मन्दिरों का धन गैर-हिन्दुओं पर खर्च करना बर्दाश्त नहीं
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नई दिल्ली में अखिल भारतीय मठ-मंदिर पदाधिकारी सम्मेलन
– दिनेश चन्द्र, संगठन महामंत्री, विहिप
मन्दिरों के हितों की रक्षा के लिए 'अखिल
भारतीय मन्दिर प्रबंधक परिषद्' का गठन
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में (बाएं से) स्वामी अनुभूतानंद जी, श्री नवीन कपूर, स्वामी राघवानन्द, श्री दिनेश चन्द्र एवं श्री चम्पत राय
श्री दिनेश चंद्र ने कहा कि यदि सरकार ने मन्दिरों पर जबरन कब्जे व उनके धन के सरकारीकरण की नीति पर पुनर्विचार नहीं किया तो हिन्दू समाज चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि पंथनिरपेक्षता के नाम पर सरकार हिन्दुओं के साथ भेदभाव कर रही है। पंथनिरपेक्षता के नाम पर केवल हिन्दू मंदिरों के अधिग्रहण के बारे में ही सोचा जाता है। मुस्लिम या ईसाई मत-पंथ के मजहबी स्थलों का अधिग्रहण करने के बारे में सरकार सोच भी नहीं सकती। इन तमाम बातों पर हम सबको विचार करने की जरूरत है। श्री दिनेश चंद्र ने कहा कि पुरातन काल से ही मन्दिर हमारी आस्था व विश्वास के साथ ही समाज रचना के प्रमुख केन्द्र रहे हैं। मन्दिरों के कुशल प्रबन्धन के द्वारा ही इनको सच्चे अर्थों में समाजोपयोगी बनाकर सामाजिक चेतना के केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। मन्दिरों ने ही समय-समय पर देश व समाज को कर्तव्य बोध कराया है।

सम्मेलन में उपस्थित (बाएं से) श्री हरशरण सिंह बल्ली, श्री ओमप्रकाश सिंहल, श्री स्वदेशपाल गुप्ता, श्री रजनीश गोयनका एवं अन्य
इस अवसर पर श्री सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा दिल्ली के अध्यक्ष स्वामी राघवानन्द ने कहा कि हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक संत, साहित्य व मन्दिर तीनों पर ही आज हर ओर से हमले हो रहे हैं। हिन्दू समाज को इन तीनों स्तंभों की रक्षा के लिए आगे आना ही होगा।
सम्मेलन के एक अन्य सत्र को संबोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद् के संरक्षक श्री अशोक सिंहल ने कहा कि मन्दिर प्रारंभ से सामाजिक सद्भाव के केन्द्र रहे हैं। किसी भी सूरत में मन्दिरों का अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। जिन मन्दिरों का अधिग्रहण हुआ है, उनकी धार्मिक एवं सामाजिक गतविधियां प्रभावित हुई हैं। श्री सिंहल ने कहा कि मन्दिर पूजा, आध्यात्मिक उत्थान और सेवा के केन्द्र के रूप में स्वायत्तशासी बनें।
सम्मेलन का समापन 6 मई को हुआ। सम्मेलन का संचालन विहिप के केन्द्रीय मठ-मन्दिर प्रमुख श्री उमा शंकर ने किया तथा देश भर से आए अनेक प्रमुख मन्दिरों के न्यासियों ने बैठक में भाग लिया। झण्डेवालां टेम्पल सोसायटी के अध्यक्ष श्री नवीन कपूर ने सभी आगन्तुकों का स्वागत कर आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन मन्दिरों को सरकारी शासन से मुक्ति दिलाने तथा उनके कुशल प्रबन्धन के द्वारा हिन्दू समाज की सेवा के विशेष केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठापित करने में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन में महामण्डलेश्वर स्वामी अनुभूतानन्द, विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री ओम प्रकाश सिंहल, महामंत्री श्री चम्पत राय, विहिप दिल्ली के अध्यक्ष श्री स्वदेशपाल गुप्ता, मठ-मन्दिर प्रमुख श्री रामपाल सिंह, झण्डेवालां टेम्पल सोसायटी के सचिव श्री अनिल गुप्ता सहित दिल्ली के अक्षरधाम व छतरपुर जैसे बड़े मन्दिरों के वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित थे। साथ ही बैठक में केरल, आन्ध्र प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश व हरियाणा सहित अनेक राज्यों के लगभग 60 मन्दिरों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिनिधि










