गुवाहाटी (असम)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को असम स्थित प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय का दौरा किया. विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए सरकार्यवाह जी ने समाज को नई दिशा और सकारात्मक आकार देने में शिक्षा, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों की अपरिहार्य भूमिका पर अपने सारगर्भित विचार साझा किए. उनके प्रेरणादायी संबोधन ने विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और समूचे विश्वविद्यालय समुदाय में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्र निर्माण और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति एक नई ऊर्जा का संचार किया.
सामाजिक और राष्ट्रीय पुनरुत्थान में शिक्षा की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि आधुनिक युग में छात्र-केंद्रित, अनुभव-आधारित और कौशल-उन्मुख शिक्षा की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे युवा केवल डिग्रीधारी न बनें बल्कि राष्ट्र के सच्चे निर्माता सिद्ध हों.
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चरित्र निर्माण और मूल्य-आधारित शिक्षा अनिवार्य”
सरकार्यवाह जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए बल दिया कि शिक्षा का प्राथमिक लक्ष्य चरित्र निर्माण होना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र के भविष्य की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि यह गैर-लाभकारी शिक्षण संस्थान समाज के सामूहिक पुरुषार्थ और सेवा भाव का अनुपम उदाहरण है.
“शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के समग्र विकास का माध्यम है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चरित्र निर्माण, सांस्कृतिक चेतना और मूल्य-आधारित शिक्षा ही भारत को आत्मनिर्भर और समर्थ बनाएगी। विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के छात्र केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि इस संस्थान के संस्थापक समूह के रूप में एक अनूठी ऐतिहासिक विरासत का निर्माण कर रहे हैं।”
– दत्तात्रेय होसबाले जी, सरकार्यवाह, RSS
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक शिक्षा का अनूठा समन्वय
समारोह के शुभारंभ पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने स्वागत उद्बोधन दिया. उन्होंने संस्थान के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान प्रणालियों, सांस्कृतिक परंपराओं और सनातन जीवन मूल्यों को आधुनिक वैश्विक शिक्षा के साथ एकीकृत करने के लिए समर्पित है.
प्रो. तिवारी ने कहा कि संस्थान का परम लक्ष्य ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना है जो अपनी जड़ों और गौरवशाली विरासत से गहराई से जुड़ी हो, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान व तकनीक से सुसज्जित हो और भारत को पुनः ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित करने में सक्रिय योगदान दे सके. यह गरिमामय कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कलिता की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ.
परिसर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश: सरकार्यवाह जी ने किया पौधारोपण
संबोधन सत्र के उपरांत सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य वी. भागैया जी के साथ विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण अभियान में सहभागिता की.
दौरे के मुख्य संदेश एवं पर्यावरणीय संकल्प:
- टिकाऊ भविष्य का निर्माण: पौधारोपण की यह पहल प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व और हरित व सतत भविष्य के निर्माण के संकल्प को दर्शाती है.
- शिक्षा और पर्यावरण का जुड़ाव: शैक्षणिक गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारियों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया.
- जिम्मेदार नागरिकता का भाव: पूरे आयोजन ने छात्रों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव, जिम्मेदार नागरिकता और सतत विकास का सशक्त व व्यावहारिक संदेश दिया.
इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के साथ हुई आत्मीय व सार्थक चर्चा ने विश्वविद्यालय में राष्ट्रहितैषी शिक्षा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाया.











