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भारतीयों को ‘बंधुआ मजदूर’ कहने पर भारत ने जताई नाराजगी, अमेरिका को दिया जवाब

भारत ने कहा कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। भारतीय इंजीनियर, वैज्ञानिक और आईटी विशेषज्ञ अपनी मेहनत और हुनर से वहां की कंपनियों और तकनीकी क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें ‘बंधुआ मजदूर’ कहना सही नहीं है।

Published by
Mahak Singh

भारत और अमेरिका के बीच भारतीय पेशेवरों को लेकर नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से भारतीयों के लिए ‘इंडेंचर्ड लेबर’ यानी ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर भारत ने आपत्ति जताई है। भारत का कहना है कि इस तरह की भाषा भारतीय पेशेवरों के सम्मान को ठेस पहुंचा सकती है। विदेश मंत्रालय ने इस शब्द के पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इससे औपनिवेशिक दौर की यादें ताजा होती हैं।

भारत का मानना है कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय विशेषज्ञ अपनी योग्यता, मेहनत और अनुभव के दम पर वहां के विकास में योगदान देते हैं। आईटी, विज्ञान, इंजीनियरिंग और दूसरे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की अहम भूमिका है। ऐसे में उनके लिए अपमानजनक माने जाने वाले शब्द का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। भारत ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दूसरे देश में काम करने वाले कुशल लोगों के योगदान को सही नजरिए से देखना चाहिए। भारतीय पेशेवर दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को कहा कि कुशल भारतीयों का अमेरिका में काम करना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। इससे अमेरिकी कंपनियों को योग्य कर्मचारी मिलते हैं और भारतीय पेशेवरों को अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलता है। भारत ने ‘इंडेंचर्ड लेबर’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसका पुराना इतिहास शोषण से जुड़ा है। इसलिए आज के पढ़े-लिखे और कुशल पेशेवरों के लिए ऐसे शब्द का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। भारत का कहना है कि भारतीयों की मेहनत और उनके काम का सम्मान किया जाना चाहिए। दोनों देशों के अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाना जरूरी है।

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