
दरभंगा में आयोजित सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद में उद्बोधन देते सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल जी।
दरभंगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दरभंगा के तत्वावधान में शनिवार को द ऑड कंपनी होटल एंड रेस्टोरेंट में सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी की प्रमुख उपस्थिति रही। इसमें दरभंगा विभाग की 40 से अधिक धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित साधु-संतों, महंतों, संन्यासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन परंपरा के जीवन मूल्यों, सामाजिक समरसता तथा समाजहित में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श करना और सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था।
मार्गदर्शन में डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि सनातन परंपरा के मूल में सेवा, सदाचार, करुणा, आत्मानुशासन और लोककल्याण जैसे जीवन मूल्य निहित हैं। इन मूल्यों को आचरण में उतारने से समाज में सद्भाव, आत्मीयता और उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि साधु-संतों ने भारतीय समाज को संस्कारित करने, सांस्कृतिक चेतना को बनाए रखने और लोकमंगल की भावना जागृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के बीच निरंतर संवाद और परस्पर सहयोग से सामाजिक समन्वय सुदृढ़ होगा तथा लोककल्याण के प्रयासों को व्यापक स्वरूप मिलेगा।
उन्होने सभी संगठनों से नियमित बैठकें आयोजित करने, आपसी समन्वय बढ़ाने तथा समाजहित के कार्यों को मिलकर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर अच्छा कार्य कर रही हैं। यदि इन प्रयासों को परस्पर सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो उनका प्रभाव और व्यापक हो सकता है।
संवाद के दौरान विभिन्न मठों, मंदिरों और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी गतिविधियों, सामाजिक योगदान तथा भविष्य में सामूहिक रूप से किए जा सकने वाले कार्यों पर विचार साझा किए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयामों -सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों, को समाज जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इन विषयों को व्यक्तिगत आचरण, पारिवारिक जीवन और सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनाकर सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।
धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं से अपेक्षा व्यक्त की गई कि वे अपने प्रभाव और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से इन जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सेवा, संस्कार, सद्भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत करने में सहयोग करें।
कार्यक्रम में आर्य समाज, पतंजलि, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, रामकृष्ण मिशन, आनंद मार्ग, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, संत निरंकारी मिशन, आर्ट ऑफ लिविंग, इस्कॉन, गायत्री परिवार, महर्षि मेंही आश्रम, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, गुरुद्वारा कमेटी, जिला दुर्गा पूजा समन्वय समिति तथा अन्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में जरूरतमंदों की सेवा, युवाओं में नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक संस्कार तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया गया।
कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ। सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद ने धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के बीच परस्पर परिचय, नियमित संवाद और समन्वय को बढ़ावा देने के साथ पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा लोककल्याण के कार्यों को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने का संदेश दिया।