प्रकृति भारती संस्थान द्वारा धरा और देव-भाव का संगम
August 17, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

प्रकृति भारती संस्थान द्वारा धरा और देव-भाव का संगम

Written byArchiveArchive
Apr 9, 2005, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 09 Apr 2005 00:00:00

एकवर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू, अगले साल से डिग्री भी देंगे।-विजय कुमारवस्तुत: पश्चिम की प्रगति की सोच एकांगी है। इसके विपरीत भारत का दृष्टिकोण ईशावास्योपनिषद के इस मंत्र पर आधारित है-ईशावास्यमिदं सर्वं यत्कचित्जगत्यां जगत्तेन त्यक्तेन भुंजीथा, मा गृध: कस्यस्विद्धनम्।।”इस सृष्टि में जो कुछ भी है, सबका निर्माता ईश्वर ही है। इसलिए प्रत्येक वस्तु का त्यागपूर्वक उपभोग करो तथा दूसरे की धन सम्पत्ति का लालच न करो।” इसी दर्शन को आधार मानने वाले कुछ समाजसेवी लोगों ने तीन साल पूर्व “प्रकृति भारती” नामक संगठन की नींव रखी। इसके लिए संगठन ने समाज जागरण की एक सतत श्रृंखला प्रारम्भ की है। इसके अन्तर्गत सभा, गोष्ठी, सम्मेलन, प्रकाशन, पुरस्कार आदि प्रयोग प्रारम्भ किए हैं। आज विश्व आयुर्वेद परिषद्, लोक भारती, गोसंरक्षण एवं संवद्र्धन परिषद्, आरोग्य भारती जैसी अनेक संस्थाएं भी प्रकृति भारती के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्यरत हैं।संस्था के महामंत्री डा. राजेश दुबे बताते हैं कि 6 से 8 सितम्बर, 2002 को आई.आई.टी. दिल्ली में “पंचगव्य एवं गोवंश आधारित अर्थव्यवस्था” पर एक भव्य सम्मेलन हुआ था। इसमें शासन-प्रशासन तथा विज्ञान क्षेत्र के महत्वपूर्ण लोग पधारे थे। भारत की पांचों आई.आई.टी. का प्रतिनिधित्व इसमें था। इसके अतिरिक्त धर्म भावना से गोशाला चलाने वाले, गोबर, गोमूत्र तथा गो-उत्पादों पर शोध करने वाले सैकड़ों कार्यकर्ता भी इसमें आए थे। तीन दिन तक सभी ने एक-दूसरे के अनुभवों से लाभ उठाया। यहां से ही एक संगठन के रूप में “प्रकृति भारती” की नींव पड़ी।इसके बाद 11 से 13 अक्तूबर, 2003 को “कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली” में एक अन्य सम्मेलन “प्रकृति- 2003” किया गया। इस सम्मेलन का केन्द्रीय विषय था “प्रकृति आधारित सतत विकास”। इसमें सात आधारभूत विषयों पर चर्चा की गयी। ये थे 1. पंचगव्य एवं अर्थव्यवस्था 2. जैविक कृषि 3. जल संसाधन प्रबंधन 4. वन संपदा एवं औषधीय पौधों की खेती 5. पर्यावरण एवं ऊर्जा 6. ग्रामीण तकनीक एवं ग्रामोद्योग तथा 7 ग्राम विकास।इन सम्मेलनों के आयोजन से देश के वैज्ञानिक वर्ग में यह विषय चर्चित होने लगे। अगली कड़ी में 26 से 31 अक्तूबर, 2004 को भोपाल के दशहरा मैदान पर तीसरा सम्मेलन “प्रकृति-2004” आयोजित किया गया। इसमें 5 नए विषय लिए गए- 1. मृदा सुधार 2. पशु आहार 3. जैविक सब्जी व फल उत्पादन 4. विपणन, खपत एवं आपूर्ति तथा 5. बैलचालित कृषि यंत्र एंव ऊर्जा। भोपाल सम्मेलन में म.प्र. शासन के कृषि विभाग का भरपूर सहयोग रहा। इसमें 1500 कार्यकर्ताओं की उत्साहजनक सहभागिता रही।इन सम्मेलनों में हुए विचार विमर्श के आधार पर अनेक पुस्तकों, स्मारिकाओं आदि का प्रकाशन किया गया है, जिससे उसका लाभ अन्य वैज्ञानिक, समाजसेवी तथा इस क्षेत्र में अनुसंधान कर रहे लोग उठा सकें। संस्था ने प्रशिक्षण देने के लिए एकवर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया है। आगामी सत्र से दो वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम भी शुरू हो जाएगा। इसे चौधरी चरणसिंह वि.वि., मेरठ, महर्षि दयानंद सरस्वती वि.वि., उदयपुर तथा अजमेर व कोटा वि.वि. ने मान्यता दे दी है। विकास का अर्थ प्रकृति का शोषण नहीं अपितु दोहन एवं संवद्र्धन है। इसी विचार को लेकर प्रकृति भारती फिर से मानव जाति को प्रकृति से जोड़ने के अभियान में सक्रिय हुई है।NEWS

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सौरव दास

Fact Check: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान को CJP के सौरव दास ने भ्रामक तरीके से पेश किया

P Chidambaram congress

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम बोले ‘मुझे गर्व है कि मैं दिमागी नक्सली हूं’

अटल गौरव स्मृति समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को प्रतीक चिह्न भेंट करते मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

अमित शाह ने अटल जी की अष्टधातु प्रतिमा का किया अनावरण, कहा- कांग्रेस ने वोट बैंक के लालच में वंदे मातरम को भुलाया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को नहीं, अलगाव और पूर्वोत्तर को अलग करने वालों को कहा ‘दिमागी नक्सल’: किरेन रिजिजू

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

जो लोग 1947 में मौन थे, वे आज भी मौन हैं : विभाजन विभीषिका पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ

1947 की एक बैठक के दौरान जवाहर लाल नेहरू, लार्ड माउंटबेटन और मोहम्मद अली जिन्ना

विभाजन की विभीषिका : षड्यंत्र का परिणाम पाकिस्तान

Load More

ताज़ा समाचार

सौरव दास

Fact Check: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान को CJP के सौरव दास ने भ्रामक तरीके से पेश किया

P Chidambaram congress

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम बोले ‘मुझे गर्व है कि मैं दिमागी नक्सली हूं’

अटल गौरव स्मृति समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को प्रतीक चिह्न भेंट करते मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

अमित शाह ने अटल जी की अष्टधातु प्रतिमा का किया अनावरण, कहा- कांग्रेस ने वोट बैंक के लालच में वंदे मातरम को भुलाया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को नहीं, अलगाव और पूर्वोत्तर को अलग करने वालों को कहा ‘दिमागी नक्सल’: किरेन रिजिजू

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

जो लोग 1947 में मौन थे, वे आज भी मौन हैं : विभाजन विभीषिका पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ

1947 की एक बैठक के दौरान जवाहर लाल नेहरू, लार्ड माउंटबेटन और मोहम्मद अली जिन्ना

विभाजन की विभीषिका : षड्यंत्र का परिणाम पाकिस्तान

सर्वानंद कौल और उनके पुत्र वीरेंद्र कौल

कौल परिवार में जगी न्याय की उम्मीद

निर्मल पुर्जा

स्मृतिशेष : शिखरों से संवाद

फैक्ट चेक: बीजेपी नेता के पुराने वीडियो को स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर विपक्ष ने चलाया गलत नैरेटिव, जानिए पूरा मामला

युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी ताकत, डेमोग्राफिक डिविडेंड को राष्ट्रीय शक्ति बनाएं: सरसंघचालक मोहन भागवत

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies