गोरखपुर के सांसद एवं गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने मांग की-
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गोरखपुर के सांसद एवं गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने मांग की-

Written byArchiveArchive
Mar 6, 2007, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 06 Mar 2007 00:00:00

आतंकवाद को सख्ती से कुचले सरकारगोरखपुर के युवा सांसद, गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सहित समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में आतंकवाद विरोधी जागरण अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रस्तुत है पाञ्चजन्य प्रतिनिधि से बातचीत में उनके द्वारा व्यक्त विचारों का सारांश। -सं.इसमें संदेह का कोई कारण नहीं है कि पूरे देश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. ने अपना संगठित तंत्र स्थापित कर लिया है। देश में सक्रिय तमाम आतंकवादी संगठनों, आपराधिक गिरोहों, विभिन्न भारत विरोधी वैचारिक-बौद्धिक संगठनों के बीच आई.एस.आई. समन्वय का काम कर रही है। इसकी एक ही मंशा है- भारत को अस्थिरता और अराजकता की ओर ले जाना।संपूर्ण गोरखपुर परिक्षेत्र आज आई.एस.आई. के निशाने पर है। माओवादियों, नक्सलवादियों से आई.एस.आई. ने सांठ-गांठ कर रखी है। नेपाल में जबसे माओवादी सत्ता पर हावी हुए हैं, तब से गोरखपुर परिक्षेत्र में आई.एस.आई. की गतिविधियां तेज हो गई हैं। आतंकवादी तत्वों को केन्द्र में सत्तारूढ़ दलों के सदस्यों से भी संरक्षण मिला हुआ है। यह बात जगजाहिर है कि असम विधानसभा चुनावों में उल्फा ने कांग्रेस को समर्थन दिया। आन्ध्र प्रदेश विधानसभा के चुनावों में नक्सली संगठन पीपुल्स वार ग्रुप से कांग्रेस ने सहायता ली। केरल में कोयम्बतूर बम कांड के सरगना मदनी की पार्टी से माकपा ने मदद ली। बिहार विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और नक्सलियों की सांठ-गांठ थी। बात साफ है कि कांग्रेस-कम्युनिस्ट गठजोड़ तथा अन्य सेकुलर दल सीधे तौर पर राष्ट्रविरोधी आतंकवादी तत्वों को प्रश्रय दे रहे हैं। इसका सीधा प्रमाण एक और है। पिछले वर्ष नोएडा में नेपाल के माओवादियों, भारत के नक्सलवादियों, कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और कुछ अन्य संदिग्ध लोगों के बीच एक बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद भारत सरकार ने लोकतंत्र की बहाली और नेपाल को हिन्दू राष्ट्र की जगह सेकुलर राष्ट्र बनाने की मुहिम को समर्थन दिया। इस कार्य में ईसाई चर्च और आई.एस.आई. से जुड़े लोगों की भी सक्रियता रही है। नेपाल में माओवाद और आई.एस.आई. के गठजोड़ ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जनपदों पर अपना असर दिखाना प्रारंभ कर दिया है।1995 के बाद से लगातार हमने गोरखपुर परिक्षेत्र में चलने वाली आई.एस.आई. की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी है, संदिग्ध तत्वों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सदैव प्रशासन को सावधान किया है, इस कारण से वे यहां कभी प्रभावी नहीं हो पाए। लेकिन समाजवादी पार्टी के शासन में राष्ट्रविरोधी तत्वों को जिस तरह प्रश्रय मिला, शासन-प्रशासन ने उनकी अवैध गतिविधियों की जिस तरह से अनदेखी की, उसके कारण आतंकी तत्वों के हौंसले बुलन्द हुए हैं। गोरखपुर में श्रृंखलाबद्ध विस्फोट राष्ट्रविरोधी तत्वों ने इस बौखलाहट में आकर किए हैं कि नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में हमने आई.एस.आई. प्रेरित तत्वों को न पनपने देने का संकल्प कर रखा है। इनका मकसद विध्वंसक है, ये हमें भयभीत करना चाहते हैं पर हम इनके मंसूबों को कभी कामयाब होने नहीं देंगे। गोरखपुर और आस-पास की जनता में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा जागरण आया है। यहां का समाज इस कार्रवाई के पीछे छिपे तत्वों को बखूबी जानता व समझता है और उनका जवाब देने में सक्षम है।मैं उ.प्र. शासन और प्रशासन से जरूर कहूंगा कि वह राष्ट्रविरोधी तत्वों के सफाए में कतई कोताही न बरते। समाजवादी पार्टी के शासन में जिस प्रकार की परिस्थिति बनी थी, वह नहीं बननी चाहिए। इसी वर्ष 4 जनवरी की घटना मुझे याद आती है। सद्दाम हुसैन की फांसी के विरोध में शहर में प्रदर्शन हो रहा था। समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन और जुलूस में शामिल मुस्लिम गुण्डों ने उस दिन न सिर्फ राहगीरों को मारा-पीटा, वरन् व्यापारियों की दुकानों को लूटा, आगजनी की। 23 जनवरी को बसंत पंचमी थी। उस दिन होली का संवत गाड़ा जाता है। गोरखपुर शहर के वंचित हिन्दुओं के मुहल्ले में मुसलमानों ने एक परंपरागत स्थान पर “संवत” (होलिका स्थापना) गाड़ने पर आपत्ति की। कुछ समझदार लोगों के हस्तक्षेप से विवाद का उसी दिन मिल-बैठकर समाधान भी हो गया। लेकिन शाम को कुछ अराजक तत्वों ने संवत उखाड़ कर फेंक दिया। हिन्दू घरों पर हमले किए गए। रात में एक दलित हिन्दू के घर पर हमला कर उसकी अबोध बेटी के अपहरण की कोशिश हुई। हिन्दुओं ने जब संगठित होकर प्रतिवाद किया तो वे भाग खड़े हुए। 24 जनवरी को भी इसी प्रकार की घटना हुई। दोबारा, 25 जनवरी को अनेक प्रतिष्ठित घरों की महिलाएं जब बाजार से खरीदारी कर लौट रही थीं, उन्हें शहर के चौराहे पर सरेआम खींचने की कोशिश हुई। दुस्साहस इतना कि मुस्लिम तत्वों ने हिन्दू महिलाओं का घर तक पीछा किया और उन्हें घर के अंदर से खींच लेने की कोशिश हुई। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बाद में गिरफ्तार अपराधियों को थाने से छुड़ा लिया। समाजवादी पार्टी का महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम खुद इस घटना में नामजद अभियुक्त था किन्तु पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 27 जनवरी को ऐसे ही एक बारात पर हमलाकर व्यवसायी नेता राजकुमार अग्रहरि की हत्या कर दी गई। तो जब शासन तुष्टीकरण पर उतर आएगा, कानून के क्रियान्वयन को लेकर भेदभाव करेगा तो जनरोष भी पैदा होगा। इस घटना के विरोध में जब मैं अपने सहयोगियों के साथ सड़क पर निकला, श्रद्धांजलि सभा करने की कोशिश की तो मुझे गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। इससे तो आतंकवादी तत्वों के हौंसले ही बुलन्द हुए। आज उ.प्र. की जनता तुष्टीकरण की राजनीति के दुष्परिणाम झेल रही है। आतंकी तत्वों के हौंसले मुलायम के राज में आसमान छू रहे थे। यद्यपि सरकार बदल गई है पर इनके हौंसले अभी जस के तस हैं। अभी गत 22 मई को सिद्धार्थ नगर में जिहादी तत्वों ने एक साधु की हत्या कर दी। 23 मई को बलरामपुर जिले के उतरौला गांव में एक दलित हिन्दू को घेर कर मार डाला। लेकिन दोनों मामलों में अभी तक कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।मैं स्पष्ट मानता हूं कि अराजक तत्वों को सांप्रदायिक आधार पर जब सत्ता और विदेशी शक्तियों का प्रश्रय मिलेगा, वे कभी भी देश में, उ.प्र. में शांति का वातावरण नहीं बनने देंगे। अयोध्या में एक बार फिर श्रीराम जन्मभूमि पर विस्फोट की साजिश उजागर हुई है। फैजाबाद रेल स्टेशन पर बरामद विस्फोटक पदार्थ और गिरफ्तार किए गए लोगों के पीछे जो बड़ी ताकत है, उसका पता लगाकर बेरहमी से सफाया होना चाहिए। स्थानीय अपराधी और अराजक छवि के मुसलमानों पर प्रशासन को पूरे प्रदेश में कड़ी निगाह रखनी होगी। बिना दबाव में आए सख्त कार्रवाई करनी होगी। तभी देश और प्रदेश इस इस्लामिक आतंकवाद की आग से बचेगा।मुख्यमंत्री मायावती का यह कहना कि सपा और भाजपा उनकी सरकार के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, ऐसा बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। उन्हें यह सिद्ध करके दिखाना होगा कि वे आतंकवादी कार्रवाई का करारा जवाब दे सकने में सक्षम हैं अन्यथा परिस्थितियां जिस कदर खतरनाक होती जा रही हैं, आने वाला समय और भयावह होगा। (राकेश उपाध्याय से बातचीत पर आधारित)18

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