़काने के बावजूद वहां के रेलमंत्री गुलाम अहमद बिल्लौर तमतमाए घूम रहे हैं। उनको 'इस्लाम विरोधी' फिल्मकार पर इतना गुस्सा आया कि खुलेआम बोल गए- 'जो इस्लाम विरोधी फिल्म बनाने वाले को मारेगा उसे वे 1 लाख डालर देंगे।' यह इनामी रकम बिल्लौर अपने खीसे से ही देंगे। पाकिस्तान के विदेश विभाग ने उनके बयान से सरकार को अगली फुर्सत में ही दूर करते हुए तड़ से एक प्रेस वक्तव्य जारी करके कहा कि फिल्मकार के सिर पर जो इनाम-शिनाम है जी वह बिल्लौर का अपना खुद का नजरिया है जी। यह हमारी 'ऑफीशियल पॉलिसी' नहीं है। रेलमंत्री बिल्लौर वैसे तो अवामी नेशनल पार्टी के नेता हैं लेकिन इस पार्टी की जरदारी की सरकार में भागीदारी है, सो पार्टी ने उन्हें ठंड रखने की सलाह दी, पर बिल्लौर अड़े ही रहे कि इनाम तो मैं देऊंगा ही।
इनाम की खबर अमरीका को लगी तो उसकी गुर्राहट गूंजनी ही थी, सो गूंजी और ऐसी गूंजी कि पाकिस्तानी सरकार पर बिल्लौर को बयान वापस लेने को कहने का भारी दबाव पड़ गया। फिर मनाने की कोशिश हुई पर बिल्लौर ने एक कदम और आगे जाते हुए अल कायदा और तालिबान वालों से भी अपील कर डाली कि इस 'नेक काम' में हाथ बटाएं। दिलचस्प बात यह है कि खुद उनकी पार्टी के ही कई नेता आतंकवाद से लड़ाई में मारे जा चुके हैं।
अभी पिछले शुक्रवार (21 सितम्बर) को पाकिस्तान ने देशभर में सरकारी छुट्टी का ऐलान करके लोगों से 'इस्लाम-विरोधी' फिल्म के खिलाफ 'शांतिपूर्ण' ढंग से विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। वहां के सरकारी तौर पर प्रतिबंधित कई उग्रवादी गुटों की सरपरस्ती में लोग सड़कों पर तो उतरे पर 'शांतिपूर्ण' नहीं रह पाए। एक चर्च और कई सिनेमाघर जला दिए, सरकारी और निजी संपत्ति को आग लगा दी। हिंसा में 21 लोग मारे गए।
उधर ब्रिटेन के कई सांसदों ने मांग की है कि बिल्लौर को ब्रिटेन में आने से रोका जाए। वे नहीं चाहते कि जो आदमी इस तरह से हिंसा को हवा देता हो, उसे ब्रिटेन में आने दिया जाए। यहां बता दें कि बिल्लौर और उनके भाइयों की लंदन में खूब जमीन-जायदाद है और वह साल में कई मर्तबा लंदन जाकर कई-कई दिन वहां लंबी तानकर रहते हैं। इस बीच खबर है कि 'इस्लाम-विरोधी' फिल्म बनाने वाले नकोला बास्सैली को कैलिफोर्निया (अमरीका) में धर लिया गया और जेल भेज दिया गया है।
'बोको रोको' अभियान में 35 बोको ढेर
नाइजीरिया सरकार ने अपने यहां के हिंसक मजहबी जिहादी गुट 'बोको हराम' को नेस्तोनाबूद करने की ठान ली दिखती है। आए दिन की हत्याओं, उगाही, तोड़-फोड़ और अपहरणों से आजिज आई सरकार ने दमदार फैसला लेते हुए 'बोको हराम' के खिलाफ पिछले दिनों उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया में फौजी अभियान छेड़ा। घर-घर तलाशी ली गई और 'बोको' के समर्थकों, सदस्यों, हस्तकों को धर लिया गया या ढेर कर दिया गया। फौजी बयान के मुताबिक 60 धरे गए, कम से कम 35 संदिग्धों को ढेर कर दिया। 'बोको हराम' पिछले कई सालों से नाइजीरिया में जनजीवन अस्त-व्यस्त किए हुए है, वह कभी स्कूल जलाता है, कभी सरकारी दफ्तर। वह पूरे मुल्क में शरिया यानी इस्लामी कानून लागू करना चाहता है।
नाइजीरिया सरकार ने मुस्तैदी से कार्रवाई करते हुए योबे सूबे की राजधानी दामातूरू में 23-24 सितम्बर की आधी रात कर्फ्यू लगाने के बाद जिहादियों को आड़े हाथों लिया। उन्हें घर-घर ढूंढा। जिस पर जरा सा शक हुआ, धर लिया। जिसने पलट के बंदूक उठाई, उसे वहीं ढेर किया। उनके अड्डों से दर्जनों बंदूकें, विस्फोटक उपकरण, सैकड़ों चक्र गोलियां, 32 तीर और दो तलवारें जब्त की गईं। माना जाता है कि 'बोको' ने 2010 से अब तक मध्य और उत्तरी नाइजीरिया में हमलों में करीब 1400 लोगों की जान ली है।
चर्च की हनक, पुतिन की ठसक
नया कानून कसेगा पुतिन विरोधियों पर लगाम?
रूस के पुतिन समर्थक सांसद आजकल एक नया कानून बनाने की बढ़-चढ़कर पैरवी कर रहे हैं। इस कानून के तहत वे चाहते हैं कि जो भी पांथिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए उसे धर कर तीन साल तक की कैद में रखा जाए। इस अभियान को अपनी हनक बढ़ाने को उतावले आर्थोडॉक्स चर्च और राष्ट्रपति पुतिन के बीच बढ़ती गर्मजोशी को और पुख्ता करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 25 सितम्बर को संसद के निचले सदन, ड्यूमा ने एक प्रस्ताव पारित करके कहा कि पांथिक नेताओं की हत्या, चर्च संपत्ति की तोड़-फोड़ और गुण्डागर्दी की कुफराना हरकतें रूस के लिए खतरा हैं जिनका प्रतिकार करना होगा। ये सब चीजें रूस की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और नैतिक बुनियाद को हिलाने, परम्परागत मूल्यों को झुठलाने और समाज में तनाव पैदा करके देश की संप्रभुता को कमतर करने के लिए होती हैं। जल्दी ही इस प्रस्ताव को संसद के सामने रखकर पारित कराए जाने की पूरी उम्मीद है।










