
राहुल गांधी
राहुल गांधी अपनी ‘छात्रों की गूँज’ पहल के जरिए सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इस बीच एक वेबसाइट ‘झूठ की गूँज’ सामने आई है, जिसमें अब तक हुई चार कार्यक्रमों का फैक्ट चेक किया है। हालांकि, इस साइट को भाजपा से जोड़ा जा रहा है। वहीं भाजपा ने इससे किसी संबंध से इनकार किया है। साइट पर इसके बनाने वालों का जिक्र नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे “राष्ट्रवादी रिसर्चर” और Gen-Z युवाओं से जोड़ा है, उसी पीढ़ी को निशाना बनाकर राहुल शहर-शहर घूम रहे हैं।
साइट पर लिखा है,“यहाँ वे सभी झूठ हैं जो राहुल गांधी ने अपनी तथाकथित छात्रों की गूँज में बोले।” यह साफ बताती है कि वह राहुल के भाजपा विरोधी अभियान के खिलाफ खड़ी है। साइट का दावा है कि चार मुलाकातों में राहुल ने कुल 40 दावे किए। इनमें से 29 झूठे और 11 भ्रामक बताए गए हैं।
राहुल ने कहा था कि नौकरी ढूँढने वाले एक हजार युवाओं में से करीब 36 को स्थायी नौकरी मिलेगी। लगभग 300 बेरोजगार रहेंगे और करीब 700 गिग वर्कर बन जाएँगे। साइट इसे गलत बताती है। वह पीएलएफएस यूनिट-लेवल डेटा का हवाला देती है और कहती है कि 2025 में 15-29 साल के हर सौ ग्रेजुएट्स में से 26 के पास सैलरी वाली नौकरी है।
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राहुल का एक और दावा था कि करीब 29 प्रतिशत महिलाओं को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है। साइट कहती है कि यह पुराने एनएफएचएस आंकड़ों पर आधारित है। मोदी सरकार के आने के बाद एनएफएचएस डेटा में पति द्वारा शारीरिक या यौन हिंसा में गिरावट दिखती है, 2005-06 में 37.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 22.3 प्रतिशत।
साइट कितना असर डालेगी, यह अलग बात है। लेकिन भाजपा समर्थक आवाजें सोशल मीडिया पर उत्साहित दिख रही हैं। एक यूजर ने लिखा, “छल-कपट वाले आंकड़ों से लेकर गढ़े गए आंकड़ों तक, हर दावे की अब जाँच हो चुकी है।”