टखने की चोट
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डा. हर्ष वर्धन
एम.बी.बी.एस.,एम.एस. (ई.एन.टी.)
टखने की मोच व चोट की शिकायत अक्सर लोगों को होती है। यह परेशानी किसी को भी किसी भी उम्र हो सकती है। इस चोट को 'एंकल स्प्रेन', 'ट्विस्टेड एंकल, 'रोल्ड एंकल', 'एंकल इंजरी' अथवा 'एंकल लिगामेंट इंजरी' के रूप में जाना जाता है। ज्यादातर टखनों में मोच या 'फैक्चर' ही देखने में आता है। टखने के एक या अधिक अस्थि बंधों में तनाव ही मोच अथवा चोट का कारण बनाता है। टखने के अस्थि बंध 'एलास्टिक बैंड' की तरह होते हैं जो टखने की हड्डियों को ठीक स्थान पर रखते हैं और असामान्य गतिशीलता खासतौर पर पैर को ऐंठने, मुड़ने अथवा घूमने से बचाते हैं। अक्सर यह परेशानी असमतल जमीन पर चलते, दौड़ते अथवा कूदते समय ही होती है, जब टखने पर असामान्य दबाव अथवा खिंचाव पड़ता है। टखने में यह चोट दैनिक कार्य करते हुए भी लग जाती है, जैसे पैर का अचानक मुड़ जाना अथवा फिसल जाना।
मोच की स्थिति में जोड़ पर हड्डियों को आपस में जोड़ने वाले धागे या ऊतक का थोड़ा या अधिक या पूरा भाग फट जाता है या टूट जाता है और खून की नसें ऊतकों में तरल छोड़ने लगती हैं जो जोड़ों के चारों और फैल जाता है। टखनों में जो सूजन होती है, उसके लिए श्वेत रक्त कोशिकायें जिम्मेदार होती हैं। टखने में चोट की स्थिति में रक्त का प्रवाह भी बढ़ जाता है। अत: नसों द्वारा छोड़े गये तरल के कारण ही सूजन और दर्द उत्पन्न होता है। चोट के दौरान इस क्षेत्र में स्नायु इतने संवेदनशील हो जाते हैं कि टखने पर थोड़ा सा भी दबाव डालने पर असहनीय दर्द होने लगता है।
निम्नलिखित कारण टखनों में चोट के जोखिम को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं-
0 टखने के लचीलेपन का कमजोर होना।
0 टखने के कार्यशील होने से पूर्व गरम होने तथा फैलाव की स्थिति में आने की कमी।
0 जोड़ों का अपर्याप्त प्रोप्रियोसेप्शन (जोड़ों की स्थिति का नियंत्रण रखने व विभिन्न स्थिति को जानने की क्षमता)
0 असमतल जमीन पर दौड़ना।
0 एड़ी पर जूते का अपर्याप्त आलंब का होना।
0 ऊंची एड़ी के जूते, चप्पल का पहनना।
0 अस्थि बंध जो टखने की हड्डियों को जोड़ते हैं, का कमजोर होना। यह वंशानुगत या बार बार अधिक खिंचाव के कारण हो जाता है।
0 मांसपेशियों/शिराओं जो टखने की जोड़ को 'क्रास' करती हैं का कमजोर होना। खास तौर पर 'पेरोनियल' अथवा 'फिबुलर' मांसपेशी।
0 'ऑफ बैलेन्स' स्थिति में स्नायु मांसपेशियों की धीमी प्रतिक्रिया
टखनों में चोट के लक्षण
0 टखनों के हिलाने अथवा घुमाने में परेशानी होना।
0 पूरा वजन रखने पर टखने में परेशानी होना।
0 टखनों में दर्द का होना।
0 टखनों का नरम हो जाना।
0 टखनों में सूजन हो जाना।
0 टखनों के रंग में परिवर्तन तथा टखनों पर रगड़ पड़ना।
टखने में चोट अथवा मोच की गंभीरता को देखते हुए इसे निम्नलिखित भागों में विभाजित किया गया है-
0 ग्रेड 1- मोच के बाद टखनों में हल्का दर्द होता है। अस्थि बंधों में आंशिक फैलाव अथवा थोड़ा नुकसान पहुंचता है। टखने की हड्डी के चारों ओर सूजन हो सकती है। जोड़ों में अकड़न आ सकती है अथवा चलने में परेशानी हो सकती है।
0 ग्रेड 2- मोच में अस्थि बंधों को नुकसान मध्यम मात्रा में होता है। जोड़ों में आंशिक अस्थिरता हो सकती है। हल्के दर्द से तेज दर्द बढ़ सकता है तथा चलने में कठिनाई हो सकती है। टखने में सूजन और अकड़न हो सकती है।
0 ग्रेड 3-मोच में अस्थि बंध पूरी तरह टूट जाते हैं। जोड़ों में पूरी तरह अस्थिरता आ सकती है। शुरू में तेज दर्द हो सकता है तथा बाद में यह दर्द बंद भी हो सकता है। अत्यधिक सूजन हो सकती है।
निम्नलिखित सावधानियों के माध्यम से टखने की चोट के जोखिम से बचा जा सकता है-
0 जब थकें हों अथवा शरीर में दर्द हो तो व्यायाम या खेलकूद करने से परहेज करें।
0 संतुलित आहार लें ताकि मांसपेशियां मजबूत रहें।
0 नियमित व्यायाम करें।
0 वजन पर नियंत्रण रखें।
0 गिरने से बचने का प्रयास करें।
0 ऐसा जूता पहनें जो आपके पैर के लिए अनुकूल हो तथा जूते के कारण आपके दैनिक क्रियाकलाप में किसी प्रकार बाधा न उत्पन्न हो।
0 समतल जमीन पर ही दौड़ें।
0 जो भी खेल खेलते हो, खेलते समय बचाव हेतु उपयुक्त खेल उपकरण प्रयोग करें।
0 खेलने की स्थिति में उपयुक्त अवस्था को बनाये रखें।
चिकित्सक की सलाह कब लें–
सामान्यतया टखने में साधारण मोच में चिकित्सक के पास जाने की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन गंभीर परेशानी अथवा 'फ्रैक्चर' के हो जाने पर तो अविलंब चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए, इसके अतिरिक्त टखने में निम्नलिखित परेशानियों के होने पर भी चिकित्सक से परामर्श करने में लापरवाही न बरतें-
0 जब दर्द असहनीय होने लगे।
0 टखने में दर्द न होने पर भी कुछ कदम चल फिर पाने में असमर्थ हों।
0 पांच से सात दिनों में भी टखनों में कोई सुधार न हो।
इसके अतिरिक्त निम्नलिखित परेशानियां 'फ्रैक्चर' अथवा गंभीर चोट के संकेत हैं तथा ऐसे में चिकित्सक से शीघ्र परामर्श लेना चाहिए-
0 क्षतिग्रस्त टखना गतिशील न हो पाये।
0 टखने अथवा पैर की तकलीफ का बार-बार बढ़ना अथवा बार-बार उसी हिस्से में चोट लगना।
0 व्यक्ति लंगड़ा कर भी चार कदम न चल पाता हो।
0 टखने के दोनों साइड पर दबाव पड़ने पर बहुत अधिक दर्द हो रहा हो।
0 पैर अथवा पैर का अंगूठा सुन्न हो।
0 टखने के पीछे सूजन और दर्द हो अथवा अंगूठे को नीचे करने में परेशानी हो रही हो।
0 घुटने के नीचे दर्द या सूजन हो अथवा 'कॉफ' मसल में सूजन हो।
टखने में चोट लगने पर तुरन्त प्राथमिक चिकित्सा क्या करें–
0 मरीज के टखने को सामान्य स्थिति में रखने का प्रयास करें, इधर-उधर न मोड़ें।
0 बर्फ की सिकाई करें। गर्म सेक या मालिश बिल्कुल न करें।
0 क्रेप बैन्डेज पंजे से टखने पर होते हुए आधे पैर तक लगायें। 'बैन्डेज' न अधिक ढीला हो और न ही अधिक कसा हो।
0 यदि अपना वजन डालने में या खड़े होने में या चलने में तकलीफ हो तो ऐसा न करें।
0 पैर को तकिये के ऊपर रखें।
उपरोक्त जानकारी एवं सावधानियों के माध्यम से टखने में होने वाली आम परेशानी से बचा जा सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि उपरोक्त जानकारी के आधार पर संबंधित परेशानी उत्पन्न होने पर अपनी मर्जी से कोई भी दवा लेने से बचें। टखने में लगी चोट के कारण प्रतीत हो रहे लक्षण सामान्य न हों तो अविलंब चिकित्सक से संपर्क करें।
(लेखक से उनकी वेबसाइट www.drharshvardhan.com तथा ईमेल [email protected] के माध्यम से भी सम्पर्क किया जा सकता है।)











