| दिंनाक: 06 Oct 2007 00:00:00 |
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थ् मठ-मन्दिरों पर कम्युनिस्टों का शिकंजा बर्दाश्त नहींथ् देवासम अध्यादेश वापस लो-प्रदीप कुमारकेरल की माक्र्सवादी सरकार हिन्दू मठ-मंदिरों और सांस्कृतिक संस्थानों पर एक के बाद एक प्रहार कर रही है। राज्य के शांतिप्रिय और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के हिन्दू जन-मानस के विरुद्ध कट्टरवादी मुस्लिम और ईसाई संगठनों के साथ माक्र्सवादियों ने गठजोड़ किया है। वे चाहते हैं मंदिरों का कब्जा अपने हाथ में लेकर उनकी संपदा लूट ली जाए, हिन्दू संस्कृति और संस्थानों को खत्म कर दिया जाए। इसी दृष्टि से माक्र्सवादी सरकार ने देवासम अध्यादेश लागू किया है। इस अध्यादेश के बाद राज्य सरकार शबरीमला, चोटन्निकारा, वायकोम, एट्टूमन्नूर, तिरिप्यार और कोडुंगालूर मंदिरों पर नियंत्रण कर लेगी। इन सभी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रहती है। और काफी धन-सम्पदा चढ़ावे के रूप में आती है। मंदिरों की इसी संपत्ति पर अब माक्र्सवादियों का कब्जा होगा।इस हिन्दू विरोधी प्रयास के विरुद्ध धार्मिक जनजागरण का बीड़ा उठाया है सुप्रतिष्ठित संगठन हिन्दू एक्य वेदी ने। केरल क्षेत्र रक्षा यात्रा के जरिए वेदी ने 9 से 25 मई के बीच उत्तर में कासरगोड से लेकर दक्षिण में पारास्सला तक लोगों को मंदिरों पर कम्युनिस्ट शिंकजे के प्रति सचेत किया है। राज्यभर में इस क्षेत्र रक्षा यात्रा को अपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ।पलक्कड़, ओट्टापालम, पट्टम्बी, चालक्कुडी आदि स्थानों पर लोगों ने भारी संख्या में उपस्थित होकर मन्दिर की आकृति में सजे रथ और यात्रा दल का पुष्पवर्षा से अभिनंदन किया।कासरगोड में विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए वेदी के पदाधिकारियों और संतों ने उन खतरों की ओर संकेत किया जो इस कम्युनिस्ट सरकार के छुपे एजेंडा के तहत हिन्दुओं पर मंडरा रहे हैं। हिन्दू एक्य वेदी के अध्यक्ष श्री कुम्मनम राजशेखरन ने कहा कि देवासम मंत्री डी. सुधाकरन केरल के मंदिरों पर हर हालत में कब्जा करना चाहते हैं। अगर सुधाकरन को हिन्दू हितों पर कुठाराघात करने की छूट दी गई तो यह हिन्दू समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित होगा। सरकार शबरीमला और गुरुवायुर मंदिरों के देवासम बोर्डों पर नियंत्रण करके इन मंदिरों की संपदा लूटना चाहती है। शबरीमला का वार्षिक चढ़ावा 200 करोड़ रुपए है जबकि गुरुवायुर मंदिर की सावधि जमा राशि 350 करोड़ रुपए है। इसके अतिरिक्त करोड़ों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण इत्यादि हैं। हिन्दू एक्य वेदी की इस क्षेत्र रक्षा यात्रा ने राज्य के धार्मिक अभिरुचि वाले हिन्दू समाज में निश्चित ही एक धर्मरक्षा का भाव पैदा किया है और सबने मिलकर मठ-मन्दिरों की रक्षा का एकजुट संकल्प लिया है।12