Archive पाञ्चजन्य, माघ शुक्ल 8, 2059 वि. (9 फरवरी, 2003)कुत: कृतघ्नस्य यश: कुत: स्थानं कुत: सुखम्।अश्रद्धेय:
Archive हमारी उन्नति का एकमात्र उपाय यह है कि हम पहले वह कत्र्तव्य करें जो हमारे हाथ में है। और इस प्रकार धीरे-धीरे शक्ति-संचय करते हुए क्रमश: हम सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं।