
श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस और पावन पर्व श्री विजयदशमी के अवसर पर नागपुर के ऐतिहासिक रेशिमबाग मैदान पर मुख्य श्री विजयादशमी उत्सव का आयोजन हो रहा है। इस अवसर पर सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विस्मृति को दूर कर उस तत्व को भी स्पष्ट रूप से समझना पड़ेगा, स्वीकार करना पड़ेगा तथा उसके अनुरूप गुणवत्ता का जीवन के सभी आयामों में निर्माण करना पड़ेगा। देश की स्वाधीनता के लिये जितनी तपस्या व समर्पण हुआ, उससे कहीं अधिक की आवश्यकता अब पड़ेगी, परिस्थिति को देखते हैं तो यह ध्यान में आता है।
सरसंघचालक जी ने कहा कि संघ का कार्य भी गत 100 वर्षों से भारत को स्व के, अस्मिता के, लोकाचार के आधार पर संगठित व बलसंपन्न करने के लिये चला है। संघ की शतकपूर्ति के उपलक्ष्य में, जीवन परिवर्तन की कारक पांच पहलों में एक यही स्व का बोध व स्वदेशी के आचरण की पहल है।
पञ्च परिवर्तन की पांचों पहलों का यथा – समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन – समाज के सभी वर्गों तथा स्तरों में स्वागत हुआ है। विश्व के अन्य देशों में भी इसकी आवश्यकता अनुभव की गयी है। यह केवल एक वर्षभर का कार्यक्रम नहीं अपितु जीवन में आचरण का परिवर्तन लाने वाली व्यवहार की शैली है।
इस वर्ष के गौरवशाली उत्सव में मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘दैनिक जागरण’ के प्रधान संपादक श्री संजय गुप्ता जी हैं।