| दिंनाक: 07 Mar 2005 00:00:00 |
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राजनीति के प्रति अश्रद्धा समाजनीति के प्रति सम्मान-डा. वेदप्रताप वैदिकवरिष्ठ विश्लेषकयह सही है कि भारतीय राजनीति में आज ऐसे नाम नहीं हैं जो आम आदमी के लिए प्रेरणा बन सकें, या उनकी प्रशंसा के पात्र बन सकें अथवा जिनके चरित्र और आचरण के चर्चे घर-घर में होते हों। ऐसे महानायक आज देश में नहीं हैं, जैसे कि जयप्रकाश नारायण या राममनोहर लोहिया थे। कुछ हद तक इंदिरा गांधी को वह स्थान प्राप्त था। देश में आम धारणा है कि आज जो लोग हैं वे भारतीय मानव इतिहास के मात्र कर्मचारीगण हैं।इसलिए राजनीति के अलावा दूसरे क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय काम कर रहे हैं, चाहे वह आई.टी. का क्षेत्र हो, कला, साहित्य, उद्योग, तेल-गैस खोजने, भारत की सम्पदा बढ़ाने का क्षेत्र हो, ऐसे लोगों की समाज में इज्जत बढ़ रही है। लोग अपने बच्चों को कहते हैं कि इनके जैसे बनो। इसमें भी व्यक्ति की बजाय समूहों का सम्मान बढ़ा है। एक समष्टिगत चेतना भारत में विकसित हो रही है। यह अच्छा है, क्योंकि इसमें लगातार आगे बढ़ने का एक अहसास है। इसीलिए हमारे राजनेताओं की अयोग्यता और असफलता के बावजूद भारत पिछले 15-20 वर्ष में निरन्तर आगे बढ़ता जा रहा है। आज यह माना जा रहा है कि 21वीं सदी के मध्य में पहुंचते-पहुंचते भारत शायद दुनिया की पहले दर्जे की शक्ति बन जाएगा। जब अमरीका और यूरोप का क्षरण होगा और चीन की राजनीतिक व्यवस्था अपनी विशाल जनसंख्या को नहीं संभाल पाएगी तब भारत का लोकतंत्र और समन्वित जीवन एक बहुत बड़ी ताकत बन जाएगा। भारत में परस्पर प्रेम का वातावरण यहां शिक्षा, कला, सहयोग को निरन्तर आगे बढ़ाएगा। हमें संतोष होना चाहिए कि हमारे नेता विलक्षण नहीं हैं तो क्या हुआ, हमारी जनता अपने नेताओं से कहीं आगे है। नेता के अध:पतन का मुख्य कारण है कि राजनीति भ्रष्टाचार में पारंगत हो गई है। अगर कोई नेता ईमानदार भी है तो भी लोग उसकी ईमानदारी पर भरोसा नहीं करते। नेताओं की छवि खराब है और दुनिया छवि से चलती है।आज पूरा परिदृश्य एक हिमखंड की तरह है जिसका एक चौथाई हिस्सा ऊपर होता है और बाकी तीन चौथाई पानी की सतह से नीचे। इसी तरह समाज में राजनीति का एक चौथाई हिस्सा है जो ऊपरी तौर पर दिखाई पड़ता है। लेकिन तीन चौथाई हिस्सा सामाजिक संस्थाओं का होता है, सामाजिक आंदोलनों का होता है। हमारे पहले के राजनेता राजनीतिक के साथ ही समाजनीतिक भी थे, वे सामाजिक आंदोलन चलाते थे। अब कोई आंदोलन नहीं चलता। इसीलिए समाजकर्मी, जो चुपचाप अपना काम कर रहे हैं, देशवासियों से सम्मान प्राप्त कर रहे हैं।NEWS