'वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम' का हांगकांग में सम्मेलन, वक्ताओं ने कहा-आर्थिक शुचिता सम्पन्न नया विश्वव्यापी व्यापारिक ढांचा बने
|
'वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम' का हांगकांग में सम्मेलन, वक्ताओं ने कहा-
'वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम' के गत दिनों हांगकांग में सम्पन्न हुए पहले दो दिवसीय सम्मेलन में दुनिया से केवल लाभ कमाने की लालसा से आर्थिक संसाधनों का दोहन किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही शोषणकारी वृत्ति के बजाय आर्थिक शुचिता सम्पन्न नया विश्वव्यापी व्यापारिक ढांचा बनाए जाने पर बल दिया।
विश्वभर के जाने-माने अर्थशास्त्रियों, व्यवसायियों, उद्योगपतियों, प्रबन्ध विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों के इस अनुपम सम्मेलन ने जहां दुनिया में चारों ओर मचे आर्थिक हाहाकार पर चिन्ता व्यक्त की, वहीं व्यापार के हिन्दू मॉडल पर काम करने पर बल दिया, जिससे धरती को साधन सम्पन्न बनाने के साथ-साथ प्रत्येक मानव को स्वावलम्बी बनाया जा सके। सम्मेलन में यूरोप, अफ्रीका, एशिया व अमरीका महाद्वीप के विभिन्न देशों से आए लगभग 250 विशेषज्ञ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
'वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम' की स्थापना आर्थिक संसाधनों को बढ़ाकर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने, जाने-माने आर्थिक विशेषज्ञों के तकनीकी ज्ञान को व्यवसायियों के काम का बनाने तथा व्यापारियों, उद्योगपतियों, प्रबंध विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, बैंकरों व निवेशकों को एक मंच पर लाने के लिए की गई। इसका मुख्य उद्देश्य मानव को दयनीय स्थिति से बाहर निकालकर एक समृद्ध विश्व समाज की स्थापना करना है।
हांगकांग के गोल्डन मिले कोलून नामक स्थान पर हुए सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री श्री अनिल कुमार बचू ने दुनिया में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक विषमता तथा बढ़ते वित्तीय संकट के लिए वर्तमान व्यापारिक ढांचे को दोषी करार दिया। उन्होंने दुनिया के अर्थशास्त्रियों से अपील की कि दुनिया के लिए एक ऐसा आर्थिक ढांचा बनाया जाना चाहिए जो गरीबी, भुखमरी व बेरोजगारी का दुश्मन, किन्तु पर्यावरण व सतत् विकास का सच्चा मित्र हो।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री व भारत के पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि दुनिया को अब लालची व्यापारिक ढांचे से बाहर निकलकर एक शुचिता संपन्न व्यावसायिक मान बिन्दुओं में ढालना होगा, ताकि विश्व व्यापार को और विस्तृत और प्रभावशाली बनाया जा सके।
लंदन स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स के प्राध्यापक डा. गौतम सेन ने कहा कि दुनिया को यदि आर्थिक आत्मनिर्भर बनाकर समानता का भाव जगाना है तो हिन्दू अर्थशास्त्र को अपनाना होगा तथा पिछड़े समाज व अविकसित देशों को आगे लाने के प्रयास करने होंगे। भारतीय प्रबंध संस्थान, बेंगलूरु के प्राध्यापक डा. आर. वैद्यनाथन ने दुनिया के बढ़ते आर्थिक संकट के लिए पाश्चात्य देशों में टूटती परिवार व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस संकट से प्रेरणा लेकर अब हमें एक ऐसे आर्थिक ढांचे का विकास करना होगा जो पर्यावरण रक्षक तथा पारस्परिक संबंधों पर आधारित होते हुए समाजोन्नमुखी हो।
सम्मेलन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख डा. जी. माधवन नायर, लंदन चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री सुभाष ठाकरार, परम कम्प्यूटर के अन्वेषक तथा सेन्टर फॉर डेवलपिंग एडवांस कम्प्यूटिंग के पूर्व निदेशक डा. विजय भाटकर, जैन ईरर्ीगेशन के श्री डी.एन. कुलकर्णी सहित अनेक वक्ताओं ने सम्बोधित किया। इन्होंने तात्कालिक व दीर्घगामी आर्थिक लक्ष्य निर्धारित करने, उन्हें पूरा करने हेतु एक विश्वव्यापी समर्थ संस्थान बनाने, अन्वेषण व तकनीकी ज्ञान के विस्तार आदि अनेक विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन में भावी उद्यमियों की पहचान कर उन्हें हर प्रकार से तैयार करने, उनकी पूंजी का प्रबंध करने, प्रशिक्षण व नेटवर्क से जोड़ने तथा बाजार का अध्ययन कर उन्हें महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराने हेतु एक यंग हिन्दू बिजनेस लीडर फोरम का गठन भी किया गया, जिसकी पहली बैठक जनवरी, 2013 में मुम्बई में होगी।
'वर्ल्ड हिन्दू इकॉनोमिक फोरम' के इस पहले सम्मेलन की सफलता के बाद फोरम के सभी पदाधिकारियों ने तय किया कि फोरम का अगला सम्मेलन वर्ष 2013 में बैंकॉक में होगा।प्रतिनिधि
पंडित ओंकारनाथ ठाकुर को दी स्वरांजलि
पश्चिम बंगाल/ बासुदेब पाल
गत दिनों दिल्ली में सम्पन्न हुए एक संगीतमय कार्यक्रम में 20वीं सदी के महान गायक पंडित ओंकारनाथ ठाकुर को स्वरांजलि दी गई। कार्यक्रम का आयोजन स्वर समर्पण संस्था के तत्वावधान में हुआ। सम्पूर्ण कार्यक्रम में गायकों ने भिन्न-भिन्न प्रकार के गीतों का गायन किया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में आचार्य अभिमन्यु के बाल शिष्यों ने गायत्री मंत्र का गायन कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। इसके बाद सुश्री उमा गर्ग ने राग पूरिया धनश्री प्रस्तुत किया। पद्मश्री से सम्मानित पंडित सुरिंद्र सिंह ने राग बिहाग से उपस्थित लोगों को आनंदित कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में ग्वालियर परम्परा के प्रमुख वयोवृद्ध संगीत विद्वान श्री लक्ष्मण कृष्णराव पंडित ने रामदासी मल्हार के विस्तृत गायन व राग गौड़ मल्हार में 'सावन की ऋतु आई' से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतिनिधि
वीर सावरकर की याद में कार्यक्रम
संस्कृति दर्शन समिति के तत्वावधान में गत 4 जुलाई को दिल्ली में वीर सावरकर की काला पानी जेल यात्रा के 100 वर्ष पूर्ण होने पर 'वीर स्मृति दिवस' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बाबा सत्यनारायण मौर्य, भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश संगठन महामंत्री श्री विजय शर्मा एवं श्री अजय भाई विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में छात्र भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
बाबा सत्यनारायण मौर्य ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं अच्छा बनकर ही सावरकर को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सावरकर ऐसे एकमात्र क्रांतिकारी हुए, जिन्हें ब्रिटिश शासन ने दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने कहा कि शर्म की बात है जिन्होंने आजादी के संघर्ष में कुछ नहीं किया, वे सावरकर जैसे महान क्रांतिकारी पर उंगली उठाते हैं। बाबा मौर्य ने कहा कि सरकार भले ही क्रांतिकारियों को सम्मान न दे, पर देश के युवाओं को यह दायित्व जरूर निभाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में संस्कृति दर्शन समिति के श्री संजीव शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि
गुरु पूर्णिमा पर शांतिकुंज, हरिद्वार में कार्यक्रम
हजारों ने दी अपने गुरु को श्रद्धांजलि
गत 3 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर हरिद्वार के शांतिकुंज में कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने अपने सद्गुरु पं. श्रीराम शर्मा आचार्य को भावपूर्ण श्रद्धाञ्जलि दी।
अखिल विश्व गायत्री परिवार की संरक्षिका शैलबाला पण्ड्या ने देश-विदेश से आए हजारों गायत्री परिजनों से खचाखच भरे सभागार को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज का दिन श्रद्धा के आरोपण, ज्ञान के अनुशासन और आत्म समीक्षा का है। व्यास पूर्णिमा के नाम से प्रचलित यह पर्व गुरु की उत्कृष्टता का परिचय देता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डा. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए ही यह पर्व मनाया जाता है। विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत पर राज करने के लिए सबसे पहले यहां के महान गुरुओं को लक्ष्य बनाया। गुरु पूर्णिमा जिंदगी का शीर्षासन है। जीवन को सही राह दिखाने के लिए ही गुरु अवतरित होते हैं। उनमें शिष्यों की समस्त समस्याओं को नष्ट करने का सामर्थ्य है। इस अवसर पर करीब 1100 श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा भी ली।
कार्यक्रम में डा. प्रणव पण्ड्या द्वारा संपादित पुस्तक 'तत्सवितुर्वरेण्यं' के साथ-साथ स्वाहिली, नेपाली, पंजाबी, बंगला, तेलुगु और मराठी भाषा में अनुवादित 40 पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। इनमें ब्रेललिपि में लिखित तीन पुस्तकें भी शामिल हैं। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की वेबसाइट का भी लोकार्पण हुआ। मनोज गहतोड़ी











