भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भवाना कांत ने एक और नया रिकॉर्ड बना लिया है। उन्होंने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (TACDE) में फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस तरह वे वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं जिन्होंने यह कोर्स पास किया है।
यह कोर्स करीब 20 हफ्ते का होता है और वायुसेना के सबसे कठिन एडवांस्ड कॉम्बैट कोर्सेस में गिना जाता है। इसमें चुनिंदा फाइटर पायलट्स को ही भेजा जाता है। पास करने के बाद पायलट जटिल एयर कॉम्बैट मिशन लीड कर सकते हैं और वायुसेना के फ्रंटलाइन कॉम्बैट टैक्टिशियन बन जाते हैं।
TACDE और टॉप गन कोर्स क्या है?
TACDE वायुसेना का मुख्य फाइटर टैक्टिक्स संस्थान है। इसे अमेरिकी नेवी के मशहूर “टॉप गन” प्रोग्राम के बराबर माना जाता है। अमेरिकी नेवी में इसका असली नाम स्ट्राइक फाइटर टैक्टिक्स इंस्ट्रक्टर प्रोग्राम है। यहां पायलट्स को एडवांस्ड कॉम्बैट टैक्टिक्स, मिशन प्लानिंग, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशंस सिखाए जाते हैं। साथ ही हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशनल सिचुएशन में लीडरशिप का भी ट्रेनिंग दी जाती है। यहां के इंस्ट्रक्टर वायुसेना के सबसे अनुभवी फाइटर पायलट्स और कंट्रोलर्स होते हैं।
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कौन हैं स्क्वाड्रन लीडर भवाना कांत?
भवाना कांथ बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली हैं। वे इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। जून 2016 में उन्हें भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था। वे देश की पहली महिला फाइटर पायलट्स के बैच का हिस्सा थीं। उसी बैच में अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह भी शामिल थीं।
उन्होंने महिलाओं के लिए सैन्य विमानन में कई बार नई राह खोली है। 2019 में वे पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्हें दिन के समय फाइटर कॉम्बैट मिशन उड़ाने की मंजूरी मिली। शुरू में उन्होंने मिग-21 बाइसन उड़ाया, बाद में SU-30 एमकेआई पर शिफ्ट हो गईं।
2021 में वह गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। 2024 में उन्होंने गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट में भी उड़ान भरी। भवाना कांत का यह नया कामयाबी महिलाओं के वायुसेना के कॉम्बैट स्ट्रीम में बढ़ते रोल को दिखाता है। वह अब एडवांस्ड ऑपरेशनल और लीडरशिप पोजीशन में भी जगह बना रही हैं।











