मध्य प्रदेश

‘सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए मानव सेवा’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक श्री बालासाहेब देवरस एवं ज्येष्ठ प्रचारक श्री भाऊराव देवरस के पैतृक ग्राम कारंजा, लांजी (बालाघाट) में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ

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अरुण कुमार सिंह

गत 6 अक्तूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक श्री बालासाहेब देवरस एवं ज्येष्ठ प्रचारक श्री भाऊराव देवरस के पैतृक ग्राम कारंजा, लांजी (बालाघाट) में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने बालासाहेब-भाऊराव देवरस माध्यमिक नेत्र परीक्षण केंद्र का लोकार्पण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि जहां प्रत्यक्ष रूप से सेवा और समाजहित का कार्य हो रहा हो, वहां भाषण से अधिक कार्य का महत्व होता है। भाषण समय के साथ भुला दिए जाते हैं, लेकिन समाज के लिए किया गया कार्य चिरंतन रहता है।

उन्होंने कहा कि पूजनीय बालासाहेब देवरस एवं स्वर्गीय भाऊराव जी का जीवन देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने का सबसे सार्थक माध्यम उनके विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाना है। स्मृति भवन एवं महापुरुषों के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी नई पीढ़ी को उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि किसी महापुरुष के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल उनके जीवन-चरित्र को पढ़ने या उनका स्मरण करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके जीवन से मिलने वाले संदेश को अपने आचरण में उतारना चाहिए। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज के सामने संकट आया, तब पुस्तक प्रकाशन के लिए एकत्रित धन को पीड़ितों की सहायता में लगाया गया। इससे यह संदेश मिलता है कि मानव सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।सेवा कार्यों में सामूहिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री भागवत ने कहा कि सेवा में सबका साथ, श्रेय की नहीं कोई बात; प्रकल्प में सबका हाथ होना चाहिए। समाजसेवा किसी एक व्यक्ति के श्रेय का विषय नहीं, बल्कि सभी के सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़ने वाला कार्य है। किसी भी सामाजिक प्रकल्प की सफलता में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वीर सावरकर की कविता का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को प्राप्त ज्ञान, विद्वत्ता और प्रतिभा का उपयोग मातृभूमि एवं समाज के हित में होना चाहिए।

शिक्षा और क्षमता का लाभ यदि समाज एवं राष्ट्र को नहीं मिलता, तो वह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि बनकर रह जाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के उत्थान के लिए विभिन्न महापुरुषों ने अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य किया। किसी ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, किसी ने सामाजिक सुधार का कार्य किया, तो किसी ने राजनीतिक जागरण, धर्म एवं संस्कृति के क्षेत्र में योगदान दिया। कार्यक्रम में मानकर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अतुल शिरोडकर, मध्य क्षेत्र संघचालक श्री पूर्णेंदु सक्सेना, विदर्भ प्रांत संघचालक श्री दीपक तामशेट्टीवार तथा न्यास के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. पवन उपस्थित रहे।

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