13 अगस्त 2026 को जयपुर के Hyatt Regency में आयोजित पाञ्चजन्य के ‘सुशासन संवाद – राजस्थान’ में आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज जी ने पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर जी के साथ संवाद करते हुए धर्म, अध्यात्म, सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी के संबंध में गहन विचार रखे। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल जानकारी या सूचना के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह जीवन के आचार, विचार और चरित्र में उतरने वाली साधना है। आचार्य जी ने कहा कि आज सोशल मीडिया और रील्स के माध्यम से जो कुछ प्राप्त हो रहा है, वह अधिकतर प्रचार और सूचना है, अध्यात्म नहीं। उनके अनुसार अध्यात्म भीतर के अनुभव से जन्म लेता है, जबकि रील्स और वायरल कंटेंट केवल आकर्षित करते हैं, जीवन को बदलते नहीं। उन्होंने युवाओं से धैर्य रखने, स्वाध्याय करने और त्वरित समाधान की मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्म को 30 सेकंड की रील या किसी त्वरित उपाय में नहीं समझा जा सकता। धर्म वह है जो व्यक्ति को अपने सही आचरण के प्रति जागरूक बनाता है और जीवन में निरंतर अभ्यास के रूप में प्रकट होता है।
















