नागपुर में रा.स्व.संघ की अ.भा. प्रतिनिधि सभा का आवाहनजल संरक्षण-संवद्र्धन की उचित नीति बनाए सरकार
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नागपुर में रा.स्व.संघ की अ.भा. प्रतिनिधि सभा का आवाहन
जल संरक्षण-संवद्र्धन की उचित नीति बनाए सरकार
गत 16-18 मार्च को नागपुर में सम्पन्न रा.स्व.संघ की अ.भा. प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह श्री सुरेश राव उपाख्य भैयाजी जोशी के प्रतिवेदन और संघ व विविध क्षेत्र के वृत्त निवेदन के पश्चात रा.स्व.संघ के संविधान के अनुसार यह चुनाव वर्ष होने के कारण सरकार्यवाह का निर्वाचन होना था, तद्नुसार सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी ने चुनाव प्रक्रिया आरम्भ की और उत्तर क्षेत्र के संघचालक डा. बजरंग लाल गुप्त ने श्री भैयाजी के कार्यकाल को प्रेरक व उत्साहवर्धक बताते हुए पुन: सरकार्यवाह के रूप में उन्हीं का नाम प्रस्तावित किया। इस बीच अपेक्षित समयावधि में दूसरा कोई नाम प्रस्तावित न होने पर श्री भैयाजी जोशी को पुन: तीन वर्ष के लिए रा.स्व.संघ के सरकार्यवाह के रूप में निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। श्री भैयाजी जोशी ने अपने निर्वाचन के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए बड़े भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “आप सबके सहयोग से ही सरकार्यवाह के अपेक्षित दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रयत्नशील रहूंगा। ज्येष्ठ बंधुओं से निवेदन है कि वे समय-समय पर मुझे कुछ बातों की ओर इंगित करने का दायित्व निभाएं ताकि समुचित ढंग से मैं अपने दायित्व का निर्वहन कर सकूं। सभी कार्यकत्र्ता भी निस्संकोच यह करें। मुझे इससे बल मिलेगा।” प्रतिनिधि सभा के अंतिम सत्र में श्री भैयाजी ने नई अ.भा.कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें इस बार दो नए सह सरकार्यवाह डा. कृष्णगोपाल (असम क्षेत्र प्रचारक) व श्री के.सी.कृष्णन (अ.भा. शारीरिक प्रमुख) बनाए गए। कार्यकारिणी में अन्य कुछ और परिवर्तन भी हुए जिनका विवरण आगे के पृष्ठों में दिया गया है। प्रतिनिधि सभा के समापन पर अपने उद्बोधन में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने आवाहन किया कि विश्व के समक्ष गहरा रहे चतुर्दिक संकटों के दौर में हिन्दू समाज सामथ्र्यवान बनकर स्वयं को तो उबारे ही, वह विश्व को उबारने के लिए भी सिद्ध हो। दुनिया का सुख- शांति के साथ जीना तभी संभव है जब हिन्दू राष्ट्र भारत अपने स्वाभिमान के साथ खड़ा हो। इसके लिए समर्पित संघ के हम सब कार्यकत्र्ता वर्तमान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को मात देने वाला अपना संगठन और मजबूत व व्यापक बनाएं।
प्रतिनिधि सभा ने दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए। पहले प्रस्ताव में समाज को बांटने वाली तुष्टीकरण राजनीति और सांप्रदायिक तथा लक्षित हिंसा (रोकथाम) विधेयक के जरिए समाज को बांटने की सोच पर लगाम लगाने का आवाहन किया गया। दूसरे प्रस्ताव में सरकार की “राष्ट्रीय जल नीति-2012” के प्रारूप में आवश्यक सुधार के साथ ही जल को सबके लिए शुद्ध रूप में सुलभ कराने की मांग की गई। यहां हम दोनों प्रस्तावों का मूल पाठ प्रकाशित कर रहे हैं। सं.
प्रस्ताव-1
समाज की एकता और एकात्मता को सर्वोपरि रखें
भारत में आज भूमि अधिकार, राजनीतिक अधिकार, बांध तथा नदी जल का बंटवारा, एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों का स्थानांतर, जाति, जनजाति और संप्रदाय के आधार पर विभिन्न गुटों में हो रहे संघर्ष इत्यादि विविध विषयों पर जन अभियान खड़े होते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन अभियानों में कुछ निहित स्वार्थी तत्वों के कृत्यों के कारण समाज के विभिन्न घटकों में जो वैमनस्य बढ़ रहा है उस पर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा चिंता व्यक्त करती है।
अ.भा.प्र.स.कहना चाहती है कि परिपक्व राजनीतिज्ञों द्वारा ऐसे विषयों को अत्यंत सावधानी तथा संवेनदशीलता से संभालना चाहिए। समाज की एकता और एकात्मता को सर्वोपरि मानकर ही ऐसे विषयों का हल ढूंढना चाहिए। दुर्दैव से अनुभव में यही आ रहा है कि क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए जनता की भावनाओं को भड़काया जा रहा है, जिसके कारण समाज के एकत्व को क्षति पहुंच रही है।
जन प्रबोधन और जागरण में प्रचार माध्यमों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे विषयों में कुछ प्रचार माध्यमों की सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति न केवल इन अभियानों को नुकसान पहुंचाएगी वरन् सामाजिक ताने-बाने पर भी उसका विपरीत असर होगा। ऐसे अभियानों का नेतृत्व करने वाले सामाजिक संगठनों का यह गुरतर दायित्व बनता है कि वे विभेदकारी प्रवृत्तियों को हावी न होने दें तथा निहित स्वार्थ रखने वाले अन्तर्बाह्य तत्वों को इन अभियानों का लाभ न उठाने दें, ताकि वे सामाजिक सामंजस्य तथा राष्ट्रीय एकता के वातावरण को हानि न पहुंचा सकें। प्रतिनिधि सभा प्रचार माध्यमों और सामाजिक संगठनों के नेतृत्वकत्र्ताओं का आवाहन करती है कि वे ऐसे अभियानों को सही दिशा प्रदान करने में रचनात्मक भूमिका निभाएं।
ऐसे अभियानों को जन्म देने वाले लगभग सभी विषयों में दोनों पक्षों की ओर से वास्तविक व्यथाएं तथा शिकायतें हो सकती हैं। प्रतिनिधि सभा ऐसे अभियानों के नेताओं तथा सहभागी जनता का आवाहन करती है कि वे समाज की व्यापक एकता और एकात्मता को अपनी दृष्टि से ओझल न होने दें। अपनी मांगों का समर्थन करते हुए इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि अपने वक्तव्यों तथा कृत्यों से हमारे सामाजिक ताने-बाने में दरार न आये तथा राष्ट्रीय एकता के सूत्र कमजोर न हों।
अ.भा.प्र.स. इसे गंभीर चिंता का विषय मानती है कि साम्प्रदायिक तथा लक्षित हिंसा (रोकथाम) विधेयक तथा अल्पसंख्यक आरक्षण जैसे मुद्दों पर केन्द्र सरकार की कार्रवाइयां समाज के विभिन्न घटकों में विभेद और वैमनस्य पैदा करने का कारण सिद्ध हो रही हैं। केन्द्र तथा कुछ राज्य सरकारों द्वारा अन्य पिछड़े वर्गों के 27 प्रतिशत आरक्षण में से 4.5 प्रतिशत हिस्सा अल्पसंख्यकों के लिए निकालने के संविधान विरोधी निर्णय को पूरे राष्ट्र को नकारना चाहिए। प्रतिनिधि सभा जोर देकर कहना चाहती है कि राष्ट्र की नीतियों का निर्धारण तात्कालिक राजनीतिक लाभ के लिए नहीं वरन् एक जन-एक राष्ट्र के सिद्धांत के आधार पर होना चाहिए।
अ.भा.प्र.स.समस्त देशवासियों का और विशेष रूप से स्वयंसेवकों का आवाहन करती है कि क्षुद्र स्वार्थों के लिए सामाजिक एकता को नष्ट करने के कुछ समाज घटकों के प्रयासों को परास्त करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
प्रस्ताव-2
राष्ट्रीय जल-नीति प्रारूप-2012 पर पुनर्विचार आवश्यक
देश की प्राकृतिक सम्पदा हमारी समस्त जीव सृष्टि की पवित्र विरासत है। इसलिए अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह सुविचारित मत है कि अपने जल संसाधनों, मिट्टी, वायु, खनिज सम्पदा, पशुधन, जैव विविधता और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को व्यापारिक लाभ के साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन संसाधनों के उपयोग व संरक्षण के प्रति हमारी दृष्टि, नीति एवं व्यवहार तात्कालिक निजी लाभ की अपेक्षा समग्र जीव सृष्टि के सुदीर्घ व पारस्परिकता युक्त सह अस्तित्व के सिद्धांत पर केन्द्रित होने चाहिए। विश्व के 2.5 प्रतिशत भू भाग व 4 प्रतिशत शुद्ध जल संसाधनों पर हम विश्व के 17 प्रतिशत लोग अवलम्बित हैं। ऐसी स्थिति में पंच महाभूतों में जल जैसी प्रकृति की पवित्र देन को निजी एकाधिकार एवं व्यापारिक लाभ की वस्तु बनाने की दिशा में सरकार के बढ़ते कदम अत्यंत चिंताजनक हैं।
केन्द्र सरकार ने हाल ही में प्रसारित राष्ट्रीय जल नीति प्रारूप 2012 में जल को जीवन के आधार के रूप में वर्णित करने के साथ ही अत्यंत चतुराई से विश्व बैंक व बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सुझाए व्यापारिक प्रतिरूप की क्रियान्विति के प्रस्तावों का समावेश कर इस दिशा में अपनी दूषित मानसिकता को प्रकट कर दिया है। जल नीति के इस नवीन प्रारूप में जल का शुल्क लागत-आधारित करने व जल उपभोग को नियंत्रित करने के नाम पर जल व विद्युत के दाम बढ़ाने के प्रस्ताव जल को जन साधारण की पहुंच से बाहर करने वाले सिद्ध होंगे। इन प्रस्तावों का उद्देश्य जल के कारोबार में प्रवेश करने वाली कंपनियों के लिए लाभ का मार्ग प्रशस्त करना है। विश्व बैंक के सुझाए अनुसार, सार्वजनिक व निजी सहभागिता के नाम पर जलापूर्ति का काम सार्वजनिक नियंत्रण रहित निजी एकाधिकार में देने जैसे प्रस्ताव जीवन की इस आधारभूत आवश्यकता को पूरी तरह से निजी एवं बहुत अंशों में विदेशी अधिकार में देने की मानसिकता का ही संकेत कर रहे हैं। विश्व में सर्वत्र जल के निजी एकाधिकार के अनुभव जलापूर्ति की मात्रा, गुणवत्ता, नियमितता व मूल्य की दृष्टि से निराशाप्रद ही रहे हैं। जलनीति में जल को आर्थिक वस्तु या व्यापार योग्य वस्तु ठहराकर, सरकार उन अन्तरराष्ट्रीय व्यावसायिक परामर्शदाताओं को सैद्धांतिक समर्थन दे रही है, जो भारत सहित विकासशील देशों में जल के निजीकरण में खरबों डालर के लाभकारी कारोबार के अवसर देख रहे हैं।
अ.भा.प्रतिनिधि सभा का मानना है कि जल हमारी सम्पूर्ण जीव सृष्टि के जीवन का आधार है। इसलिए देश के जल संसाधनों का उचित प्रबंध, प्रत्येक व्यक्ति को शुद्ध पेयजल की सहज आपूर्ति एवं कृषि की आवश्यकताओं के साथ ही सभी सार्थक आर्थिक गतिविधियों के लिए उचित मूल्य पर जल उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। राष्ट्रीय जल नीति से लेकर भू उपयोग परिवर्तन एवं देश के सभी प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर ग्राम सभाओं से लेकर उच्चतम स्तर तक गंभीर विचार विमर्श और तद्नुरूप नीति निर्माण सरकार की आज पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस परिदृश्य में अ.भा.प्रतिनिधि सभा सभी देशवासियों का आवाहन करती है कि जल जैसे प्रकृति के दिव्य उपहार के दुरुपयोग, अपव्यय एवं सभी प्रदूषणकारी गतिविधियों से दूर रहते हुए जल संरक्षण के लिए हर संभव प्रयत्न करें। इसके साथ ही प्रतिनिधि सभा सरकार से अपेक्षा करती है कि वह जल जैसे प्रकृति के उपहार को निजी एकाधिकार में देने के स्थान पर उचित जल संरक्षण, संवद्र्धन व प्रबंधन की नीति अपनाए। जल की बढ़ती आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल के पुनर्शोधन, निर्लवणीकरण से लेकर नदियों में प्रवाहमान जलराशि का सार्थक उपयोग सुनिश्चित करने हेतु सभी प्रकार के प्रभावी उपाय भी अत्यंत आवश्यक हैं। देश के जल स्रोतों के संरक्षण व संवद्र्धन की दृष्टि से गंगा-यमुना सहित सभी नदियों व अन्य जल स्रोतों में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने व सरस्वती नदी को पुन:प्रवाहित करने के लिए प्रभावी प्रयत्न किया जाना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार को इन कार्यों में सहयोग हेतु समाज, समाजसेवी संगठनों व धर्माचार्यों से भी सहयोग का आवाहन करना चाहिए। राष्ट्रीय जल नीति प्रारूप के संबंध में प्रतिनिधि सभा सरकार को सचेत करती है कि यदि उसने इसे यथावत स्वीकार करते हुए जल को निजी लाभ का साधन बनाने हेतु जल की कीमत को लागत आधारित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए तो उसे सशक्त जनप्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। थ्
सरकार्यवाह श्री सुरेश राव उपाख्य भैयाजी जोशी द्वारा
रा.स्व.स्व. की अ.भा. प्रतिनिधि सभा (नागपुर) में घोषित
अ.भा. कार्यकारिणी
क्र. नाम दायित्व
1 मा. सुरेश जी सोनी सहसरकार्यवाह
2 मा. दत्तात्रेय जी होसबाले सहसरकार्यवाह
3 मा. डा. कृष्णगोपाल जी सहसरकार्यवाह
4 मा. के. सी. कन्नन जी सहसरकार्यवाह
5 मा. अनिल जी ओक अ.भा. शारीरिक प्रमुख
6 मा. जगदीश प्रसाद जी अ.भा. सह शारीरिक प्रमुख
7 मा. भागय्या जी अ.भा. बौद्धिक प्रमुख
8 मा. महावीर जी अ.भा. सह बौद्धिक प्रमुख
9 मा. सुहासराव हिरेमठ अ.भा. सेवा प्रमुख
10 मा. अजित जी महापात्र अ.भा. सह सेवा प्रमुख
11 मा. सांकलचंद जी बागरेचा अ.भा. व्यवस्था प्रमुख
12 मा. बालकृष्ण जी त्रिपाठी अ.भा. सह व्यवस्था प्रमुख
13 मा. मंगेश जी भेंडे अ.भा. सह व्यवस्था प्रमुख
14 मा. मनमोहन जी वैद्य अ.भा. प्रचार प्रमुख
15 मा. जे. नंदकुमार जी अ.भा. सह प्रचार प्रमुख
16 मा. हस्तीमल जी अ.भा. संपर्क प्रमुख
17 मा. अनिरुद्ध जी देशपांडे अ.भा. सह संपर्क प्रमुख
18 मा. राम माधव जी अ.भा. सह संपर्क प्रमुख
19 मा. अरुण कुमार जी अ.भा. सह संपर्क प्रमुख
20 मा. सुरेशचंद्र जी अ.भा. प्रचारक प्रमुख
21 मा. विनोद कुमार जी अ.भा. सह प्रचारक प्रमुख
22 मा. मदनदास जी सदस्य
23 मा. मधुभाई जी कुलकर्णी सदस्य
क्र नाम दायित्व
24 मा. शंकरलाल जी सदस्य
25 मा. डा. दिनेश जी सदस्य
26 मा. मुकुंदराव पणशीकर सदस्य
27 मा. सीताराम जी केदिलाय सदस्य
28 मा. सेतुमाधवन जी सदस्य
29 मा. इन्द्रेश कुमार जी सदस्य
30 मा. आर. वण्यराजन जी सदस्य
31 मा. टी. वी. देशमुख जी सदस्य
32 मा. डा. अशोक राव कुकड़े सदस्य
33 मा. श्रीकृष्ण जी माहेश्वरी सदस्य
34 मा. पुरुषोत्तम जी परांजपे सदस्य
35 मा. बजरंगलाल जी गुप्त सदस्य
36 मा. दर्शनलाल जी अरोड़ा सदस्य
37 मा. डा. ईश्वरचन्द्र जी गुप्त सदस्य
38 मा. सिद्धिनाथ सिंह जी सदस्य
39 मा. रणेन्द्र लाल जी बनर्जी सदस्य
40 मा. असीम कुमार दत्त सदस्य
41 पू. सुदर्शन जी आमंत्रित सदस्य
42 मा. श्रीकांत जी जोशी आमंत्रित सदस्य
43 मा. एन. कृष्णप्पा जी आमंत्रित सदस्य
44 मा. श्रीकृष्ण जी मोतलग आमंत्रित सदस्य
45 मा. सुनीलपद गोस्वामी आमंत्रित सदस्य
46 मा. अशोक जी बेरी आमंत्रित सदस्य











