
ईरान के इस्फहान शहर में एक प्रदर्शनकारी अलीरेजा सेपाही को फांसी दे दी गई। वे 25 साल के थे। जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। फांसी से ठीक पहले उन्होंने जेल से अपनी मंगेतर से फोन पर शादी की थी।
अलीरेजा सेपाही को 10 जनवरी को उनकी मां के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनकी मां अभी भी जेल में हैं और पांच साल की सजा काट रही हैं। आरोप था कि वे इस्फहान के अलीखानी स्क्वायर पर हुए प्रदर्शनों से जुड़े थे। इन प्रदर्शनों में चार पुलिस अधिकारी मारे गए थे।
ईरान की मिजान एजेंसी के मुताबिक उन्हें हथियारबंद गुट का सदस्य होने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का दोषी ठहराया गया। इस मामले में कुल 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी। अमेरिका के मानवाधिकार संगठन अब्दोररहमान बोरौमंद सेंटर का कहना है कि उनके मुकदमे में प्रक्रिया संबंधी गंभीर खामियां थीं। बचाव पक्ष के सबूतों को नजरअंदाज किया गया, जैसे कि एक फुटेज जिसमें दिखाया गया था कि घटना के समय वे उस इलाके में मौजूद नहीं थे।
जुलाई में अलीरेजा को सबके सामने फांसी दी जानी थी। 28 जुलाई को अलीखानी स्क्वायर में उनके चचेरे भाई अबोलफजल समेत दो और लोगों के साथ फांसी की तैयारी थी। लेकिन फांसी से कुछ देर पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कुछ दिनों बाद अस्पताल से छूटकर वे जेल लौट आए। उसके बाद वे रोज फांसी के डर में जी रहे थे।
5 अक्टूबर की सुबह उन्हें इस्फहान की सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। उनके साथ 21 साल के अलीरेजा रायसी को भी फांसी दी गई। फांसी से ठीक पहले उनके वकील ने फोन पर एक समारोह का इंतजाम किया। इसमें उनकी पार्टनर 22 साल की महशाद काशानी से शादी की धार्मिक रस्में पूरी की गईं। महशाद भी विरोध प्रदर्शनों के कारण इस्फहान की ही दूसरी जेल में बंद थीं। दोनों के पिताओं ने इस शादी की मंजूरी दे दी थी।
जेल अधिकारियों ने जोड़े को आखिरी बार आमने-सामने मिलने की इजाजत नहीं दी। वकील ने ऑडियो कॉल के जरिए शादी करवाई। कानूनी तौर पर शादी हो गई, लेकिन दोनों जेल में अलग-अलग जगह थे।
नॉर्वे स्थित एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार इन विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में अब तक 34 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। ये प्रदर्शन 8-9 जनवरी को अपने चरम पर थे। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इन प्रदर्शनों को कड़ी कार्रवाई से दबाया गया। इसमें हजारों लोग मारे गए और इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था।
फांसी के बाद अलीरेजा का शव परिवार को इस्फहान में दफनाने के लिए नहीं दिया गया। उसे लगभग 200 किलोमीटर दूर काशान भेज दिया गया।