| दिंनाक: 08 Jul 2005 00:00:00 |
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यू.के. के दो तिहाई मुस्लिम चाहते हैं देश छोड़नागार्जियन/ आई.सी.एम. सर्वेक्षण के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इनके अनुसार हाल के लंदन विस्फोट से मुस्लिमों के प्रति उपजी नफरत और गुस्से से घबराकर सैकड़ों, हजारों मुसलमानों ने ब्रिटेन को छोड़ने पर विचार किया था। 7 जुलाई को बम धमाकों के बाद ब्रिटेन के मुस्लिम वहां के गोरों के दिलों में धधक रही नफरत और गुस्से को भांप कर भयभीत हैं। कारण साफ है, ये बम धमाके ब्रिटेन में जन्मे इस्लामी आतंकवादियों ने किए थे। सर्वेक्षण के अनुसार यहां हजारों मुसलमान “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम के प्रति एक प्रकार की नफरत) के गुस्से का शिकार हुए हैं। पांच में से एक मुस्लिम व्यक्ति का कहना था कि वह खुद या उसके परिवार का कोई सदस्य बम विस्फोटों के बाद ब्रिटिश समुदाय के गुस्से का शिकार हो चुका है। उन्हें अब शक और शुबहे की निगाहों से देखा जा रहा है। पिछले तीन सप्ताह में पूरे यू.के. में पुलिस ने 12 सौ से ज्यादा “इस्लामोफोबिया” के मामले दर्ज किए हैं जिनमें गाली-गलौज से लेकर हत्या तक की घटनाएं हुई हैं। सर्वेक्षण लगभग उस समय किया गया था जब धमाकों के बाद पुलिस और ब्रिटिश इस्लामी नेताओं के बीच माहौल सुधारने संबंधी बातचीत चल रही थी। इसमें पुलिस अधिकारियों की बड़े पैमाने पर तैनाती, हिंसक कार्रवाइयों से मुसलमानों को बचाने के प्रयासों में सुधार और मुस्लिमों की ओर से पुलिस को संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों की सूचनाएं पहुंचाने जैसे कदमों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। करीब दो तिहाई मुस्लिमों ने सर्वेक्षणकर्ताओं को बताया कि बम धमाकों के बाद उनके मन में ब्रिटेन में अब और आगे बसे रहने को लेकर चिंता जागी थी। वृद्ध मुसलमान अपने भविष्य को लेकर ज्यादा चिंतित हो चले हैं। 35 और उससे ऊपर की उम्र के 67 प्रतिशत मुस्लिम चिंतित हैं कि आगे वे किस देश में रहें।ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी 10.60 लाख है जिसमें 10.10 लाख तो 18 साल से ऊपर के हैं यानी 5 लाख मुस्लिम देश छोड़ने की संभावना पर गौर कर रहे हैं। प्रत्येक 10 में से 3 मुस्लिम ब्रिटेन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताग्रस्त हैं, जबकि 56 प्रतिशत कहते हैं कि वे अभी नाउम्मीद नहीं हैं। इसी तरह 10 में से 8 मुस्लिम व्यक्ति मानते हैं कि इराक में ब्रिटेन की भागीदारी इन धमाकों के लिए जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने ऐसी किसी भी आशंका से इनकार किया है। 57 प्रतिशत मुस्लिमों का मानना है कि मुस्लिम नेता और मौलवी आतंकवाद को जड़ से मिटाने में असफल रहे हैं इसलिए ये विस्फोट हो रहे हैं। जबकि 57 प्रतिशत मुस्लिमों में से दो तिहाई कहते हैं कि नस्लवादी और “इस्लामोफोबिक” व्यवहार ही इन विस्फोटों के पीछे असल कारण था। 10 में से 9 मुसलमानों ने हिंसा के खिलाफ मत व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक संघर्ष में हिंसा की कोई जगह नहीं है। उनका यह भी कहना था कि ब्रिटेन के मुस्लिम रिहायशी इलाकों में आतंकवादियों की तलाश में वे पुलिस का सहयोग करेंगे।NEWS