
भुवनेश्वर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत को उन्नत एयरो-इंजन के डिजाइन, विकास, परीक्षण, विनिर्माण और रखरखाव में अपनी स्वदेशी क्षमताओं को और मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रणोदन प्रौद्योगिकी में महारत हासिल किए बिना भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।
सिंह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की कोरापुट डिवीजन, सुनाबेड़ा में 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। एचएएल कोरापुट द्वारा 2,000वें इंजन का निर्माण भारत की एयरोस्पेस और रक्षा यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित करने की घोषणा भी की। 218 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित होने वाली इस लाइन की क्षमता प्रतिवर्ष 100 तक शक्ति इंजन बनाने की होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि 2,000वें इंजन की उपलब्धि को केवल उत्पादन का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। यह छह दशकों से अधिक समय से एचएएल कोरापुट द्वारा देश की रक्षा तैयारियों और सैन्य विमानन को दिए जा रहे तकनीकी योगदान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कोरापुट की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और कुशल मानव संसाधन ने भारत की प्रणोदन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक एयरो-इंजन विकसित करना अत्यंत जटिल तकनीकी प्रक्रिया है। इसके लिए उन्नत सामग्री, धातुकर्म, सटीक विनिर्माण, सुपरएलॉय, तापरोधी कोटिंग, कूलिंग तकनीक, परीक्षण सुविधाओं और कठोर गुणवत्ता नियंत्रण में विशेषज्ञता आवश्यक है। इसलिए भारत को केवल इंजन बनाने की क्षमता विकसित करने के बजाय डिजाइन से लेकर रखरखाव और ओवरहॉल तक पूरी प्रणोदन मूल्य श्रृंखला में स्वदेशी क्षमता विकसित करनी होगी।
सिंह ने एचएएल कोरापुट के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि 2,000 इंजनों की आपूर्ति रक्षा बलों की परिचालन क्षमता में 2,000 महत्वपूर्ण योगदान का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि कोरापुट डिवीजन ने वर्ष 1964 में स्थापना के बाद से निरंतर तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता के विस्तार के माध्यम से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एएमसीए और हाई-थ्रस्ट इंजन कार्यक्रम पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का विस्तार स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता तक होना चाहिए। विशेष रूप से भविष्य के उन्नत सैन्य विमान कार्यक्रमों के संदर्भ में देश को हाई-थ्रस्ट इंजन विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने लगभग 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाले स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन कार्यक्रम का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण कच्चे माल और इंजन प्रौद्योगिकी से जुड़ी क्षमताओं को विकसित करना है। इसके तहत मिश्रा धातु निगम लिमिटेड (मिधानी) के साथ मिलकर महत्वपूर्ण सामग्रियों के स्वदेशीकरण और भारत में पहली स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन परीक्षण सुविधा विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सिंह ने कहा कि उन्नत लड़ाकू विमानों की अगली पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को डिजाइन, सामग्री, विनिर्माण, परीक्षण और रखरखाव समेत पूरी मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताएं विकसित करनी होंगी। उन्होंने कहा कि उच्च प्रदर्शन वाले एयरो-इंजन का विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर निवेश, अत्याधुनिक परीक्षण ढांचे, अत्यधिक कुशल मानव संसाधन और मजबूत औद्योगिक आधार की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सामग्रियों, सुपरएलॉय और विशेष तकनीकों में घरेलू क्षमता विकसित किए बिना बड़े पैमाने पर विश्वसनीय उत्पादन हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। इसलिए सरकार का जोर एक ऐसे व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम पर है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्टअप, अकादमिक संस्थान और अनुसंधान संगठन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
एएल-31एफपी इंजन उत्पादन क्षमता 50 प्रतिवर्ष होगी
रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और कच्चे माल से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद एचएएल ने भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने 2024 में सुखोई-30 एमकेआई विमानों के लिए एचएएल को 240 एएल-31एफपी इंजनों का ऑर्डर दिया था। एचएएल ने निर्धारित समय से पहले पहला इंजन उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि दूसरे वर्ष के अंत तक 60 इंजनों की निर्धारित संख्या के मुकाबले 63 इंजन उपलब्ध करा दिए गए हैं।
उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए एएल-31एफपी इंजन की वार्षिक उत्पादन क्षमता को 30 से बढ़ाकर 50 इंजन किया जा रहा है। इसके लिए 335 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह विस्तार भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई बेड़े की आवश्यकताओं को पूरा करने में एचएएल की क्षमता को मजबूत करेगा।
शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित होगी
शक्ति इंजन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 218 करोड़ रुपये के निवेश से दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित की जाएगी। इस नई लाइन की क्षमता प्रतिवर्ष 100 तक इंजन बनाने की होगी और इसे 2028-29 तक पूरी तरह स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
शक्ति इंजन भारत के स्वदेशी हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण है। इसका इस्तेमाल ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर जैसे प्लेटफॉर्म में किया जाता है। नई उत्पादन लाइन से इन स्वदेशी हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रणोदन प्रणालियों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ एचएएल को गुणवत्ता, विश्वसनीयता और समयबद्ध आपूर्ति के मानकों को भी लगातार ऊंचा उठाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता का विस्तार रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
एचएएल कोरापुट को व्यापक प्रणोदन केंद्र बनाने पर जोर
राजनाथ सिंह ने एचएएल कोरापुट के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस सुविधा को केवल इंजन उत्पादन केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक एयरोस्पेस प्रणोदन इकोसिस्टम के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने एमएसएमई, स्टार्टअप, निजी उद्योग, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एचएएल को अपने आसपास आपूर्तिकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करना चाहिए तथा स्थानीय उद्योगों को उच्च तकनीक वाले रक्षा विनिर्माण में भाग लेने के अवसर देने चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि स्टार्टअप और युवा इंजीनियरों को नई तकनीकों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाकर नई प्रणोदन तकनीकों के विकास और महत्वपूर्ण इंजन कलपुर्जों के स्वदेशीकरण को गति दी जा सकती है।
उन्होंने एचएएल कोरापुट की टीम से गुणवत्ता, उत्पादकता, स्वदेशीकरण, नवाचार और समयबद्ध आपूर्ति के मानकों को और बेहतर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2,000वें इंजन की उपलब्धि को भविष्य की अधिक उन्नत प्रणोदन क्षमताओं की आधारशिला बनाया जाना चाहिए।
ओडिशा में रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग के विस्तार की संभावनाएं
रक्षा मंत्री ने ओडिशा में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के विस्तार की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने राज्य की रणनीतिक स्थिति, लंबी समुद्री तटरेखा, बंदरगाहों, खनिज संसाधनों, औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन को रक्षा विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने चांदीपुर स्थित डीआरडीओ के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज जैसी रणनीतिक सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी क्षमताएं राज्य में रक्षा और एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सिंह ने ढेंकानाल के गजामरा में एयरोस्पेस एंड डिफेंस इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स को मंजूरी देने के लिए ओडिशा सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि एचएएल कोरापुट और राज्य में विकसित हो रही अन्य औद्योगिक क्षमताओं को जोड़कर एक व्यापक रक्षा विनिर्माण नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने स्थानीय युवाओं को उन्नत तकनीक और रक्षा विनिर्माण से जुड़े रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
छह दशकों में एचएएल कोरापुट का महत्वपूर्ण योगदान
2,000वें इंजन की उपलब्धि ने एचएएल कोरापुट के छह दशकों से अधिक के योगदान को एक बार फिर रेखांकित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि कोरापुट डिवीजन द्वारा निर्मित और समर्थित इंजनों ने मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि नए इंजनों का उत्पादन जहां सैन्य विमानों की परिचालन क्षमता बढ़ाता है, वहीं इंजनों का ओवरहॉल और रखरखाव मौजूदा विमानों की सेवा अवधि बढ़ाने तथा उनकी परिचालन उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एचएएल कोरापुट में अब तक 9,000 से अधिक इंजनों का ओवरहॉल किया जा चुका है। इससे देश की स्वदेशी मरम्मत और ओवरहॉल क्षमता मजबूत हुई है। कलपुर्जों के स्वदेशीकरण और टर्नअराउंड समय कम करने के प्रयासों ने भी रक्षा परिसंपत्तियों की परिचालन तत्परता को बनाए रखने में योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री माझी ने मांगी एक और रक्षा विनिर्माण इकाई
कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य में एक और रक्षा विनिर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ओडिशा में धातु डाउनस्ट्रीम उद्योग, सेमीकंडक्टर और आईटी सहित कई उभरते क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं, जो भविष्य में रक्षा विनिर्माण के लिए मजबूत औद्योगिक आधार उपलब्ध करा सकते हैं।
माझी ने कहा कि राज्य में धातु से लेकर सेमीकंडक्टर तक एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम आकार ले रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के अनुरूप राज्य सरकार ओडिशा को एक प्रमुख औद्योगिक और रक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एचएएल कोरापुट में वर्तमान में करीब 1,600 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। उन्होंने शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन और एएल-31एफपी उत्पादन क्षमता में विस्तार को ओडिशा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। माझी ने राज्य में औद्योगिक निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के गठन के बाद से करीब 22.5 लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 12.5 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 152 औद्योगिक परियोजनाओं का भूमि पूजन हो चुका है और इनसे करीब 2.5 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को रक्षा विनिर्माण से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरज में 870 एकड़ क्षेत्र में ‘ओडिशा सिलिकॉन वैली’ विकसित की जा रही है। सिकसेम और 3डीजीएस जैसी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, आईटी और धातु डाउनस्ट्रीम उद्योगों का विकास रक्षा विनिर्माण के लिए आवश्यक तकनीकी और औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि ओडिशा में औद्योगिक विकास अब कुछ जिलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में नई परियोजनाएं स्थापित हो रही हैं। उनके अनुसार, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आईटी और रक्षा विनिर्माण के बीच बेहतर तालमेल राज्य को उच्च तकनीक आधारित औद्योगिक विकास की दिशा में आगे ले जा सकता है। एचएएल कोरापुट के 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी इस प्रकार भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी प्रणोदन क्षमता के विस्तार की व्यापक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर सामने आई। एक ओर जहां एचएएल अपनी मौजूदा इंजन उत्पादन और ओवरहॉल क्षमता का विस्तार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार हाई-थ्रस्ट इंजन जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है।
इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल तेजपाल सिंह, एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. रवि, मिधानी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस.वी.एस. नारायण मूर्ति, संयुक्त सचिव (एयरोस्पेस विंग एवं डीओएमडब्ल्यू) मनीषा चंद्रा, नबरंगपुर के सांसद बलभद्र माझी, कोटपाड़ के विधायक रूपु भत्रा, लक्ष्मीपुर के विधायक पवित्र साउंत, कोरापुट के विधायक रघुराम मच्छा और कोरापुट के जिलाधिकारी मनोज सत्यवान महाजन सहित एचएएल के वरिष्ठ वैज्ञानिक, इंजीनियर, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।