इंडोनेशिया के अनाक क्रकाताउ द्वीप पर हाल ही में ज्वालामुखी फटने की खबरें आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में लोग घबराकर भागते दिख रहे हैं और पीछे से बहुत बड़ा लावा का फव्वारा निकल रहा है। कई लोगों ने इसे हालिया विस्फोट का असली फुटेज बताकर शेयर किया।
क्या दावा किया जा रहा था
एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा कि यह इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने का करीब से लिया गया खौफनाक नजारा है। कुछ न्यूज चैनलों और वेबसाइटों ने भी इस वीडियो या इसकी स्क्रीनशॉट को अपनी रिपोर्ट के साथ इस्तेमाल किया। टाइम्स ऑफ इंडिया और न्यूज18 गुजराती जैसी जगहों पर भी यह फुटेज दिखाया गया।
वास्तविकता क्या है
यह वीडियो असल में हालिया विस्फोट का नहीं है। इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने जांच की तो पता चला कि पूरा वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से बनाया गया है।
जांच में क्या मिला
वीडियो को ध्यान से देखने पर कई गड़बड़ियां नजर आईं। एक आदमी का चेहरा सफेद-सा लग रहा था और उसके हाथ-पैर बैकग्राउंड में मिलते जा रहे थे। कुछ और लोगों के पैर दौड़ते-दौड़ते गायब हो रहे थे। चेहरे भी विकृत और अजीब लग रहे थे। ये सब AI वीडियो की आम खामियां हैं। isfake.ai जैसे AI डिटेक्शन टूल्स ने भी काफी ऊंचे कॉन्फिडेंस के साथ कहा कि यह वीडियो सिंथेटिक यानी नकली है।
अनाक क्रकाताउ की असल लोकेशन
अनाक क्रकाताउ सुंडा स्ट्रेट में स्थित है, जो सुमात्रा और जावा द्वीपों के बीच पड़ता है। सैटेलाइट तस्वीरें और असल फोटो देखने पर साफ है कि वायरल वीडियो में दिख रही जगह इससे बिल्कुल अलग है। PBS न्यूज के अनुसार सबसे नजदीकी बस्ती भी इस ज्वालामुखी द्वीप से 16 किलोमीटर से ज्यादा दूर है। अधिकारियों ने लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी हुई है। ऐसे में इतने करीब से इतना डिटेल्ड वीडियो बनना व्यावहारिक नहीं लगता।
वायरल वीडियो का असल रूप
वीडियो में दिख रहे दृश्य, लोगों के चेहरे और शरीर की बनावट, और पूरा माहौल artificial लग रहा था। असल विस्फोट के फुटेज अलग हैं और वे उपलब्ध भी हैं। वायरल क्लिप में जो लोग भागते दिख रहे थे, उनकी चाल और रूप-रंग में भी AI का होने के साफ संकेत थे।
















