| दिंनाक: 05 Sep 2004 00:00:00 |
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चुनावी महाभारतउ.प्र. में सबने सारी ताकत झोंकीदिल्ली की कुर्सी के लिए महत्वपूर्ण बन चुकीं उत्तर प्रदेश की 48 लोकसभा सीटों के लिए चुनावी महाभारत चरम पर है। इन सीटों पर 5 व 10 मई को मतदान होना है। भाजपा ने जहां प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और कल्याण सिंह समेत दो दर्जन “स्टार प्रचारकों” को लगाया है, वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव, राष्ट्रीय लोकदल के अजीत सिंह और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती भी जुटी हुई हैं। इन्हीं 48 सीटों में लखनऊ से अटल बिहारी वाजपेयी, मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, बुलंदशहर से कल्याण सिंह, पीलीभीत से मेनका गांधी, खीरी से विनय कटियार, बागपत से अजित सिंह और बरेली से केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार चुनाव मैदान में हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन 48 सीटों में से 50 फीसदी सीटों पर जिस पार्टी को विजय मिलेगी, राजपथ का रास्ता उसके लिए खुल जाएगा।उल्लेखनीय है कि इन 48 सीटों में से तीन सीटों को छोड़कर शेष पर 1991 से 1999 तक भाजपा कभी न कभी जीती है। हाथरस, खुर्जा, अलीगढ़, बुलंदशहर, हापुड़, मथुरा, बिल्हौर, लखनऊ, पीलीभीत व बरेली जैसी 10 सीटें वह लगातार चार बार से जीत रही है। पीलीभीत में मेनका गांधी को भाजपा का समर्थन रहा है। इस बार वह कमल के निशान पर चुनाव मैदान में हैं। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, आगरा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कानपुर, फतेहपुर, झांसी, जालौन और हमीरपुर में 1996 व 1998 में भाजपा लगातार विजयी रही। 1998 के चुनाव में 31 सीटों पर भाजपा का कब्जा था। इन्हीं 31 सीटों सहित सभी 48 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरी तरफ दिल्ली की कुर्सी की ताजपोशी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के लिए मुलायम सिंह ने पार्टी और सत्ता दोनों को लगा रखा है। इस बार अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल से उनका गठजोड़ है और इस क्षेत्र की 10 सीटों पर रालोद चुनाव लड़ रहा है।चुनावी घमासान में अब तक जो समीकरण उभरकर आए हैं, उसमें अधिकतर सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और सपा-रालोद गठजोड़ के बीच ही मुकाबला है। लगभग आधा दर्जन सीटों पर बसपा भी मुकाबले की कोशिश में है। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल रामपुर को छोड़कर किसी भी सीट पर कांग्रेस मुकाबले में ही नहीं दिख रही है। 1999 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर, रामपुर और मेरठ पर कांग्रेस का कब्जा था। मेरठ से जीते अवतार सिंह भड़ाना ने हरियाणा की राह पकड़ ली, वहीं मुजफ्फरनगर में कांग्रेस प्रत्याशी सइदुज्जमा सपा के मुनव्वर हसन, बसपा के सूरत सिंह वर्मा व भाजपा के अमरपाल सिंह से चतुष्कोणीय मुकाबले में फंस गए हैं। सहारनपुर में तो कांग्रेस का टिकट पाने के बाद चौधरी यशपाल सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया और अब कमल खिलाने में जुटे हैं। रामपुर में कांग्रेस की बेगम नूरबानों की राह में सपा की जयाप्रदा, बसपा के अफरोज अली खां और भाजपा के राजेन्द्र शर्मा इस बार रोड़े अटकाने की कोशिश में हैं।मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, आगरा, संभल, मुरादाबाद, बदायूं और शाहजहांपुर पर अपने को केन्द्रित कर रखा है जबकि मायावती ने बुन्देलखण्ड के झांसी, बांदा, हमीरपुर, जालौन, जलेसर और बिजनौर में पूरी ताकत झोंक दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के प्रभाव के अलावा भारतीय जनता पार्टी को के.सी. त्यागी (मेरठ से जद यू के उम्मीदवार), सतपाल मलिक (बागपत से भाजपा के उम्मीदवार), चौधरी शीशपाल सिंह (सहारनपुर से भाजपा के उम्मीदवार) के केसरिया खेमे में आने से सामाजिक समीकरणों के हिसाब से फायदा हो रहा है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद से लेकर मध्य प्रदेश से जुड़ी झांसी तक फैली इन 48 सीटों पर अब तक भाजपा का कोई न कोई बड़ा नेता चुनाव प्रचार में पहुंच चुका है। अंतिम दौर में भाजपा की कोशिश है कि इनमें से अधिकतर पर अटल जी, आडवाणी जी व श्री कल्याण सिंह में से कोई न कोई जरूर चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे। लखनऊ से सिद्धार्थ सिंह32