
UPI Payment Update
UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस आजकल सबकी रोजमर्रा की चीज बन चुका है। दुकानदार से लेकर ग्राहक तक इससे पैसा भेजते-प्राप्त करते हैं। अब इस पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की योजना चल रही थी। लेकिन ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे त्योहारी सीजन के बाद यानी 1 जनवरी तक टालने का प्रस्ताव विचाराधीन है। फैसला अगले कुछ दिनों में हो सकता है।
एमडीआर वो फीस है जो व्यापारी या मर्चेंट को पेमेंट स्वीकार करने पर चुकानी पड़ती है। NPCI ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी ग्राहक से दुकानदार वाले UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा। 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर छूट पहले से तय थी और वह बनी रहेगी। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी।
त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। दिवाली, शॉपिंग और ज्यादा बिक्री का समय है। ट्रेडर्स और उद्योग संघों ने चिंता जताई कि इस दौरान एमडीआर लगाने से उनका खर्च बढ़ जाएगा। इससे व्यापार पर बोझ पड़ेगा। इसी वजह से थोक व्यापारी और रिटेलर्स ने कुछ दिन पहले ‘नो यूपीआई डे’ मनाया था। उन्होंने 2,000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर एमडीआर का विरोध किया।
इन आपत्तियों के बाद NPCI की अगुवाई वाली यूपीआई एंड सर्विस स्टीयरिंग कमिटी की बुधवार को बैठक हुई। इसमें एमडीआर के लागू होने के समय और अन्य बातों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद ही इसे लागू करने का प्रस्ताव है, ताकि दुकानदारों को राहत मिले।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कमिटी उन व्यवसायों को एमडीआर से छूट देने पर विचार कर रही है जिनका सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये तक है। पहले मासिक टर्नओवर 1 लाख रुपये तक वाले व्यवसायों को छूट देने की बात थी। नया ढांचा इसे और बड़ा बना सकता है।
इस खबर के बाद पेमेंट एग्रीगेटर्स के शेयर गिरे। पेटीएम के शेयर लगभग 10 प्रतिशत तक लुढ़के और उसकी मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे चली गई। मोबिक्विक के शेयर 8 प्रतिशत से ज्यादा गिरे तो पाइन लैब्स के भी 4 प्रतिशत से ऊपर गिरावट आई। पेटीएम के शेयर कुछ समय के लिए लोअर सर्किट तक पहुंच गए थे।
संक्षेप में, त्योहारी सीजन में व्यापारियों पर अतिरिक्त खर्च न पड़े, इसलिए एमडीआर को अक्टूबर 15 से हटाकर जनवरी 1 तक स्थगित करने पर विचार चल रहा है। 2,000 रुपये तक की छूट बरकरार रहेगी और छोटी-मझोली दुकानों के लिए और राहत के विकल्प भी देखे जा रहे हैं।