| दिंनाक: 04 Apr 2010 00:00:00 |
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पाकिस्तान में दो सिखों की हत्या का समाचार भारत सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखता। यदि ऐसा नहीं होता तो भारत सरकार तुरन्त पाकिस्तान सरकार से बात करती। किन्तु इस सम्बंध में केवल गोल-मोल बयान देकर चुपी साध ली गई। पाकिस्तान में चाहे हिन्दू मारे जाएं या सिख, भारत सरकार इस तरह व्यवहार करती है, मानो कुछ बोला तो उसकी “सेकुलर छवि” खराब हो जाएगी।-राजेश कुमारसुभाष पार्क, नवीन शाहदरा (दिल्ली)पाकिस्तान में एक साजिश के अन्तर्गत हिन्दू एवं सिखों पर निशाना साधा जा रहा है। इसके पीछे वही जिहादी मानसिकता काम कर रही है, जो गैर-मुस्लिमों को जोर-जबर्दस्ती मुस्लिम बनाना चाहती है। आश्चर्य है कि पाकिस्तानी हिन्दू और सिखों के दर्द को हिन्दू-बहुल देश भारत की सरकार भी नहीं सुनना चाहती है।-मनीष कुमारलकरजोरी, पो.-पीपरा, पथरगामा, गोड्डा (झारखण्ड)1947 के बाद से ही बंगलादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं का मतान्तरण जारी है। कट्टरवादी जबरन हिन्दुओं को मुस्लिम बना रहे हैं। यही कारण है कि इन दोनों देशों में नाम-मात्र के हिन्दू रह गए हैं। जबकि 1947 में बंगलादेश में 25-30 प्रतिशत और पाकिस्तान में 12 प्रतिशत हिन्दू थे। अब बंगलादेश में 8-9 प्रतिशत और पाकिस्तान में 1 प्रतिशत भी हिन्दू नहीं रह गए हैं। वहीं दूसरी ओर भारत में मुस्लिमों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।-कृष्ण कुमार अग्रवालकलायत मण्डी, कैथल (हरियाणा)सीमा बन्द करोसम्पादकीय “वार्ता का ढोंग क्यों” पढ़ा। पाकिस्तान पर हमारे प्रधानमंत्री आखिर किस आधार पर विश्वास कर रहे हैं। ऐसा अब क्या हो गया कि हमें वार्ता के लिए विवश होना पड़ रहा है। पाकिस्तान में बैठ कर आतंकवादी भारत के विरुद्ध जहर उगल रहे हैं। यही यदि हिन्दू संगठन करते तो भारत सरकार मुसलमानों को खुश करने के लिए उन्हें अन्दर कर देती। भारत क्यों नहीं पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देता? किस बात का डर है? क्या आतंकी शिविरों पर हमला नहीं किया जा सकता? क्यों नहीं हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में वापस मिलाने की प्रक्रिया प्रारंभ करते? पाकिस्तान के अलावा म्यांमार, बंगलादेश व नेपाल की सीमाओं को भी तुरन्त बन्द कर देना चाहिए।-वीरेन्द्र सिंह जरयाल28-ए, शिवपुरी विस्तार, कृष्ण नगर (दिल्ली)विचारोत्तेजक लेखडा. सतीश चन्द्र मित्तल का लेख “ब्रिाटिश सरकार ने भारत की सत्ता कांग्रेस को क्यों सौंपी” बहुत विचारोत्तेजक लगा। कांग्रेस का कहना, कि उसने देश का विभाजन स्वीकार करके देश को रक्तपात से बचा लिया, उसकी कमजोर और राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचायक है। देश रक्तपात से कहां बचा? आजादी के नाम पर देश का बंटवारा हुआ और लाखों लोगों का रक्त बहा, अरबों रुपए की जायदाद की हानि हुई वह अलग। सम्भवत: महाभारत और दोनों विश्व युद्धों के बाद यह सबसे बड़ा रक्तपात था। 63 वर्ष पहले शुरू हुआ यह रक्तपात आज भी जारी है। आतंकवाद के रूप में वे ही लोग आज भी भारतीयों का, मानवता का खून बहा रहे हैं।-अरुण मित्र324, राम नगर (दिल्ली)जैसी करनी, वैसी भरनीचर्चा सत्र में श्री शंकर शरण का आलेख “पाकिस्तान की बैरी मानसिकता को समझें” पाकिस्तानी सोच के प्रति सजग करता है। आज पाकिस्तान पर यह कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है- “जैसी करनी, वैसी भरनी”। पाकिस्तान ने आतंकवादियों को पैदा किया, उन्हें पाला-पोसा। अब वही आतंकवादी पाकिस्तान में प्राय: प्रतिदिन बम विस्फोट कर रहे हैं। पाकिस्तान में आतंकवादी समानान्तर सरकार चला रहे हैं। आतंकवादियों के आकाओं के सामने पाकिस्तान सरकार भीगी बिल्ली बन गई है। भारत को पाकिस्तान की गतिविधियों पर पूरी नजर रखनी चाहिए।-राममोहन चंद्रवंशीविट्ठल नगर, टिमरनी, हरदा (म.प्र.)राष्ट्रपति से निवेदनश्री मुजफ्फर हुसैन का लेख “क्या गोमांस परोसेगी सेकुलर सरकार?” सरकार में बैठे लोगों को भी पढ़ना चाहिए। राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल से निवेदन है कि वह अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए सरकार से पूछें कि क्या सचमुच में राष्ट्रमण्डल खेलों के समय अतिथियों को गोमांस परोसा जाएगा? अभी कुछ दिन पहले विश्व मंगल ग्रो ग्राम यात्रा सम्पन्न हुई है और 8 करोड़ से अधिक हस्ताक्षर राष्ट्रपति को सौंपे गए हैं। इसलिए राष्ट्रपति को जनमानस की भावना का आदर करना चाहिए।-सूर्यप्रताप सिंह सोनगराकांडरवासा, रतलाम (म.प्र.)दु:खद दास्तांश्री नरेन्द्र सहगल का तथ्यपरक आलेख “जम्मू-कश्मीर के लिए अभिशाप बन गई शेख और नेहरू की दोस्ती” कांग्रेस के नेहरू कालखंड की एक दु:खद दास्तां है। यदि उस समय इसे श्रीगुरुजी ने अपने सहयोग से और श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपनी जान पर खेलकर न बचाया होता तो कश्मीर कभी का भारत के हाथ से निकल चुका था। गौरतलब है कि देश विभाजन के तुरन्त बाद कबाइलियों की आड़ में जिस तरह पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण करके उसके एक तिहाई भाग पर नाजायज कब्जा जमा लिया था, उसे तुरन्त मुक्त कराने की बजाय पं. नेहरू ने कश्मीर में सैनिक कार्रवाई को रोक दिया और फरियाद लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में पहुंच गए और इस संवेदनशील मामले को हमेशा के लिए उलझा ही नहीं दिया, बल्कि भारत के लिए नासूर बना दिया।-आर.सी. गुप्तानेहरू नगर, गाजियाबाद (उ.प्र.)द कश्मीर समस्या नेहरू जी की देन है, जो नासूर की तरह फैलती ही जा रही है और उसको हवा दे रही है संविधान की धारा 370। नेहरू जी अब्दुल्ला की दोस्ती में इतने मशगूल हो गए कि उनको सरदार पटेल, संघ और राष्ट्रहित बौना लगने लगा। उनकी इसी अदूरदर्शिता का फायदा उठाकर पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर पर हमला बोल दिया। महाराजा हरी सिंह ने अपना सर्वस्व त्यागकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा तो नेहरू के पिछलग्गू शेख अब्दुल्ला ने सत्ता सुख की प्राप्ति के लिए सभी तरीके अपनाये। यह कांग्रेसी मुस्लिम तुष्टीकरण का अजीब उदाहरण था। हैदराबाद के निजाम को एक करोड़ का सलाना वेतन देना और महाराजा हरी सिंह का निर्वासित जीवन जीना भारतीय इतिहास की त्रासदी थी।-दिलीप शर्मा114/2205 एम.एच.वी. कालोनी, समतानगर, कांदीवली पूर्व, मुम्बई (महाराष्ट्र)द ऋषि-मुनियों की तपोस्थली जम्मू-कश्मीर को महाराजा हरी सिंह व उनके पूर्वजों ने अपने रक्त से सिंच कर विदेशी आक्रमणकारी विधर्मियों से सुरक्षित रखा था। किन्तु स्वतंत्रता के बाद यह राज्य नेहरू ने एक अलगाववादी, राष्ट्रद्रोही शेख अब्दुल्ला को सौंप दिया। दोस्ती में देश के साथ इतना बड़ा धोखा? उसी का दुष्परिणाम आज तक हम भुगत रहे हैं।-रामकृष्ण पाटिलग्राम-अहलवाडा, तह- टिमरनी, जिला-हरदा (म.प्र.)अंक-सन्दर्भ 28 फरवरी,2010सुरक्षा पर राजनीति नहींचर्चा सत्र में श्री बल्देव भाई शर्मा का आलेख “सुरक्षातंत्र में वोट राजनीति की सेंध” सरकारी की गलत नीतियों को उजागर करता है। पोटा को समाप्त कर कांग्रेस सरकार ने जिहादियों के हौसले बढ़ा दिए हैं। गुजरात सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून बनाकर केन्द्र सरकार को भेजा है, किन्तु उस पर भी राजनीति हो रही है। जितनी भी आतंकवादी घटनाएं होती हैं, उनमें मुसलमान ही क्यों पकड़े जाते हैं? यह उन नेताओं को सोचना चाहिए, जो आतंकवादियों के घर जाकर स्यापा करते हैं।-प्रदीपएटा (उ.प्र.)द्रौपदी का अश्लील चित्रणश्री अरुण कुमार सिंह की रपट “हुसैन की राह पर लक्ष्मी प्रसाद” से लगता है कि हिन्दुत्व-विरोधी खेमा देश में बड़ी तेजी से पांव पसार रहा है। मैकाले जो चाहता था वही हो रहा है। हिन्दू, अपने को हिन्दू कहने से कतराता है, इसी का परिणाम है कि लोग वामपंथी सोच रखकर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं।-प्रो. राजारामएच-8, सप्तवर्णी, सूर्या आवासीय परिसर कोलार मार्ग, भोपाल (म.प्र.)द द्रौपदी के बारे में अवमानना का एक भी शब्द कहना, स्वयं के ही कुल शील पर लांछन है। यह बहुत ही भयानक है। आंध्र प्रदेश में यह क्या हो रहा है? पहले मुख्यमंत्री की मृत्यु, फिर तेलंगाना पर एक छात्र का आत्मदाह। अब वहां के विश्वविद्यालय के हिन्दी अध्यापक द्वारा यह लिखा जाना कि धृतराष्ट्र का भी मन डोल उठा द्रौपदी को देखने के लिए, यह निर्वस्त्र का दोष है। बहुत खराब वक्त चल रहा है हमारे देश का, भारतीय मूल्यों के पतन का।-प्रो. परेश1251/8सी, चण्डीगढ़द द्रौपदी को ही नहीं, किसी भी महिला को आप मातृशक्ति, नारी-शक्ति के रूप में देखते हैं या भोग की वस्तु के रूप में, यह आपकी दृष्टि और विवेक पर आधारित है। आपकी दृष्टि जैसी होगी वैसी ही किसी महिला को देखेंगे। यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद की दृष्टि दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि वाली है। यदि उनकी दृष्टि अच्छी होती तो वे द्रौपदी के बारे में ऐसी बातें कभी नहीं लिखते।-स्वामी गोपाल आनन्द काकाचित्तरपुर, रामगढ़ (झारखण्ड)हुसैन के मगरमच्छी आंसूभारत में रहते हुए मकबूल फिदा हुसैन ने देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। हिन्दुओं के विरोध के बाद वे विदेश में रहने लगे और कुछ दिन पहले मुस्लिम देश कतर की नागरिकता उन्होंने ली है। अच्छा ही हुआ। जिस धरती पर उन्होंने जन्म लिया, जिसने उनको प्रसिद्धि दिलाई, उसकी सनातन संस्कृति पर ही वे हमला कर रहे थे। ऐसी धरती भला ऐसे कृतघ्न को अपनी गोद में क्यों रखती? अब वे मगरमच्छी आंसू बहा रहे हैं कि भारत में उनका बहिष्कार हुआ है। मैं हुसैन से पूछना चाहता हूं कि गैर हिन्दुओं के श्रद्धा-पात्रों पर क्यों नहीं अपनी तूलिका चलाते हैं? ऐसा एक बार ही करके देखो। फिर उन्हें कतर भी नहीं बचाएगा।-स्वामी अरुण अतरी560, सीता नगर, लुधियाना (पंजाब)सब तरफ लूटसुरसा बेचारी हुई, बिना बात बदनाम उसके मुख के सामने, शरमाए हैं दाम। शरमाए हैं दाम, सब तरफ लूट बढ़ी है उधर रसोई में मैडम की नाक चढ़ी है। कह “प्रशांत” खेलों की आड़ लिये है शासन पर जनता की मांग एक, दो सस्ता राशन।।-प्रशांतपञ्चांगवि.सं.2067 – तिथि – वार – ई. सन् 2010 शुद्ध वैशाख कृष्ण 6 रवि 4 अप्रैल, 2010 ” 7 सोम 5 ” ” 8 मंगल 6 ” ” 9 बुध 7 ” “(तिथि वृद्धि) 9 गुरु 8 ” ” 10 शुक्र 9 ” ” 11 शनि 10 ” 21