
अक्टूबर 2026 के मध्य में फ्रांस के कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और स्कूलों-सार्वजनिक सेवाओं की खराब हालत के खिलाफ थे। शनिवार 17 अक्टूबर को ये प्रदर्शन कुछ जगहों पर हिंसक हो गए। दुकानों में लूटपाट, सार्वजनिक इमारतों पर हमले और पुलिस से झड़पें हुईं। लिमोज़ शहर का पुराना टाउन हॉल जल गया, ल्योन में टूरिस्ट ऑफिस जला, मार्सेय और अन्य शहरों में भी नुकसान हुआ। अधिकारियों के मुताबिक करीब 550,000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए (आयोजकों का आंकड़ा 800,000 तक)। गिरफ्तारियों की संख्या लगभग 2,400 पहुंची और करीब 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए। एक प्रदर्शनकारी की पेरिस में हृदय गति रुकने से मौत हो गई।
यह सब सितंबर के अंत में स्कूलों से शुरू हुआ। कई हाई स्कूलों में शिक्षकों की कमी और इमारतों की खराब स्थिति को लेकर छात्रों ने विरोध किया। कई स्कूलों के गेट बंद कर दिए गए। धीरे-धीरे इसमें ट्रेड यूनियन, छात्र संगठन और अन्य लोग जुड़ गए। महंगाई, ईंधन की कीमतें और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए। 17 अक्टूबर को देशभर में बड़े मार्च निकाले गए। दिनभर ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम को कुछ जगहों पर हिंसा शुरू हो गई।
सरकार और अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अलावा कुछ अल्ट्रा-वामपंथी छोटे समूह और अपराधी तत्व शामिल हो गए। ये लोग इमारतों पर हमले और लूटपाट में लगे। फ्रांसीसी खुफिया रिपोर्टों में पहले से यह आशंका जताई गई थी कि कुछ दूर-वामपंथी दल (जैसे ला फ्रांस इनसौमिस से जुड़े) छात्रों के आंदोलन को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ पर्यवेक्षक और विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इसमें वामपंथी और कुछ इस्लामवादी या प्रो-पैलेस्टिनियन समूहों का मेल भी दिख रहा है, क्योंकि प्रदर्शनों में फिलिस्तीनी झंडे और कुछ नारे भी देखे गए। लेकिन सरकार ने आधिकारिक तौर पर मुख्य रूप से अल्ट्रा-वामपंथी ग्रुप और अपराधियों को जिम्मेदार ठहराया है। कोई बड़े संगठित साजिश का ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ज्यादातर लोग आम मुद्दों—महंगाई और स्कूलों—को लेकर सड़क पर थे।
18 अक्टूबर की शाम को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “अल्ट्रा-वामपंथी समूहों के कुछ तत्व और कई अपराधी बेरोकटोक हिंसा में लगे। दुकानें लूटी गईं, सार्वजनिक इमारतें और टाउन हॉल पर हमले हुए।” उन्होंने पूछा, “फ्रांसीसी लोग फ्रांस के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? कुछ भी इसे जायज नहीं ठहराता, कुछ भी इसे समझाता या माफ नहीं करता।”
मैक्रों ने कहा कि देश को गुस्सा और शर्म महसूस हो रही है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की वैध मांगों (महंगाई और युवाओं के भविष्य) को हिंसा से अलग रखा। उन्होंने पुलिस, मेयरों और दुकानदारों का समर्थन जताया, न्यायिक कार्रवाई की बात कही और कहा कि प्रेफेक्ट्स जरूरत पड़ने पर कुछ रैलियां बैन कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने छात्रों, शिक्षकों, यूनियनों के साथ बैठकें करने की बात कही ताकि समाधान निकाले जा सकें।