पंजाब

शबाना महमूद अब बुलाएंगी अफगानिस्तान और फिलिस्तीन की प्रताड़ित महिलाओं को? जानिए यूके का नया शरणार्थी नियम

Amit Shah Jalandhar Rally: जालंधर में गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने का किया दावा। AAP सरकार पर साधा निशाना।

Published by
राकेश सैन

ब्रिटेन की होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने ब्रिटेन के लिए नई शरणार्थी नीति और नियमों की घोषणा की है। ब्रिटेन की सरकार यूनाइटेन्स नेशंस के साथ मिलकर यूके के पुनर्वास मार्गों को दोबारा खोलेगी। उन्होनें कहा कि वे इस पूरी दुनिया में सबसे प्रभावित लोगों को अपने यहाँ शरण देंगी, और उन्हें ब्रिटेन में एक नई और बेहतर ज़िंदगी का अवसर देंगी।

उनका कहना है कि इस तरह के कदम उठाने से नावों से जो अवैध रूप से ब्रिटेन में लोग आते हैं, वे कम हो जाएंगे। बीबीसी के अनुसार उन्होनें कहा कि यूके उन लोगों की सहायता कर अंतर्राष्ट्रीय उत्तरदायित्वों को पूरा करना चाहता है, जो युद्ध और उत्पीड़न से भाग रहे हैं, परंतु प्रक्रियाएं नियंत्रित होनी चाहिए।

यूके के होम ऑफिस के अनुसार यूएक रेसेटलमेंट योजना को तत्काल खोल दिया जाएगा और उसमें 25% अफगानी और फिलिस्तीनी महिलाएं और लड़कियां होंगी।

आलोचनाएं आरंभ

हालांकि इसे लेकर भी आलोचना आरंभ हो गई है। शैडो होम सेक्रेटरी ने इस कदम को लेबर में ही उन लोगों को संतुष्ट करने वाला कदम बताया, जो उनके शरणार्थी प्रयासों के विरोधी रहे थे।

हालांकि गार्डीअन के अनुसार प्रवासन विशेषज्ञों एवं शरणार्थियों के लिए चैरिटी चलाने वाले लोगों का कहना है कि यह संख्या बहुत कम होगी और इससे नाव के जरिए आने वाले अवैध शरणार्थियों की संख्या कम नहीं होगी।

इस योजना को लेकर आलोचनाएं इसलिए भी हो रही हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि अगर महिलाएं और लड़कियां और विकलांग लोग ही प्राथमिकता होंगे तो या तो उनके साथ लोग आएंगे या फिर वे देश की कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर होंगे।

यह भी कहा जा रहा है कि यूके की रेसेटलमेंट योजना को दोबारा खोला जा रहा है, हालांकि मीडिया के अनुसार यह दो वर्षों से निलंबित थी, मगर औपचारिक रूप से बंद नहीं हुई थी।

जो लोग इस योजना के माध्यम से ब्रिटेन में आएंगे उन्हें पाँच साल का समय दिया जाएगा। जो शरणार्थी हैं, उन्हें यूनाइटेड नेशन रेफ्यूजी एजेंसी और इंटरनेशनल रेफ्यूजी असिस्टन्स प्रोजेक्ट द्वारा पहचाना जाएगा।

सोशल मीडिया पर इस योजना की आलोचना

सोशल मीडिया पर इस योजना की आलोचना आरंभ हो गई है। लोगों का कहना है कि मात्र महिलाओं को लेना संभव कैसे हो सकता है और वह भी उन महिलाओं को जो परदे में रही हैं या रह रही हैं? क्या उनके घर के मर्द भी उनके साथ नहीं चले आएंगे?

Israel Minister of Diaspora and Combating Antisemitism अमिचई चिकली ने एक्स पर लिखा कि जब लोग यह कहते हैं कि इस्लाम ने किसी देश पर कब्जा कर लिया, तो लोग लंबे कपड़ों में दाढ़ी वाले शेखों की कल्पना करते हैं।

मगर वास्तविकता में राजनीतिक इस्लाम ऐसे आता है: ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी, फैशनेबल कपड़े और प्रगतिशील बातें। यही न्यूयॉर्क के मेयर मामदानी हैं और यही शबाना!

उन्होनें लिखा कि वे प्रार्थना करते हैं कि ब्रिटेन के लोग उस स्थिति में न आ जाएं, जहां से वापसी संभव न हो।

टोमी रॉबिन्सन ने भी इस योजना की आलोचना करते हुए एक्स पर लिखा कि पार्टी के ही एक वरिष्ठ राजनेता ने कहा था कि यूके होम सेक्रेटरी एक इस्लामिस्ट हैं और वह एकदम ठीक थे।

उन्होनें शबाना के पुराने बयानों का हवाला देकर कहा कि शबाना महमूद ने ऑन रिकार्ड कहा कि इस्लाम हर किसी चीज से पहले आता है। इस्लाम शरिया है। इसलिए उसने पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि शरिया लोकतंत्र की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है, ब्रिटिश कानूनों और मूल्यों के अनुसार है।

उन्होनें लिखा कि शबाना महमूद ने उनके खिलाफ इसलिए ही कदम उठाए हैं क्योंकि वे शबाना के इस कट्टरपंथ के खिलाफ हैं।

लोग इसे ट्रोजन हॉर्स कह रहे हैं।

लोग यह भी पूछ रहे हैं कि सरकार के लिए ब्रिटेन के लोग कब महत्वपूर्ण होंगे? उन्होनें लिखा कि पहले हर रिफ्यूजी के लिए £30,000 तक की फंडिंग रेट के हिसाब से, 3,000 लोगों के आने पर टैक्सपेयर को लगभग £90 मिलियन का खर्च आता था।

आगे लिखा था कि महज 2 हफ्ते पहले, एंजेला रेनर ने माना था कि लेबर पार्टी के 1.5 मिलियन घरों का टारगेट पूरा होने की उम्मीद कम है। ब्रिटेन अब अपने लोगों को घर नहीं दे सकता, तो ये लोग कहां जाएंगे?

आलोचना करने वाले लोगों का यही कहना है कि शबाना महमूद कहीं न कहीं ब्रिटिश लोगों को अनदेखा कर रही हैं और उनके लिए रेफ्यूजी महत्वपूर्ण हैं।

लोग पूछ रहे हैं कि क्या वे जिस जगह पर रहते हैं, वहीं पर उनके बच्चे रह पाएंगे? क्या ऐसा माहौल रहेगा कि वह रह सकें? लोग आंकड़ों का हवाला देकर कह रहे हैं कि महिलाएं अकेली तो नहीं आती हैं, उनके साथ उनके बच्चे भी आते हैं, तो क्या देश के करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा?

इस योजना को लेकर ब्रिटेन में रह रहे यहूदियों ने भी आपत्ति व्यक्त की है। jewish leadership council ने शबाना महमूद को लेकर एक बयान जारी करके पूछा है कि वे कैसे लोगों की पहचान करेंगी? और क्या फिलिस्तीनी महिलाओं को शरण देने से एंटी-सेमिटिज्म अर्थात यहूदी विरोधी घृणा नहीं बढ़ेगी?

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