
देहरादून। उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS में दाखिले के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के मामले में जांच अब तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। देहरादून की एसपी देहात जया बलूनी को SIT का अध्यक्ष बनाया गया है।
SIT ने जांच शुरू करते हुए SDM कार्यालय में राजस्व विभाग के पटवारियों से पूछताछ की है। इस दौरान संबंधित राजस्व अभिलेखों और प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। एसडीएम अपूर्वा सिंह की मौजूदगी में हुई पूछताछ में प्रमाणपत्रों के लिए किए गए आवेदन, स्थानीय सत्यापन और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
मामले की जांच में सामने आया कि चार अभ्यर्थियों—परी, खुशी, स्वाति और तृप्ति—के दस्तावेजों में कथित तौर पर धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया गया। प्रशासन की शुरुआती जांच में इस नाम से संबंधित स्वतंत्रता सेनानी का रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और चारों अभ्यर्थियों के MBBS दाखिले भी रद्द कर दिए गए।
अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि एक ही परिचय पत्र चार अलग-अलग प्रमाणपत्रों में कैसे इस्तेमाल हुआ और आवेदन से लेकर सत्यापन व दाखिले तक किस स्तर पर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई।
मामले में रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। क्लेमनटाउन मामले में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी को आरोपी बनाया गया है, जबकि रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति नामजद हैं। दोनों मामलों में कुल पांच महिलाएं आरोपी हैं।
SIT अब दोनों मुकदमों से जुड़े मूल दस्तावेज, आवेदन पत्र, प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व में हुई जांच की फाइलों का परीक्षण कर रही है।
SIT अध्यक्ष जया बलूनी के मुताबिक, जांच के दौरान धर्मवीर के परिजनों से संपर्क कर उनके पुत्र और पौत्र के बयान दर्ज किए गए हैं। संबंधित जांचकर्ता पटवारी के बयान भी लिए गए हैं। इसके अलावा मामले से जुड़े आरोपियों के बताए पतों का सत्यापन भी कराया गया, जिसमें पुलिस के अनुसार चारों के पते फर्जी पाए गए।
हालांकि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका अभी निर्धारित नहीं की गई है। SIT दस्तावेजों और बयानों का मिलान करने के बाद ही जिम्मेदारी तय करेगी।
इस मामले को सामने लाने वाले पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने 3 सितंबर को चिकित्सा शिक्षा विभाग को शिकायत दी थी। शिकायत में कुछ अभ्यर्थियों पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डोमिसाइल और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र हासिल कर MBBS में दाखिला लेने के आरोप लगाए गए थे।
प्रशासन की शुरुआती जांच के बाद चार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और दाखिले रद्द हुए। वहीं 18 सितंबर को प्रदीप बहुगुणा ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर करीब 370 लोगों की एक संदिग्ध सूची भी सौंपी। उन्होंने इन मामलों की भी जांच की मांग की है।
अब SIT के सामने बड़ा सवाल यही है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार होने से लेकर उसके सरकारी स्तर पर सत्यापन और MBBS दाखिले में इस्तेमाल होने तक पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और नाम या जिम्मेदारियां सामने आने की संभावना है।