प्रल्हाद वेंकटेश जोशी अब भारत के नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री बन गए हैं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान क जगह ये पदभार संभाला है। वे भाजपा के सबसे अनुभवी सांसदों में से एक हैं और 2019 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में हैं। कर्नाटक से पांच बार सांसद चुने जा चुके जोशी पहले भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राज्य में पार्टी का विस्तार करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
सादा लेकिन कामयाब तरीका
जोशी को कम प्रोफाइल रखने वाला लेकिन काम को प्रभावी ढंग से करने वाला नेता माना जाता है। सालों से उन्होंने संसद और मंत्रालय की जिम्मेदारियां संभाली हैं। लोग कहते हैं कि वे शोर-शराबे से दूर रहते हैं, लेकिन जो काम सौंपा जाता है उसे अच्छे से पूरा करते हैं।
पहले संभाले पद
शिक्षा मंत्री बनने से पहले वे उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे थे। ये जिम्मेदारियां अब भी उनके पास रहेंगी। 2019 में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। तब उन्हें संसदीय मामलों, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। यह जिम्मेदारी 2024 तक उनके पास रही।
संसदीय मामलों में अहम योगदान
संसदीय मामलों के मंत्री के रूप में जोशी ने कई महत्वपूर्ण बिल पास करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए ही ऐतिहासिक अनुच्छेद 370 को हटाने और महिला आरक्षण बिल जैसे बड़े बिल पास हुए थे।
क्या है जोशी का अनुभव
जोशी कर्नाटक से आते हैं। राज्य स्तर पर भाजपा को मजबूत करने में उनका लंबा समय लगा। पार्टी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को विस्तार दिया। बाद में केंद्र में आने के बाद उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में काम किया। उनका अनुभव संसद से लेकर मंत्रालय तक फैला हुआ है।
नए पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद जोशी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और अपनी जिम्मेदारियों को समर्पण के साथ निभाऊंगा।” वे आरएसएस से जुड़े रहे हैं और पार्टी के भीतर अनुशासन और सादगी के लिए जाने जाते हैं। राजनीति में उनका अंदाज नाटकीय नहीं बल्कि व्यावहारिक और शांत रहा है।











