असम

असम में कड़ी कार्रवाई से दहशत में बांग्लादेशी घुसपैठिये

भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध घुसपैठ एक जटिल और संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।

Published by
अभय कुमार

असम पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई की है। गुवाहाटी और बोंगाईगांव-रंगिया क्षेत्र से 27 लोगों को हिरासत में लिया गया है। ये सभी बांग्लादेश के ढाका, खुलना, मैमनसिंह से ताल्लुक रखते हैं और बिना वैध दस्तावेज के भारत में रह रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर और बेंगलुरु जाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस-प्रशासन ने इन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध घुसपैठ एक जटिल और संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार, सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक कदम उठा रहे हैं। भाजपा नीत राजग सरकार सीमा पर सुरक्षा और घुसपैठ को रोकने के लिए कारगर कदम उठा रही है।

सीमा पर सुरक्षा के ये हैं उपाय

भारत-बांग्लादेश की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा के बड़े हिस्से पर कटीली बाड़ लगाई गई है। नदी वाले इलाकों में जहां बाड़ लगाना मुश्किल है वहां तकनीकी समाधानों का उपयोग किया जा रहा है।  सीमा सुरक्षा बल दिन-रात सीमा पर गश्त करती है। घुसपैठ के प्रयासों को रोकने के लिए सीमा पर एंटी-कटिंग और एंटी-क्लाइंबिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।इसके अलावे बिना वैध दस्तावेजों के पकड़े जाने वाले लोगों को फॉरेनर्स एक्ट के तहत हिरासत में लिया जा रहा है। पहचान की पुष्टि के बाद उन्हें वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

पूरा सिंडिकेट करता है काम

भारत में अवैध घुसपैठ की समस्या बांग्लादेशी नागरिकों और उन्हें स्थानीय स्तर पर नकली दस्तावेज मुहैया कराने वाले दलालों के सिंडिकेट से जुड़ी है। हाल के दिनों में देश के विभिन्न प्रदेशो  खासकर दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और गुजरात में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने ऐसे कई बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। पुलिस और सुरक्षा बलों की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

गिरोह ऐसे करता है काम

अवैध नागरिक अक्सर जंगल के रास्ते, नदियों या  पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा के सीमावर्ती इलाकों  के जरिए भारतीय सीमा में प्रवेश करते हैं। सीमा पार करने  के बाद स्थानीय दलाल इन लोगों को दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ या अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में भेजते हैं। यहां इन्हें किराए पर मकान दिलाने और पहचान छिपाने में मदद करते है। यह गिरोह  रकम लेकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और नकली रेंट एग्रीमेंट तैयार करवा देता है। इन नकली कागजातों की मदद से वे कंप्यूटर सेंटरों या कुछ फर्जी ऑपरेटरों के जरिए नकली या डुप्लीकेट आधार कार्ड और पैन कार्ड हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे भारतीय नागरिकों की तरह रहने लगते हैं। इसके बाद बैंक खाते खुलवाने और कुछ मामलों में अवैध रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या भारतीय पासपोर्ट बनवाने में भी कामयाब हो जाते हैं।

गिरोह की टूट रही है कमर

मोदी सरकार के कार्यकाल में अब इस प्रकार के अवैध कार्यों में काफी कमी आई है। असम में भाजपा की सरकार 2016 से घुसपैठ पर काफी हद तक रोक लगाने में सफल हुई थी । मगर असम से दिक्कत होने के बाद पश्चिम बंगाल के रास्ते ये पहले राज्य में प्रवेश करते थे और फिर पूरे देश में फैल जाते थे। इसमें ममता बनर्जी सरकार का मौन समर्थन प्राप्त था । ममता बनर्जी सीमा सुरक्षा बल को जमीन मुहैया नहीं करवा रही थीं, जिससे बांग्लादेश की सीमा पर तारबंदी करके अवैध प्रवेश पर रोक लगाया जा सके। मगर पश्चिम बंगाल में अधिकारी सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को जमीन मुहैया करवाकर अब अवैध प्रवेश पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की डबल इंजन की सरकारों में इस अवैध प्रवेश पर बड़े पैमाने पर लगाम लगी है।

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