सीबीआई की रेड के बाद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार का एक और कारनामा सामने आया है। राज्य में पहले से बनी सड़कों के दोबारा निर्माण के नाम पर करीब 500 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। आरोप है कि लोक निर्माण विभाग जिन सड़कों का निर्माण पहले ही कर चुका था, उन्हीं सड़कों के लिए पंजाब मंडी बोर्ड ने दोबारा टेंडर जारी किए और कथित तौर पर भुगतान भी कर दिया।
जनहित याचिका दायर
मामले में गुरदासपुर निवासी रणजीत सिंह ने जनहित याचिका दायर कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में उठाए सवाल
10 मार्केट कमेटियों के काम पंजाब मंडी बोर्ड को सौंपे: याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए CM के निर्देशों के आधार पर 10 मार्केट कमेटियों के काम पंजाब मंडी बोर्ड को सौंप दिए गए। इसके बाद सड़क निर्माण से जुड़े कामों में भी अनियमितताएं हुईं। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब इन सड़कों का निर्माण पहले ही हो चुका था, तो दोबारा टेंडर जारी करने व भुगतान करने की जरूरत क्यों पड़ी।
2018 में तय व्यवस्था, सितंबर 2026 में बदले काम
याचिका के अनुसार, 15 मार्च 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई शीर्ष समिति की बैठक में लोक निर्माण विभाग और पंजाब मंडी बोर्ड के बीच ग्रामीण संपर्क सड़कों के काम बांटने पर चर्चा हुई थी। बैठक में मार्केट कमेटियों के आधार पर पहले से चल रही व्यवस्था को जारी रखने की सिफारिश की गई थी। कई वर्षों तक इसी व्यवस्था के तहत काम होता रहा। इसके बाद सितंबर 2026 में 10 मार्केट कमेटियों के काम मंडी बोर्ड को सौंपने का फैसला किया गया।
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मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद यह बदलाव किया गया:
याचिका के मुताबिक, 9 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद यह बदलाव किया गया। फिर 16 और 21 सितंबर को जारी कार्यालय आदेशों के जरिए काहनूवान और कलानौर समेत 10 मार्केट कमेटियों के काम मंडी बोर्ड को सौंप दिए गए। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि यह बदलाव करने से पहले संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरी ली गई थी या नहीं। साथ ही, काम सौंपने से पहले तकनीकी जांच और खर्च की जरूरत का आकलन किया गया था या नहीं।
इंजीनियर इन चीफ की भूमिका की जांच की मांग
जनहित याचिका में पंजाब मंडी बोर्ड के इंजीनियर इन चीफ जतिंदर भंगू की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच करवाई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
जांच पूरी होने तक टेंडर और भुगतान रोकने की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि मामले की जांच पूरी होने तक विवादित सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े नए टेंडर जारी करने और भुगतान करने पर रोक लगाई जाए। याचिका में कहा गया है कि इससे सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
जारी किया नोटिस
अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इस घटना को सरकार पर बड़ी आपदा बताया जा रहा है।












