| दिंनाक: 08 Aug 2010 00:00:00 |
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यह कैसी पंथनिरपेक्षता?बाबा अमरनाथ की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से “कर” वसूलना बिल्कुल अन्याय है। जिस देश में प्रतिवर्ष मुसलमानों को हज यात्रा करने के लिए करोड़ों रुपए की छूट (सब्सिडी) दी जाती है, जिस देश से हाजियों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक भारी–भरकम प्रतिनिधिमण्डल सरकारी पैसे पर सउदी अरब जाता है, जिस देश के प्राय: हर बड़े नगर में सरकारी पैसे से “हज हाऊस” बनाए गए हैं या बनाए जा रहे हैं, जिस देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ मुसलमानों पर खर्च हो रहा है, जिस देश में अल्पसंख्यक मंत्रालय, अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक वित्त निगम आदि के माध्यम से मुसलमानों पर अरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिस देश में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की पांच शाखाएं विभिन्न जगहों पर सरकारी धन से खोली जा रही हैं, उसी देश में हिन्दू तीर्थयात्रियों को छूट या सुविधा देने के स्थान पर उनसे “कर” वसूला जा रहा है। यह कैसा नियम है या कैसी पंथनिरपंक्षता है? सच बात तो यह है कि यह कोई नियम या पंथनिरपेक्षता नहीं है, बल्कि यह सरासर अन्याय है, हिन्दुओं का अपमान है, हिन्दुओं की आस्था पर चोट है, हिन्दुओं को ललकार है, हिन्दुओं को चुनौती है। हिन्दू समाज को इस अन्याय के विरुद्ध तुरन्त उठ खड़ा होना चाहिए। किन्तु दुर्भाग्य तो यह है कि हिन्दू समाज जाति, प्रान्त, मत-पंथ के आधार पर विभाजित है या संगठित हिन्दू समाज की ताकत को महसूस कर उसे विभाजित कर दिया गया है। यह विभाजित हिन्दू समाज अपने पर आने वाले खतरों को देख नहीं पा रहा है, और वह अपने में ही उलझा हुआ है। इसका फायदा इस देश के विरोधी तत्व और तथाकथित सेकुलर नेता जमकर उठा रहे हैं।देश-विरोधी तत्वों के इशारे पर ही जम्मू-कश्मीर सरकार हिन्दू तीर्थयात्रियों से कर वसूल रही है, तो इधर सेकुलर केन्द्र सरकार पंथनिरपेक्षता की आड़ में एक मजहब विशेष के लोगों पर पूरी तरह मेहरबान हो रही है। वर्तमान केन्द्र सरकार हिन्दू समाज को अपमानित कर रही है। चाहे शिक्षा हो, व्यवसाय हो या नौकरी, हर क्षेत्र में मुसलमानों और हिन्दुओं के लिए अलग-अलग मानदण्ड और नियम बनाए जा रहे हैं। विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए अल्पसंख्यक छात्रों को मुफ्त में कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, तो हिन्दू छात्रों को कोचिंग के लिए मोटी रकम देनी पड़ रही है। अल्पसंख्यक छात्रों को सिर्फ 1 प्रतिशत ब्याज पर शैक्षणिक ऋण दिया जा रहा है और इस वित्त वर्ष में उन्हें विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए 11 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। कोई मुसलमान बड़े से बड़ा शिक्षण संस्थान खोल सकता है, उनमें अपनी इच्छानुसार शिक्षक और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकता है। पर उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएं सरकारें देती हैं। किन्तु कोई हिन्दू शिक्षण संस्थान खोलता है, तो उस पर दुनियाभर के नियम-कानून लागू होते हैं। इधर कुछ वर्षो से सरकारी नौकरियों में भी मुसलमानों को प्राथमिकता दी जा रही है। चाहे रेलवे हो, सेना या अद्र्धसैनिक बल हों या अन्य विभाग हर जगह मुसलमानों का प्रतिशत जबर्दस्ती बढ़ाया जा रहा है। हर विभाग में उनके लिए कोटा तय कर दिया गया है। वहीं हर क्षेत्र में हिन्दुओं के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। यह न तो हिन्दू समाज के लिए ठीक है, और न ही इस प्राचीन राष्ट्र के लिए।-आचार्य गणेश शास्त्री173, कपिल विहारपीतमपुरा (दिल्ली)हर सप्ताह एक चुटीले, ह्मदयग्राही पत्र पर 100 रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।-सं.अंक-सन्दर्भ 11 जुलाई,2010कांग्रेस और कश्मीरआवरण कथा “पाकिस्तान की शह पर अलगाववादियों का कश्मीर घाटी में जिहादी उन्माद” के अन्तर्गत यह आकलन बिल्कुल सही किया गया है कि श्री अमरनाथ यात्रा में बाधा उत्पन्न करने के उद्देश्य से ही अलगाववादियों द्वारा घाटी में हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जाहिर है, इसके लिए जितनी जिम्मेदार राज्य सरकार और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हैं, उतनी ही जिम्मेदार केन्द्र सरकार भी है, जो मुस्लिम तुष्टीकरण की अंध नीति पर चलकर अपने पांवों पर खुद कुल्हाड़ी मारने पर आमादा है। जबकि आवश्यकता इस बात की है कि कश्मीर में अगाववादियों की कमर तोड़ने के लिए वह सभी उपाय किए जाए जिनकी आज जरूरत है। इनमें सबसे प्रमुख है कश्मीर में लगी अलगाववादी धारा 370 की समाप्ति। इसके हटते ही कश्मीर में एक नए सबेरे का उदय होगा और कश्मीर की बदहाली को समाप्त करने के सभी रास्ते खुल जाएंगे।-आर.सी. गुप्ताद्वितीय ए-201, नेहरू नगर, गाजियाबाद (उ.प्र.)द कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसके लिए भारत सरकार ही जिम्मेदार है। वहां के कट्टरपंथी खुलेआम भारतीय तिरंगा जलाते हैं और “पाकिस्तान जिन्दाबाद” का नारा लगाते हैं। यही लोग सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर बरसाते हैं, फिर भी सरकार उनसे कड़ाई से निपटना नहीं चाहती है। उल्टे अपनी जान बचाने के लिए जो सुरक्षाकर्मी गोली चलाते हैं, उनसे तरह-तरह की पूछताछ की जाती है।-गणेश कुमारपुनाईचक, पटना (बिहार)द पाकिस्तान कश्मीर को हड़पने की साजिश में लगा हुआ है। उसके मददगार घाटी के नेता ही हैं। चाहे उमर अब्दुल्ला हो या महबूबा मुफ्ती ये सब अलगाववादियों को शह दे रहे हैं। इन्हें परास्त किए बिना आतंकवादियों को काबू में नहीं लाया जा सकता। इस बात पर भारत सरकार गंभीरता से विचार करे। पाकिस्तानी सोच बहुत ही खतरनाक है। यदि उसकी एक भी मांग मान ली गई तो वह बड़ी बेशर्मी से मांगों की सूची थमा देगा।-डा. उमेश मित्तलगंगोह रोड, सहारनपुर (उ.प्र.)द यदि हमारे नेता आतंकवाद पर राजनीति नहीं करते तो कब का कश्मीर मुद्दा हल हो गया होता। राजनीति के कारण आतंकवाद को सख्ती से कुचला नहीं गया और अब उसकी कीमत पूरा देश चूका रहा है। प्राय: प्रतिदिन सुरक्षाकर्मी शहीद हो रहे हैं। कश्मीर में सेना को विशेष अधिकार दिए जाएं, ताकि अवगाववादियों को कुचला जा सके।-राममोहन चंद्रवंशी324, राम नगर, टिमरनी, हरदा (म.प्र.)आत्मीय बधाई!त्रिनिदाद एवं टोबैगो की प्रधानमंत्री श्रीमती कमला प्रसाद बिसेसर को आत्मीय बधाई! उन्होंने हाथ में गीता लेकर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। श्रीमती बिसेसर के इस कदम से दुनियाभर के हिन्दुओं को गौरवान्वित महसूस करना चाहिए। अपने पूर्वजों की भूमि भारत से हजारों कि.मी. दूर जन्मीं, पलीं-बढ़ीं श्रीमती बिसेसर से भारतीय नेताओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। क्या हमारे नेता गीता या रामायण हाथ में लेकर मंत्री पद की सपथ ले सकते हैं?-ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह “सोनगरा”कांडरवासा, रतलाम (म.प्र.)द प्रसंगश: स्तम्भ में यह पढ़कर बहुत अच्छा लगा कि त्रिनिदाद और टोबैगो की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ने गीता हाथ में लेकर शपथ ग्रहण की। उन्होंने कहा कि भगवतगीता ही एक ऐसा ग्रंथ है, जो निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता है। लेकिन भारतवर्ष की विडम्बना देखिए कि यहां हिन्दुत्व और भारतीय संस्कृति के पक्ष में बात करने को साम्प्रदायिक मान लिया जाता है तथा इसका विरोध करने को पंथनिरपेक्षता। शायद भारत ही दुनिया का एकमात्र ऐसा देश होगा जहां कुल जनसंख्या का 85 प्रतिशत होते हुए भी हिन्दू अपने आराध्य भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर ही उनका मन्दिर नहीं बना सकते। जो वन्दे मातरम् कभी स्वाधीनता आन्दोलन का महामंत्र हुआ करता था आज स्वतंत्र भारत में उसी के गायन पर भी कुछ लोग आपत्ति करते हैं। ऐसे निराशाजनक वातावरण में दुनियाभर में कहीं भी भारतीय संस्कृति से सम्बंधित कोई भी अच्छी खबर थोड़ी राहत प्रदान कर जाती है।-सुरेन्द्र पाल वैद्यपाल ब्रादर्ज, पेन्टर्ज एण्ड आर्टिस्टकालेज रोड, मण्डी (हि.प्र.)नेहरू की अदूरदर्शिताश्री देवेन्द्र स्वरूप का लेख “कश्मीर प्रश्न ही पंथनिरपेक्षता की कुंजी है” सरकार की गलत नीतियों को उजागर करता है। मजहब के आधार पर भारत का बंटवारा किया गया। इसलिए पाकिस्तान इस्लामी देश हुआ। किन्तु भारत को पंथनिरपेक्ष घोषित किया गया, ऐसा क्यों? भारी कीमत देकर हमने देश का विभाजन स्वीकार किया। उसी समय मुस्लिम प्रश्न का समाधान कर देना चाहिए था। खण्डित भारत की यात्रा का आरंभ ही कश्मीर पर पाकिस्तानी आक्रमण से होता है। नेहरू की अदूरदर्शिता के कारण कश्मीर नासूर बना है। शेख अब्दुल्ला, फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला धारा 370 की आड़ में स्वायत्तता का राग अलाप रहे हैं।-दिलीप शर्मा114, 2205, एम.एच.बी.कालोनीकांदीवली पूर्व, मुम्बई (महाराष्ट्र)साधुवाद!काशी के भारतमाता मंदिर की उपेक्षा का उल्लेख कर तथा भारतीय स्वाभिमान के पीड़ित पक्ष की ओर इंगित कर दुखित रग को उद्वेलित कर दिया। इसके लिए आपको साधुवाद! उपेक्षा संभवत: इसलिए भी है कि यह किसी नेता या उसके परिवार पर न विपरीत प्रभाव डालती और न उसकी प्रसिद्धि को संवर्धित करती है। तथ्य चाहे जो भी हो, यह उपेक्षा राष्ट्र-भाव को पृष्ठभूमि में धकेल देती है। अत: ह्मदय को कचोटती है।-ले.क. (से.नि.) हरिहर मिश्र42/2, नेहरू एन्कलेवलखनऊ (उ.प्र.)पञ्चांग श्रावण कृष्ण 13 रवि 8 अगस्त, 2010 ” 14 सोम 9 ” श्रावण अमावस्या – मंगल 10 ” श्रावण शुक्ल 1 बुध 11 ” “(द्वितीया तिथि का क्षय ) 3 गुरु 12 ” ” 4 शुक्र 13 ” “(नाग पंचमी) 5 शनि 14 ” सी.बी.आई का दुरुपयोगसी.बी.आई का हुआ, बार-बार दुरुपयोग कौन नहीं यह जानता, पक्का है अभियोग। पक्का है अभियोग, शाह को करके अंदर हैं प्रसन्न भारत के कांग्रेसी-सेक्यूलर। है “प्रशांत” आतंकवाद से कठिन लड़ाई बंदूकों के कंधों को पहचानो भाई।।-प्रशांत 15