भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों को नया निर्देश दिया है। अब कंपनियों को स्पैम कॉल्स पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। उपभोक्ता की शिकायत का इंतजार किए बिना ही संदिग्ध नंबरों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
एआई से कैसे पकड़े जाएंगे स्पैम नंबर
ट्राई ने सोमवार को अधिसूचना जारी की। इसमें साफ कहा गया है कि टेलीकॉम ऑपरेटर स्पैम कॉल्स पहचानने के लिए एआई का इस्तेमाल करें। अगर कोई आने वाली कॉल ‘सस्पेक्टेड स्पैम’ यानी संदिग्ध स्पैम के रूप में चिह्नित होती है, तो ऑपरेटर को दो घंटे के अंदर उस कंपनी को पूरी डिटेल्स भेजनी होंगी जहां से कॉल आई है।
केवाईसी दोबारा शुरू करने का नियम
स्पैम कॉल करने वाले नंबर का केवाईसी यानी नॉ योर कस्टमर प्रोसेस फिर से शुरू करना होगा। अगर पिछले 10 दिनों में किसी सेंडर के पांच या उससे ज्यादा सीएलआई की पहचान हो जाती है, तो उससे जुड़े सभी ऑपरेटरों को कार्रवाई करनी होगी।
सीएलआई मतलब कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन। यह कॉल करने वाले का मूल फोन नंबर होता है, जो नेटवर्क के जरिए आगे भेजा जाता है।
कनेक्शन काटने और शिकायत दर्ज कराने की बात
नियम तोड़ने पर फोन कनेक्शन काटा जा सकता है। साथ ही सरकारी एजेंसियों के पास शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी। सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को एक दिन के अंदर अपने सिस्टम में जांच करनी होगी कि पिछले 10 दिनों में उनके नेटवर्क में संदिग्ध स्पैमर से जुड़े और कोई कनेक्शन तो नहीं हैं। अगर मिलते हैं तो उन पर भी कार्रवाई करनी होगी।
शिकायत के बिना भी कार्रवाई संभव
पहले अक्सर कंपनियां उपभोक्ता की शिकायत आने का इंतजार करती थीं। अब ट्राई ने निर्देश दिया है कि एआई सिस्टम से पहचाने गए स्पैम नंबरों पर बिना शिकायत के भी सख्त कदम उठाए जाएं। इससे फर्जी नंबरों और बार-बार आने वाली स्पैम कॉल्स को जल्दी रोका जा सकेगा। यह निर्देश सभी टेलीकॉम कंपनियों पर लागू है। ट्राई का मकसद स्पैम कॉल्स की समस्या कम करना और उपभोक्ताओं को राहत देना है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ सामने आई है।











