महाराष्ट्र में नवरात्रि उत्सव से पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में हिंदू बहन-बेटियों को जिहादियों बचाने के लिए दिशानिर्देश तय किए हैं। संगठन ने आयोजकों से कार्यक्रम में आने वालों की हिंदू पहचान की पुष्टि करने के लिए दिशानिर्देश तय किए हैं। इसके तहत कार्यक्रम में आए सभी प्रतिभागियों के आधार कार्ड की जांच करना और माथे पर तिलक लगाना शामिल है। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ताओं ने मुस्लिमों के गरबा आयोजनों में शामिल होने को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा का पर्व है। मूर्ति पूजा के खिलाफ रहने वाले मुस्लिम इस त्यौहार में क्यों शामिल हों? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ इस्लामिक जिहादी हिंदू बहन-बेटियों के प्रति बुरे इरादे रखते हैं और उपद्रव करते हैं, इसीलिए गरबा-डांडिया आयोजकों से पहचान की जांच करने के लिए कहा गया है।
‘गरबा में हिंदू बहन-बेटियों को बुरी नजर से देखते हैं जिहादी’
वीएचपी के विनोद बंसल ने मीडियाकर्मियों से कहा, “हमने किसी को नहीं रोका। गरबा-डांडिया की बात हो या फिर दुर्गा पूजा या काली पूजा, नवरात्रि या गणेश उत्सव हो। इन उत्सवों में जो कोई आना चाहे श्रद्धा और भक्ति के साथ आए। हिंदू परंपरा का पालन करे। जो आए वो हिंदू मान्यता के साथ आए। अगर मां दुर्गा का आयोजन है, गरबा है, तो निसंदेह मां दुर्गा की पूजा करे। श्रद्धापूर्वक उन्हें नमन करे। तिलक लगाने के लिए मना न करें। अगर कोई प्रसाद बांटा जा रहा है, तो उसके लिए मना न करें। चरणामृत ग्रहण करे। माहौल को सात्विक और धार्मिक बनाए रखने में सहयोग करें न कि उसको दूषित करें।”
उन्होंने कहा, ”पिछले कुछ वर्षों में इस्लामिक जिहादी, असामाजिक तत्वों और हिंदू विरोधी विकृत मानसिकता के लोग गरबा आयोजनों में मेरी माता, बहनों, बेटियों के साथ दुराचार करते और उन्हें बुरी नजर से देखते हुए पकड़े गए हैं। कार्यक्रम में खलल डालना, उसे बाधित करना और अपनी जिहादी सोच के कारण उसको खराब करना ये उनकी मानसिकता रहती है। हमने तो केवल यह कहा है कि आप अपनी पहचान की जांच कराकर आएं। आयोजक इसकी पुष्टि करें कि कार्यक्रम में आने वाले श्रद्धा और पूरी आस्था के साथ आ रहे हैं।”
‘जिनकी मां दुर्गा में आस्था नहीं है, वे आयोजन में क्यों आते हैं’
विनोद बंसल कहते हैं कि जिनकी मां दुर्गा में आस्था नहीं है, जो भारत मां की जय नहीं बोलते, मूर्ति पूजा नहीं करते, वंदे मातरम् तक नहीं बोलते वो गरबा और नवरात्रि आयोजन में क्यों आते हैं? मानसिकता साफ है कि उनका मकसद कुछ और ही है। अगर आए तो अपनी माता-बहन, बेटियों के साथ आएं। हमें कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि इस कार्यक्रम में महिलाएं अधिक होती हैं। आयोजन पूरी तरह से धार्मिक और सात्विक होता है इसलिए आपको प्रवेश करते हुए उसी परंपरा और मानसिकता को रखना होगा। इसमें किसी धर्म विशेष के साथ भेदभाव नहीं है। अगर वह माता की पूजा करता है, माता के जयकारे लगाता है, माता का प्रसाद ग्रहण करता है, श्रद्धा और भक्ति के साथ आता है, तो निसंदेह आए तो हमें कोई दिक्कत नहीं।
नवरात्रि उत्सव 11 अक्टूबर से
नवरात्रि उत्सव इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगा और 20 अक्टूबर को समाप्त होगा। विश्व हिंदू परिषद द्वारा मुस्लिमों का गरबा-डांडिया कार्यक्रम में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना सोशल मीडिया यूजर्स को भी काफी पसंद आया है। उन्होंने कहा कि गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि मां दुर्गा की आराधना है।

















